नई दिल्ली, चार अक्टूबर। विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने रविवार को यहां ‘म्यूनिख लीडर्स मीटिंग’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत ने रूस व यूक्रेन के बीच लंबे समय से जारी युद्ध से उत्पन्न संकट सुलझाने के लिए अपने प्रयास तेज कर दिए हैं। इस क्रम में कीव (यूक्रेन) व मॉस्को (रूस) दोनों के साथ भारत की बातचीत जारी है।
दरअसल, नई दिल्ली की ओर से रूसर-यूक्रेन युद्ध खत्म करने की हालिया पहल पर यह पहला सार्वजनिक बयान है। जयशंकर की यह टिप्पणी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के उस बयान के कुछ दिनों बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि इस संघर्ष का एक ऐसा समाधान खोजने के लिए, जो दोनों पक्षों को स्वीकार्य हो, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास अच्छे विचार हैं। वहीं, यूक्रेन के विदेश मंत्री एंड्री सिबीहा ने शुक्रवार को कहा कि कीव को एक संभावित युद्धविराम के लिए भारत व तीन अन्य देशों से अलग-अलग प्रस्ताव मिले हैं।
काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के मुद्दे से शुरुआत के साथ मदद की कोशिश
नई दिल्ली के प्रयासों की कुछ जानकारियां साझा करते हुए, जयशंकर ने कहा कि भारत काला सागर (ब्लैक सी) में जहाजों की सुरक्षा के साथ-साथ अनाज के निर्यात और ऊर्जा आपूर्ति को सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है। पिछले चार से अधिक वर्षों से, भारत लगातार बातचीत और कूटनीति के माध्यम से यूक्रेन संघर्ष को सुलझाने पर जोर दे रहा है।
Addressing the opening session of Munich Leaders Meeting 2026, in New Delhi. @MunSecConf #MLMNewDelhi https://t.co/I5M2893oG1
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 4, 2026
उन्होंने कहा, ‘इस संघर्ष पर हमारा रुख बेहद साफ रहा है और वह यह है कि हम इस युद्ध का अंत देखना चाहते हैं। इसके लिए बातचीत और कूटनीति की जरूरत होगी। इस संबंध में बातचीत की मेज पर आना ही होगा।’
विदेश मंत्री ने आगे कहा, ‘हम कई वर्षों से इसकी वकालत कर रहे हैं और हाल के महीनों में हम सिर्फ सलाह देने से थोड़ा आगे बढ़कर इसमें अधिक शामिल हुए हैं। इस सिलसिले में हमारी रूस और यूक्रेन दोनों के साथ बातचीत चल रही है। हम काला सागर में जहाजों की सुरक्षा के मुद्दे से शुरुआत करते हुए मदद करने की कोशिश कर रहे हैं।’
भारत कुछ तात्कालिक चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहा
जयशंकर ने कहा, ‘भारत उससे भी आगे बढ़कर उन कुछ तात्कालिक चिंताओं को दूर करने की कोशिश कर रहा है, जो दोनों देशों (रूस और यूक्रेन) को अनाज निर्यात, ऊर्जा निर्यात और एक-दूसरे पर हमला न करने की संभावनाओं को लेकर हैं. इस समय ये बातचीत जारी है।’
A pleasure to speak at the #MLMNewDelhi today on emerging and middle power (EMP) cooperation. Thank Ambassador @ischinger, Chairman of the @MunSecConf.
Made the following points:
✅ EMPs are from Global South & Global North, united in their goal of being more relevant. They are conscious of what they bring to the table.
✅ The changing landscape which drives the EMP debate is of a repositioning US, rise of China, shaper competition and greater interdependence.
✅ EMPs’ approach is to de-risk & to diversify, and pursue agenda based cooperation.
✅ The resulting outcome is of multipolarity, multi-alignment and small groups.
✅ EMPs can develop a broad-based agenda that will contribute to reformed multilateralism.
Wish the #MLMNewDelhi all success.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) October 4, 2026
उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 अगस्त को बिश्केक में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ व्यापक बातचीत की थी, जहां उन्होंने इस बात पर जोर दिया था कि ‘अब इस अंतहीन युद्ध को समाप्त होना ही चाहिए।’
रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर भी विस्तार से बात की
विदेश मंत्री ने रूस के साथ भारत के ऐतिहासिक संबंधों पर भी विस्तार से बात की। उन्होंने कहा, ‘भारत और रूस के बीच ऐतिहासिक रूप से बहुत अच्छे संबंध रहे हैं, विशेषकर 1950 के दशक से। उस इतिहास को भुलाया नहीं गया है। सोवियत संघ ने उस समय कई तरीकों से हमारा साथ दिया, जब हमारी सुरक्षा और हमारी क्षेत्रीय अखंडता खतरे में थी।’
‘एक समय जब दुनिया के कई देश पाकिस्तान के समर्थन में थे, तब सोवियत संघ हमारे साथ खड़ा था’
उन्होंने आगे कहा, ‘एक ऐसे समय में, जब दुनिया का अधिकतर हिस्सा हमारे पड़ोस में एक सैन्य शासन (पाकिस्तान) का समर्थन करना पसंद कर रहा था, तब रूस एक ऐसा देश था, जिसके साथ हमारे संबंध बहुत अच्छे थे, और हम कई मायनों में उस विरासत से जुड़े हुए हैं। अब दोनों देशों के बीच यह जुड़ाव काफी हद तक बढ़ चुका है।’
अब दोनों देशों के बीच यह जुड़ाव काफी हद तक बढ़ चुका है
उन्होंने कहा, ‘आज यह संबंध काफी हद तक एक आर्थिक रिश्ता भी बन चुका है। इसमें एक सैन्य घटक है, परमाणु घटक हैं, अंतरिक्ष का पहलू है, लेकिन इसके साथ ही दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, ऊर्जा और संसाधनों का भी एक बड़ा हिस्सा शामिल है।’


