सुप्रीम कोर्ट ने याचिका लेकर पहुंचे प्रशांत किशोर को लौटाया, CJI सूर्यकांत बोले- लोगों ने रिजेक्ट किया, तब याद आई?
नई दिल्ली, 6 फरवरी। सुप्रीम कोर्ट ने प्रख्यात राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर की जन सुराज पार्टी को कड़ी फटकार लगाई है, जो कथित फ्रीबीज को लेकर बिहार चुनाव रद करने की मांग के लिए सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार को जन सुराज की याचिका पर सुनवाई के दौरान दौरान फटकार लगाई और कहा कि हारी हुई पार्टी के कहने पर अदालतों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने को कहा
शीर्ष अदालत ने जन सुराज की दलीलें सुनने के बाद याचिका की सुनवाई से इनकार कर दिया और याचिकाकर्ता को पटना हाई कोर्ट जाने को कहा। जस्टिस सूर्यकांत ने इस क्रम में कहा कि जब लोग आपको रिजेक्ट कर देते हैं, तो क्या आप राहत पाने के लिए न्यायिक मंच का इस्तेमाल करते हैं।
जन सुराज की दलीलें
वहीं, याचिकाकर्ता ने दलील दी कि जब राज्य में आचार संहिता लागू था, उस दौरान महिलाओं को 10-10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए। इस पर सीजेआई जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि यह महिलाओं की सहायता के लिए जारी राशि का हिस्सा था।
सुप्रीम कोर्ट में प्रशांत किशोर की पार्टी के तरफ वकील चंद्र उदय सिंह ने दलीलें रखीं। उन्होंने कहा कि यह तय समय पर सोच समझकर किया गया और यह सभी महिलाओं के लिए हो गया, जिनके पति इनकम टैक्स के दायरे में नहीं हैं। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने कहा कि चुनाव याचिका में एक चुनाव को मुद्दा बनाया जाता है। आप तो एक ही याचिका में पूरा चुनाव रद करने की बात कर रहे हैं, इसकी योग्यता नहीं है।
वकील चंद्र उदय सिंह ने कहा कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। अदालत को इसमें हस्तक्षेप कर जवाब-तलब करना चाहिए। सीजेआई सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने साफ कर दिया कि हम नोटिस जारी नहीं कर सकते।
जन सुराज ने बिहार चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए रद करने की मांग की थी
दरअसल, जन सुराज की ओर से दायर याचिका में बिहार विधानसभा चुनाव 2025 को अवैध बताते हुए रद करने की मांग की गई थी। याचिका में 2025 के बिहार विधानसभा चुनावों से पहले मतदाताओं को प्रभावित करने के लिए राज्य की एक कल्याणकारी योजना के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था।
