Gangster छोटा राजन समेत 5 आरोपी बरी, शिवसेना नेता अजय भोसले की कथित हत्या का था मामला

मुंबई, 31 अक्टूबर। गैंगस्टर छोटा राजन को करीब 17 साल पुराने हत्या की कोशिश के मामले में बड़ी राहत मिली है। मुंबई की सीबीआई की विशेष अदालत ने 2009 में पुणे के शिवसेना नेता अजय भोसले पर हुए कथित जानलेवा हमले के मामले में छोटा राजन समेत पांच आरोपियों को बरी कर दिया है। अदालत ने सभी आरोपियों को हत्या की कोशिश, आपराधिक साजिश और आर्म्स एक्ट के तहत लगाए गए आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।

बरी होने वाले अन्य आरोपियों में पुणे के बिल्डर सुरेंद्रकुमार अग्रवाल, मोहम्मद खान, विजय तांबट और राजेश यादव शामिल हैं। हालांकि, अदालत ने आरोपियों को बरी करने के पीछे के विस्तृत कारणों वाला आदेश अभी जारी नहीं किया है।

तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेश हुआ छोटा राजन

70 वर्षीय छोटा राजन ने सुरक्षा कारणों से तिहाड़ जेल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत की कार्यवाही में हिस्सा लिया। वह फिलहाल तिहाड़ जेल में बंद है। इस मामले में उसे पिछले साल जमानत मिल चुकी थी, लेकिन पत्रकार जेडे (J Dey) की 2011 में हुई हत्या के मामले में उम्रकैद की सजा काटने के कारण उसकी जेल से रिहाई नहीं होगी।

क्या है 2009 में अजय भोसले पर फायरिंग का मामला?

यह मामला 11 अक्टूबर 2009 का है। आरोप था कि छोटा राजन के दो कथित साथियों ने पुणे में शिवसेना नेता अजय भोसले की कार पर गोलियां चलाई थीं। इस हमले में भोसले बाल-बाल बच गए थे, जबकि उनके ड्राइवर को गोली लगने से चोट आई थी।

सरकारी वकील के मुताबिक, इस हमले की वजह पुणे के बिल्डर सुरेंद्रकुमार अग्रवाल, आरके अग्रवाल और वीके अग्रवाल के बीच चल रहा संपत्ति विवाद था। जांच एजेंसियों का आरोप था कि सुरेंद्रकुमार ने विवाद सुलझाने और संपत्ति में अपना हिस्सा हासिल करने के लिए विजय तांबट से संपर्क किया था। तांबट के कथित तौर पर छोटा राजन से संबंध थे।

राजन पर धमकी देने और 50 से ज्यादा फोन कॉल करने का आरोप

अभियोजन पक्ष ने दावा किया था कि छोटा राजन ने आरके अग्रवाल को फोन पर धमकी दी थी। मार्च से मई 2009 के बीच अजय भोसले को भी राजन की ओर से 50 से अधिक फोन कॉल किए जाने का आरोप लगाया गया था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, राजन को शक था कि भोसले संपत्ति विवाद में दोनों पक्षों के बीच समझौता कराने के रास्ते में बाधा बन रहे हैं। इसी वजह से उन्हें निशाना बनाया गया।

फायरिंग की घटना से पहले 1 मई 2009 को राजन के कथित साथियों ने पुणे के रेजीडेंसी क्लब में आरके अग्रवाल से मुलाकात की थी। आरोप था कि इस दौरान उन पर संपत्ति विवाद को सुलझाने के लिए दबाव बनाया गया था।

पुणे पुलिस से महाराष्ट्र CID और फिर CBI को मिली जांच

इस मामले में शुरुआत में पुणे के बंड गार्डन पुलिस स्टेशन में केस दर्ज किया गया था। बाद में जांच महाराष्ट्र सीआईडी को सौंप दी गई। वर्ष 2015 में छोटा राजन के भारत प्रत्यर्पण के बाद सीबीआई ने उसके खिलाफ दर्ज अन्य मामलों के साथ इस केस की जांच भी अपने हाथ में ले ली थी।

ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष ने छोटा राजन को संगठित अपराध गिरोह का सरगना बताते हुए उसके आपराधिक इतिहास और विभिन्न वारदातों में कथित भूमिका का उल्लेख किया। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि अजय भोसले पर हमले की कोशिश या साजिश में छोटा राजन की भूमिका साबित करने के लिए कोई ठोस सबूत मौजूद नहीं है।

फिलहाल सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले के बाद छोटा राजन समेत पांचों आरोपियों को इस मामले में राहत मिल गई है। विस्तृत आदेश जारी होने के बाद ही अदालत द्वारा आरोपियों को बरी करने के आधार स्पष्ट हो सकेंगे।

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