लखनऊ, 4 सितंबर। हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। किसी भी शुभ कार्य, यात्रा, निवेश या पूजा-पाठ से पहले पंचांग देखकर शुभ मुहूर्त और ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का आकलन किया जाता है। पंचांग सूर्य, चंद्रमा और अन्य ग्रहों की स्थिति पर आधारित हिंदू कालगणना की महत्वपूर्ण पद्धति है। 4 सितंबर 2026, शुक्रवार को भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि रात 12:13 बजे तक रहेगी। इसके बाद नवमी तिथि शुरू होगी। इस दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाएगा। गृहस्थ लोग शुक्रवार को भगवान श्रीकृष्ण और लड्डू गोपाल की पूजा करेंगे।
जन्माष्टमी पर निशीथ काल में होगी पूजा
जन्माष्टमी पर भगवान श्रीकृष्ण के जन्म का उत्सव मध्यरात्रि में मनाया जाता है। शुक्रवार को निशीथ काल रात 11:57 बजे से 12:43 बजे तक रहेगा। इसी अवधि में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव और पूजा करना विशेष फलदायी माना जाता है। दिन की शुरुआत सुबह 6:13 बजे सूर्योदय से होगी, जबकि शाम 6:38 बजे सूर्यास्त होगा। वहीं, चंद्रोदय रात 11:45 बजे और अगले दिन चंद्रास्त सुबह 1:00 बजे होगा।
नक्षत्र और योग
पंचांग के अनुसार, इस दिन सूर्य पूर्व फाल्गुनी नक्षत्र में रहेगा। चंद्रमा रात करीब 11:04 बजे तक रोहिणी नक्षत्र में रहेगा, इसके बाद मृगशिरा नक्षत्र शुरू होगा। शुक्रवार को हर्षण योग दोपहर करीब 3:44 बजे तक रहेगा। इसके बाद वज्र योग शुरू हो जाएगा। अभिजित मुहूर्त दोपहर 12:01 बजे से 12:50 बजे तक रहेगा। इसे दिन का अत्यंत शुभ समय माना जाता है। वहीं अमृत काल रात 8:02 बजे से 9:32 बजे तक रहेगा।
राहुकाल और अन्य अशुभ समय
शुक्रवार को राहुकाल सुबह 10:52 बजे से दोपहर 12:25 बजे तक रहेगा। इसके अलावा गुलिक काल सुबह 7:46 बजे से 9:19 बजे तक और यमगंड काल दोपहर 3:31 बजे से शाम 5:05 बजे तक रहेगा। पारंपरिक ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, इन अवधियों में नए और महत्वपूर्ण कार्य शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
किस राशि में रहेंगे सूर्य और चंद्रमा?
4 सितंबर को सूर्य सिंह राशि में स्थित रहेगा, जबकि चंद्रमा वृषभ राशि में रहेगा। इस दिन पश्चिम दिशा में दिशाशूल रहेगा। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार पश्चिम दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए। यदि यात्रा आवश्यक हो तो परंपरागत ज्योतिषीय उपाय करके प्रस्थान किया जा सकता है।


