पाकिस्तान में तोड़ा गया 100 वर्ष पुराना मंदिर, केंद्र सरकार ने जताई कड़ी आपत्ति

नई दिल्ली, 2 सितम्बर। केंद्र सरकार ने पाकिस्तान में एक सदी से भी ज्यादा पुराने हिन्दू मंदिर को तोड़े जाने पर कड़ी आपत्ति जताई है। विदेश मंत्रालय की तरफ से कहा गया कि उसने इस घटनाक्रम पर अपना विरोध दर्ज कराया है।

विदेश मंत्रालय ने साथ ही यह भी कहा कि यह घटना दिखाती है कि पाकिस्तान में किस तरह से अल्पसंख्यकों के खिलाफ अत्याचार किए जा रहे हैं। केंद्र ने पाकिस्तान सरकार से इस मामले में समुचित जांच करवाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी काररवाई करने की अपील की।

पाकिस्तान में हिन्दू मंदिर तोड़े जाने की घटना सामने आने के बाद विदेश मंत्रालय ने इस मामले में बयान जारी किया। विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में इसकी कड़ी निंदा की गई। बयान में कहा गया, ‘हमने पाकिस्तान के नारोवाल जिले में सिराज गांव में ऐतिहासिक हिन्दू मंदिर को तोड़े जाने की घटना को नोट किया है। हम अल्पसंख्यक समुदाय के एक सदी पुराने पूजा-स्थल के साथ की गई इस तोड़-फोड़ की कड़ी निंदा करते हैं।’

पाकिस्तानी अधिकारी इस मामले में दिखा रहे उदासीनता

विदेश मंत्रालय ने इस मामले में पाकिस्तानी अधिकारियों पर भी निशाना साधा। बयान में कहा गया, ‘पाकिस्तानी अधिकारियों का इस मामले में उदासीनता दिखाना और एक सदी पुराने हिन्दू मंदिर की रक्षा न कर पाना चिंताजनक है। ऐसी घटनाएं इस बात की कड़वी याद दिलाती हैं कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय कितने असुरक्षित हैं और वहां उनकी धार्मिक आजादी और पूजा-स्थलों का किस तरह घोर उल्लंघन हो रहा है।

मंदिर की सुरक्षा करे पाकिस्तान सरकार

विदेश मंत्रालय की तरफ से जारी बयान में शहबाज शरीफ सरकार को भी सीधा संदेश दिया गया। बयान में कहा गया, ‘हम पाकिस्तान सरकार से मांग करते हैं कि वह इस घटना की तुरंत और पारदर्शी जांच करे और यह सुनिश्चित करे कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों को पूरी तरह जवाबदेह ठहराया जाए। इसके अलावा, पाकिस्तान सरकार को अपवित्र किए गए मंदिर को बहाल करने के लिए तुरंत सुधारात्मक कदम उठाने चाहिए और अपने सभी अल्पसंख्यक नागरिकों और उनकी सांस्कृतिक विरासत की सुरक्षा और भलाई सुनिश्चित करने की अपनी मुख्य जिम्मेदारी को पूरा करना चाहिए।’

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