पश्चिम बंगाल : विधानसभा चुनाव से पहले राज्यपाल सी.वी. आनंद बोस ने दिया इस्तीफा
कोलकाता, 5 मार्च। पश्चिम बंगाल में आसन्न विधानसभा चुनाव से पहले गुरुवार को एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। लगभग साढ़े तीन वर्षों तक बंगाल में राज्यपाल रहे सीवी आनंद बोस ने इस्तीफा देने के बाद कहा, ‘मैंने गवर्नर के ऑफिस में काफी समय बिताया है।‘
गौरतलब है कि पूर्व नौकरशाह सीवी आनंद बोस को पश्चिम बंगाल के पूर्व गवर्नर जगदीप धनखड़ के उप राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए पद छोड़ने के कुछ महीने बाद 17 नवम्बर, 2022 को नियुक्त किया गया था और उन्होंने 23 नवम्बर को कार्यभार संभाला था।
वैसे देखा जाए तो गवर्नर के तौर पर सीवी आनंद बोस का कार्यकाल मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की अगुआई वाली टीएमसी सरकार के साथ अक्सर टकराव से भरा रहा। राजभवन और तृणमूल कांग्रेस सरकार के बीच अक्सर प्रशासनिक मुद्दों, कानून-व्यवस्था के मामलों और राज्य प्रशासन की गवर्नर की आलोचना को लेकर टकराव होता था।
बोस के कार्यकाल में तब भी विवाद हुआ, जब 2024 में राजभवन में एक कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने वाली महिला कर्मचारी ने उनपर यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया। गवर्नर ने आरोपों से इनकार किया और जांच की मांग की जबकि इस घटना से राजभवन और ममता बनर्जी की अगुआई वाली सरकार के बीच राजनीतिक टकराव शुरू हो गया।
राज्यपाल के इस्तीफे से सीएम ममता ‘हैरान और चिंतित‘
इस बीच पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि वह सीवी आनंद बोस के अचानक इस्तीफे से ‘हैरान और बहुत चिंतित’ हैं। उन्होंने कहा कि राज्यपाल के फैसले के पीछे के कारण उन्हें अभी पता नहीं हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आने वाले राज्य विधानसभा चुनावों से पहले गवर्नर पर भारत के केंद्रीय गृह मंत्री का दबाव हो सकता है।
I am shocked and deeply concerned by the sudden news of the resignation of Shri C. V. Ananda Bose, the Governor of West Bengal.
The reasons behind his resignation are not known to me at this moment. However, given the prevailing circumstances, I would not be surprised if the…
— Mamata Banerjee (@MamataOfficial) March 5, 2026
नए राज्यापाल आर.एन. रवि की नियुक्ति की भी आलोचना की
ममता ने बिना उनसे सलाह किए आर.एन. रवि को पश्चिम बंगाल का नया गवर्नर नियुक्त करने के लिए केंद्र की आलोचना की और इस कदम को संवैधानिक परंपराओं और कोऑपरेटिव फेडरलिज्म का उल्लंघन बताया।
लद्दाख के उप राज्यपाल कविंदर गुप्ता का भी इस्तीफा
उधर लद्दाख में एक अन्य हैरान करने वाले घटनाक्रम के तहत केंद्र शासित प्रदेश के लेफ्टिनेंट गवर्नर कविंदर गुप्ता ने भी गुरुवार को इस्तीफा दे दिया। सूत्रों ने बताया कि कविंदर गुप्ता ने अपना इस्तीफा गृहमंत्रालय को भेज दिया था। बताया जाता है कि लद्दाख के हालात को सही तरीके से हैंडल न कर पाने से गृह मंत्रालय उनसे नाराज था।
जम्मू के वरिष्ठ नेता कविंदर गुप्ता ने पिछले वर्ष भारत के राष्ट्रपति द्वारा अपॉइंटमेंट के बाद 18 जुलाई, 2025 को शपथ ली थी और वह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के तीसरे उप राज्यपाल बने थे। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने केंद्र शासित प्रदेश में कई प्रशासनिक और विकासोन्मुखी कामों की देखरेख की। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कविंदर गुप्ता ने आज सुबह ही पद छोड़ दिया। हालांकि उनके इस्तीफे के कारणों का तुरंत खुलासा नहीं किया गया है।
