पश्चिम बंगाल : वोटर लिस्ट से मनमाने ढंग से वोटरों के नाम हटाने के खिलाफ सीएम ममता बनर्जी का धरना
कोलकाता, 6 मार्च। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राज्य में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद वोटर लिस्ट से कथित तौर पर मनमाने ढंग से मतदाताओं के नाम हटाए जाने के खिलाफ शुक्रवार को धरना शुरू किया।
TMC प्रमुख ने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा
महानगर के एस्प्लेनेड मेट्रो स्टेशन के निकट दोपहर को धरने की शुरुआत करते हुए सीएम ममता ने भाजपा और निर्वाचन आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने बंगाली मतदाताओं को वोट देने से वंचित करने की साजिश रचने का आरोप लगाते हुए उसको बेनकाब करने की बात दोहराई।
‘मैं बंगाली वोटरों को मताधिकार से वंचित करने के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी’
टीएमसी प्रमुख बनर्जी ने कहा, ‘मैं बंगाली वोटरों को मताधिकार से वंचित करने के भाजपा-निर्वाचन आयोग के षड्यंत्र का पर्दाफाश करूंगी।’ उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संशोधित मतदाता सूची में कई वोटरों को गलत तरीके से मृत के रूप में दिखाया गया। मैं उन वोटरों को इस धरना स्थल पर पेश करूंगी, जिन्हें निर्वाचन आयोग ने मृत घोषित कर दिया है।’

गौरतलब है कि टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने रविवार को ही इस धरने की घोषणा कर दी थी। अभिषेक ने निर्वाचन आयोग पर राजनीति से प्रेरित काररवाई करने का आरोप लगाया था, जिसकी वजह से विधानसभा चुनावों से महीनों पहले लाखों वैध वोटरों को मताधिकार से वंचित किया जा सकता है।
टीएमसी द्वारा यह विरोध प्रदर्शन निर्वाचन आयोग के द्वारा एसआईआर के बाद की वोटरलिस्ट को प्रकाशित करने के कुछ ही दिनों बाद किया जा रहा है, जिसने राज्य के मतदाताओं की संख्या को काफी बदल दिया है।
बंगाल में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद 63.66 लाख नाम हटाए गए
राज्य में 28 फरवरी को जारी किए आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पिछले वर्ष नवम्बर में SIR प्रक्रिया शुरू होने के बाद से वोटरों की संख्या का करीब 8.3 प्रतिशत यानी 63.66 लाख नाम हटा दिए गए हैं, जिससे वोटर आधार लगभग 7.66 करोड़ से घटकर 7.04 करोड़ से थोड़ा अधिक रह गया है।
60.06 लाख से अधिक वोटर न्यायिक जांच के अधीन श्रेणी में
इसके अलावा 60.06 लाख से अधिक वोटरों को न्यायिक जांच के अधीन श्रेणी में रखा गया है, जिसका अर्थ है कि आने वाले हफ्तों में कानूनी जांच के माध्यम से उनकी पात्रता तय की जाएगी। यह एक ऐसी प्रक्रिया है, जो निर्वाचन क्षेत्र स्तर पर चुनावी समीकरणों को परिवर्तित कर सकती है।
