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यूपी रेरा का बड़ा फैसला : नियमों में 10वां संशोधन किया लागू, घर खरीदारों को बड़ी राहत

यूपी रेरा का बड़ा फैसला : नियमों में 10वां संशोधन किया लागू, घर खरीदारों को बड़ी राहत

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गौतमबुद्ध नगर, 27 मार्च। उत्तर प्रदेश भू-सम्पदा विनियामक प्राधिकरण (यूपी रेरा) ने रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता और उपभोक्ता हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से अपने सामान्य विनियम, 2019 में 10वां संशोधन लागू कर दिया है। यह संशोधन 25 मार्च 2026 से प्रभावी हो चुका है। प्राधिकरण द्वारा किए गए ये बदलाव खास तौर पर घर खरीदारों को राहत देने और डेवलपर्स की जवाबदेही तय करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माने जा रहे हैं। यूपी रेरा ने इस संशोधन के तहत विनियम 24 और 47 में अहम बदलाव किए हैं। इन बदलावों का सबसे बड़ा फायदा उन खरीदारों को मिलेगा, जिन्होंने ऐसी परियोजनाओं में निवेश किया है जो रेरा में पंजीकृत नहीं हैं।

लंबे समय से यह सवाल बना हुआ था कि अपंजीकृत परियोजनाओं के आवंटी रेरा के तहत शिकायत दर्ज कर सकते हैं या नहीं। अब इस संशोधन के जरिए इस स्थिति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया गया है। नए प्रावधानों के अनुसार, अपंजीकृत परियोजनाओं से जुड़े मामलों की सुनवाई अब यूपी रेरा की पीठों द्वारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाएगी। सबसे पहले यह तय किया जाएगा कि संबंधित परियोजना को पंजीकरण से छूट है या नहीं। यदि पंजीकरण आवश्यक पाया जाता है, तो इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई के लिए मामला सचिव को भेजा जाएगा। इसके बाद ही शिकायत के गुण-दोष के आधार पर निर्णय लिया जाएगा और खरीदार को उचित राहत प्रदान की जाएगी।

इस व्यवस्था के लागू होने से अब ऐसे खरीदारों को इधर-उधर भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिन्हें अब तक न्याय पाने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था। साथ ही, यूपी रेरा जल्द ही अपने पोर्टल पर एक नई सुविधा भी शुरू करेगा, जिससे प्रभावित लोग फॉर्म-एम के माध्यम से अपनी शिकायतें आसानी से दर्ज कर सकेंगे। वहीं, विनियम 47 में किए गए संशोधन के तहत प्रशासनिक और प्रोसेसिंग शुल्क को लेकर भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। यदि किसी आवंटी की मृत्यु हो जाती है और संपत्ति का हस्तांतरण परिवार के सदस्य को किया जाता है, तो प्रमोटर अधिकतम 1,000 रुपये ही शुल्क ले सकेगा।

वहीं, गैर-परिवार सदस्य को हस्तांतरण के मामले में यह शुल्क अधिकतम 25,000 रुपये निर्धारित किया गया है। इसके अलावा, ऐसे मामलों में नया एग्रीमेंट करने की आवश्यकता नहीं होगी, बल्कि मौजूदा अनुबंध में ही संशोधन कर प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इससे खरीदारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं पड़ेगा। यूपी रेरा के अध्यक्ष संजय भूसरेड्डी ने कहा कि यह संशोधन रियल एस्टेट क्षेत्र में पारदर्शिता, जवाबदेही और उपभोक्ता हितों को प्राथमिकता देने की दिशा में उठाया गया महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने भरोसा जताया कि इससे शिकायत निवारण प्रक्रिया और अधिक प्रभावी और उपभोक्ता-अनुकूल बनेगी। यूपी रेरा का यह निर्णय लंबे समय से लंबित समस्याओं के समाधान की दिशा में एक बड़ी पहल है, जिससे हजारों घर खरीदारों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

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