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वोटर लिस्ट विवाद मामले में सोनिया गांधी की याचिका पर सुनवाई स्थगित, 7 फरवरी को अगली सुनवाई

वोटर लिस्ट विवाद मामले में सोनिया गांधी की याचिका पर सुनवाई स्थगित, 7 फरवरी को अगली सुनवाई

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नई दिल्ली, 6 जनवरी। भारतीय नागरिकता हासिल किए बिना मतदाता सूची में कथित रूप से नाम शामिल कराए जाने के मामले में कांग्रेस की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से जुड़ी याचिका पर सुनवाई टल गई है। दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में इस मामले में दाखिल रिवीजन पिटीशन पर सुनवाई होनी थी, लेकिन सोनिया गांधी की ओर से जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगे जाने के बाद अदालत ने अगली तारीख तय कर दी है।

अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 फरवरी की तारीख निर्धारित की है। सुनवाई के दौरान सोनिया गांधी की तरफ से कोर्ट को बताया गया कि रिवीजन पिटीशन पर विस्तृत जवाब दाखिल करने के लिए और समय की आवश्यकता है, जिसके चलते सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया गया। अदालत ने इस मांग को स्वीकार करते हुए मामले की सुनवाई आगे के लिए टाल दी। यह रिवीजन पिटीशन अधिवक्ता विकास त्रिपाठी द्वारा दाखिल की गई है।

पिटीशन में आरोप लगाया गया है कि सोनिया गांधी ने भारतीय नागरिकता प्राप्त करने से पहले ही मतदाता सूची में कथित तौर पर अपना नाम शामिल करा लिया था। याचिका के अनुसार सोनिया गांधी को 30 अप्रैल 1983 को भारतीय नागरिकता मिली थी, जबकि इससे पहले 1980 की नई दिल्ली की वोटर लिस्ट में उनका नाम दर्ज था।

इस बात पर सवाल उठाया गया है कि जब सोनिया गांधी उस समय भारतीय नागरिक नहीं थीं, तो 1980 की मतदाता सूची में उनका नाम किस आधार पर शामिल किया गया। साथ ही यह भी आरोप लगाया गया है कि वर्ष 1982 में उनका नाम वोटर लिस्ट से हटा दिया गया था, जिस पर भी याचिकाकर्ता ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

रिवीजन पिटीशन में यह भी कहा गया है कि यदि सोनिया गांधी ने 1983 में नागरिकता हासिल की, तो उससे तीन साल पहले 1980 में मतदाता सूची में नाम शामिल कराने के लिए किन दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। याचिका में आशंका जताई गई है कि इसके लिए कथित रूप से फर्जी दस्तावेजों का सहारा लिया गया हो सकता है।

बता दें कि दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट ने 9 दिसंबर को कांग्रेस की पूर्व अध्यक्ष सोनिया गांधी और दिल्ली पुलिस को नोटिस जारी करते हुए जवाब मांगा था। यह नोटिस वकील विकास त्रिपाठी द्वारा दायर रिवीजन पिटीशन पर जारी किया गया था। बता दें कि इससे पहले, मजिस्ट्रेट कोर्ट ने सितंबर 2025 में दायर उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें सोनिया गांधी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच कराने की मांग की गई थी। बाद में, इसी आदेश को चुनौती देते हुए रिवीजन पिटीशन दाखिल की गई।

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