‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ विवाद : दिल्ली हाईकोर्ट ने समीर वानखेड़े की याचिका पर सुनवाई से किया इनकार, केस लौटाया
नई दिल्ली, 29 जनवरी। इंडियन रेवेन्यू सर्विस (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े ने बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान के प्रोडक्शन हाउस रेड चिलीज एंटरटेनमेंट और ओटीटी प्लेटफॉर्म नेटफ्लिक्स के खिलाफ मुकदमा दायर किया था। गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई से इनकार कर दिया। पुरुषेंद्र कौरव की सिंगल बेंच ने आदेश दिया कि केस को उस कोर्ट में भेजा जाए, जो इस तरह के मामले को सुनने की सही अधिकारिता रखता हो। यह केस वापस सही कोर्ट में दाखिल किया जाना चाहिए।
वानखेड़े ने आरोप लगाया है कि वेब सीरीज ‘द बैड्स ऑफ बॉलीवुड’ में उनके खिलाफ जानबूझकर गलत और अपमानजनक कंटेंट दिखाया गया। उनका कहना है कि इस वेब सीरीज ने न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा और सम्मान को नुकसान पहुंचाया, बल्कि उनके परिवार पर भी असर डाला है। उन्होंने कहा कि केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो की इमेज को इस सीरीज में नकारात्मक तरीके से दिखाया गया, जिससे आम लोगों का कानून और सरकारी एजेंसियों पर भरोसा कमजोर हुआ।
वानखेड़े ने अदालत से मांग की थी कि उन्हें स्थायी आदेश और मुआवजा दिया जाए। इसके तहत रेड चिलीज एंटरटेनमेंट, नेटफ्लिक्स, ट्विटर (अब एक्स कॉर्प), गूगल, फेसबुक और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हैं। उनका कहना था कि इस वेब सीरीज ने जानबूझकर उनके खिलाफ पक्षपाती और अपमानजनक कंटेंट दिखाया है। समीर वानखेड़े और आर्यन खान केस अभी बॉम्बे हाई कोर्ट और विशेष एनडीपीएस कोर्ट में लंबित है।
शिकायत में उन्होंने सीरीज के एक सीन का भी हवाला दिया। इसमें एक किरदार ‘सत्यमेव जयते’ कहता है और उसके तुरंत बाद अश्लील इशारा करता है। शिकायतकर्ता के अनुसार, यह न केवल उनके लिए अपमानजनक है, बल्कि यह राष्ट्रीय प्रतीक और इस स्लोगन का अपमान भी है। इस तरह की हरकत भारतीय कानून के तहत अपराध मानी जाती है।
वानखेड़े ने अदालत से 2 करोड़ रुपए मुआवजे की भी मांग की। उन्होंने बताया कि यह रकम टाटा मेमोरियल कैंसर हॉस्पिटल को कैंसर मरीजों के इलाज के लिए दी जाएगी। दिल्ली हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद 2 दिसंबर 2025 को फैसला सुरक्षित रखा था। अब कोर्ट ने मामले को सही अधिकार वाली अदालत में भेज दिया है। इस फैसले के बाद यह मामला आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए संबंधित कोर्ट में जाएगा।
