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टाटा समूह ने शुरू की सहायता योजना, पश्चिम एशिया में समूह के 10,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत

टाटा समूह ने शुरू की सहायता योजना, पश्चिम एशिया में समूह के 10,000 से अधिक कर्मचारी कार्यरत

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मुंबई, 3 अप्रैल। इजराइल-अमेरिका बनाम ईरान युद्ध के कारण पश्चिम एशिया सहित वैश्विक तनाव के बीच देश के सबसे बड़े औद्योगिक समूह टाटा संस ने एहतियाती कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। टाटा संस के अध्यक्ष नटराजन चंद्रशेखरन ने समूह की 30 प्रमुख कम्पनियों के सीईओ के साथ व्यापारिक स्थिति की समीक्षा करने के लिए एक आपातकालीन बैठक की है। इसी क्रम में टाटा समूह पश्चिम एशिया में अपने 10,000 से अधिक कर्मचारियों की सहायता के लिए एक योजना शुरू कर रहा है क्योंकि यह क्षेत्र लगातार संघर्ष का सामना कर रहा है।

कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही

एन. चंद्रशेखरन के नेतृत्व में कम्पनी 30 से अधिक सीईओ के साथ मिलकर संयुक्त अरब अमीरात में फंसे कर्मचारियों को वापस लाने और कतर में कर्मचारियों के लिए भारतीय दूतावास के माध्यम से सऊदी अरब का वीजा प्राप्त करने में मदद कर रही है। दोहा से रियाद तक सड़क मार्ग से आवागमन को सक्षम बना रही है, जिसमें कर्मचारियों की सुरक्षा और कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जा रही है।

दरअसल, टाटा मोटर्स, टाटा स्टील और टीसीएस जैसी कम्पनियों का वैश्विक व्यापार बहुत बड़ा है। बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि युद्ध कच्चे माल के आयात को कैसे प्रभावित कर सकता है। आशंका है कि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण ईंधन की कीमतें बढ़ने से उत्पादन लागत भी बढ़ जाएगी। युद्ध के वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ने वाले प्रभाव का विश्लेषण टाटा समूह के आईटी और इस्पात निर्यात पर किया गया।

युद्ध की बढ़ती स्थिति के मद्देनजर, टाटा ने कर्मचारियों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। टाटा संस के अध्यक्ष एन. चंद्रशेखरन ने दो अप्रैल को आयोजित एक समीक्षा बैठक में बताया कि समूह के 10,000 से अधिक कर्मचारी वर्तमान में युद्धग्रस्त क्षेत्र के विभिन्न देशों में कार्यरत हैं। समूह ने इन कर्मचारियों की सुरक्षा और आवश्यकता पड़ने पर उन्हें भारत वापस लाने के लिए एक विशेष योजना तैयार की है।

टाटा समूह के अनुसार सीईओ को ‘सतर्क’ रहने को कहा गया है। एन. चंद्रशेखरन ने सभी कम्पनी प्रमुखों से आने वाले महीनों में अधिक सतर्क रहने को कहा है। टाटा मोटर्स और एअर इंडिया जैसी कम्पनियां इस युद्ध से सीधे तौर पर प्रभावित हो सकती हैं क्योंकि हवाई और समुद्री परिवहन खतरे में हैं।

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