1. Home
  2. हिन्दी
  3. राजनीति
  4. केरल में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार : दिल्ली में पूर्व प्रमुखों संग खरगे की बैठक, आज हो सकता है फैसला
केरल में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार : दिल्ली में पूर्व प्रमुखों संग खरगे की बैठक, आज हो सकता है फैसला

केरल में मुख्यमंत्री पद पर सस्पेंस बरकरार : दिल्ली में पूर्व प्रमुखों संग खरगे की बैठक, आज हो सकता है फैसला

0
Social Share

तिरुवनंतपुरम, 12 मई। केरल के मुख्यमंत्री के चयन को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच कांग्रेस आलाकमान इस मामले पर अंतिम निर्णय लेने से पहले मंगलवार को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (केपीसीसी) के पूर्व अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों की राय लेगा। केंद्रीय नेतृत्व द्वारा दिल्ली बुलाए गए नेताओं में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वी. एम. सुधीरन, मुल्लापल्ली रामचंद्रन, के. मुरलीधरन, के. सुधाकरन और एम. एम. हसन शामिल हैं। पार्टी ने वरिष्ठ विधायक तिरुवंचूर राधाकृष्णन और कार्यकारी अध्यक्षों पी. सी. विष्णुनाथ, शफी परम्बिल तथा ए. पी. अनिल कुमार को भी दिल्ली पहुंचने को कहा है।

पार्टी सूत्रों के अनुसार, इन नेताओं के साथ मंगलवार को चर्चा होगी और जल्द ही किसी निर्णय पर पहुंचने की संभावना है। मुख्यमंत्री पद की दौड़ में वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला, राज्य विधानसभा में निवर्तमान नेता प्रतिपक्ष वी. डी. सतीशन और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के संगठन महासचिव के. सी. वेणुगोपाल मुख्य रूप से शामिल हैं। पार्टी के पर्यवेक्षकों अजय माकन और मुकुल वासनिक द्वारा विधायकों की राय जानने और मुख्य दावेदारों तथा केपीसीसी अध्यक्ष सनी जोसेफ के साथ लंबी चर्चा के बाद भी जब बात नहीं बनी, तब केंद्रीय नेतृत्व ने परामर्श का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया। पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से राय लेने के फैसले से सतीशन खेमे में उत्साह है, जिन्हें जमीनी कार्यकर्ताओं और प्रमुख सहयोगी दल ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (आईयूएमएल) का समर्थन प्राप्त है।

सूत्रों के अनुसार, सुधीरन और मुरलीधरन जैसे पूर्व अध्यक्षों का मत है कि मुख्यमंत्री का चुनाव करते समय जनभावनाओं को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। सतीशन खेमे का दावा है कि ‘इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग’ (आईयूएमएल) द्वारा अपनाया गया रुख जनभावनाओं को दर्शाता है। उनका यह भी तर्क है कि यदि वेणुगोपाल को यह पद दिया गया, तो राज्य में दो उपचुनावों का जोखिम पैदा होगा, जो मौजूदा परिस्थितियों में पार्टी के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। एक उन्हें विधानसभा सदस्य चुनने हेतु और दूसरा अलाप्पुझा लोकसभा सीट के लिए नया सांसद चुनने हेतु, जिसका प्रतिनिधित्व वर्तमान में वेणुगोपाल कर रहे हैं।

दूसरी ओर, वेणुगोपाल खेमे का दावा है कि उन्हें अधिकांश विधायकों और सांसदों का समर्थन प्राप्त है और वे चुनावी रणनीति बनाने में कुशल हैं। वहीं, चेन्निथला समर्थकों का कहना है कि वह सबसे वरिष्ठ नेता हैं जो हर परिस्थिति में पार्टी और नेहरू-गांधी परिवार के साथ चट्टान की तरह खड़े रहे हैं। उनकी कार्यकुशलता और अनुभव का हवाला देते हुए समर्थकों का कहना है कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) और युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान उनके साथ या उनके नेतृत्व में काम करने वाले कई नेता आज अन्य राज्यों के मुख्यमंत्री या केंद्रीय मंत्री बन चुके हैं। उनके अनुसार, इस बार उनकी अनदेखी करना अन्यायपूर्ण होगा।

इस बीच, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने इस विलंब को लेकर कांग्रेस की आलोचना की है। भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष के. सुरेंद्रन ने सोशल मीडिया पर आरोप लगाया कि 63 विधायकों और तीन निर्दलीय उम्मीदवारों यानी अपने दम पर कुल 66 सदस्यों का समर्थन होने के बावजूद भी कांग्रेस आलाकमान केवल जमात-ए-इस्लामी हिंद और मुस्लिम लीग जैसे संगठनों के डर के कारण निर्णय नहीं ले पा रहा है। उन्होंने दावा किया कि जो भी मुख्यमंत्री बनेगा, वह पद संभालते ही सबसे पहले मुस्लिम लीग के शीर्ष नेता पनक्कड़ थंगल के द्वार पर हाजिरी लगाएगा।

Join our WhatsApp Channel

And stay informed with the latest news and updates.

Join Now
revoi whats app qr code