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राज्यसभा से 37 सांसदों की विदाई पर बोले पीएम मोदी-राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता, विरासत की प्रक्रिया जारी रहती है

राज्यसभा से 37 सांसदों की विदाई पर बोले पीएम मोदी-राजनीति में कोई फुलस्टॉप नहीं होता, विरासत की प्रक्रिया जारी रहती है

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नई दिल्ली, 18 मार्च। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्यसभा में सेवानिवृत्त हो रहे सांसदों के विदाई सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि राजनीति में कोई पूर्ण विराम नहीं होता और विरासत की प्रक्रिया जारी रहती है। पीएम मोदी ने साथ ही निवर्तमान सांसदों के योगदान को सराहा।

पीएम मोदी ने उच्च सदन में अपने संबोधन के दौरान कहा, ‘यह एक ऐसा अवसर है, जो हर दो साल में एक बार इस सदन में हमें भावुक क्षणों में सराबोर कर देता है। सदन में कई विषयों पर चर्चा होती है, जिनमें से प्रत्येक का अपना महत्व होता है। लेकिन जब ऐसा अवसर आता है, तो हम अपने उन सहयोगियों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हैं, जो एक विशेष उद्देश्य के लिए आगे बढ़ रहे हैं।’

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, ‘कुछ सहकर्मी यहां से विदाई लेकर लौट रहे हैं, कुछ यहां से अपने अनुभव का लाभ उठाकर सामाजिक जीवन में योगदान देने जा रहे हैं। जो जा रहे हैं, लेकिन आने वाले नहीं हैं, उनको भी मैं कहना चाहूंगा कि राजनीति में कोई फुल स्टॉप नहीं होता है, भविष्य आपका भी इंतजार कर रहा है और आपका अनुभव, आपका योगदान राष्ट्र जीवन में हमेशा बना रहेगा।’

उन्होंने कहा, ‘सदन के अंदर अनेक विषयों पर चर्चाएं होती हैं, हर किसी का महत्वपूर्ण योगदान होता है, कुछ खट्टे-मीठे अनुभव भी रहते हैं। लेकिन, जब ऐसा अवसर आता है, तो स्वाभाविक रूप से दलगत भावना से ऊपर उठकर हम सबके भीतर एक समान भाव प्रकट होता है कि हमारे ये साथी अब किसी और विशेष काम के लिए आगे बढ़ रहे हैं। आज यहां से जो साथी विदाई ले रहे हैं, उनमें से कुछ फिर से आने के लिए विदाई ले रहे हैं और कुछ विदाई के बाद यहां का अनुभव लेकर सामाजिक जीवन में कुछ न कुछ विशेष योगदान के लिए जा रहे हैं।’

उन्होंने आगे कहा, ‘हमारे उप सभापति हरिवंश सदन से विदा ले रहे हैं। हरिवंश को इस सदन में लंबे समय तक अपनी जिम्मेदारियों को निभाने का अवसर मिला। वे बहुत ही मृदुभाषी हैं और सदन को चलाने में सबका विश्वास जीतने का इन्होंने निरंतर प्रयास किया है।’

पीएम मोदी ने कहा, ‘इस सदन में से हर दो साल के अंतराल के बाद एक बड़ा समूह हमारे बीच से जाता है। लेकिन यह ऐसी व्यवस्था है कि जो नया समूह आता है, उनको चार साल से यहां बैठे साथियों से कुछ न कुछ सीखने का अवसर मिलता है। इसलिए एक प्रकार से यहां की विरासत एक प्रक्रिया रहती है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, ‘छह साल तक यहां रहने का अवसर न केवल नीति-निर्माण के माध्यम से राष्ट्रीय जीवन में योगदान देने के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह एक अमूल्य अनुभव भी है जो जीवन को समृद्ध बनाता है। जब सम्मानित सांसद अपने विचारों, समझ और क्षमताओं के साथ यहां आते हैं, तो उनके जाने तक, अनुभव की शक्ति से ये गुण कई गुना बढ़ जाते हैं।’

उन्होंने कहा, ‘हमारे अठावले जा रहे हैं, लेकिन वे अपने हास्य और बुद्धिमत्ता से लोगों का मनोरंजन करते रहेंगे, हमें इस बात का पूरा भरोसा है। हर दो साल में इस सदन में एक भव्य विदाई समारोह होता है। लेकिन व्यवस्था ऐसी है कि नए सदस्य आते ही उन सहकर्मियों से कुछ सीखने का मौका पाते हैं जो चार साल के अनुभव के साथ यहां लंबे समय से बैठे हैं। एक तरह से, यहां की विरासत एक सतत प्रक्रिया के रूप में जारी रहती है।’

प्रधानमंत्री ने कहा, “मैं जरूर कहूंगा कि देवगौड़ा, खड़गे, शरद पवार ऐसे वरिष्ठ लोग हैं, जिनके जीवन की आधे से अधिक उम्र संसदीय कार्यप्रणाली में गई है और इतने लंबे अनुभव के बाद भी सभी नए सांसदों को इनसे सीखना चाहिए कि समर्पित भाव से सदन में आना, यथासंभव योगदान करना और जिम्मेदारी के प्रति पूरी तरह समर्पित कैसे रहा जा सकता है। मैं उनके योगदान की भूरि-भूरि सराहना करूंगा।’

खरगे बोले – नेता कभी रिटायर और टायर्ड नहीं होते

राज्यसभा सांसदों की विदाई पर सदन में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि नेता कभी रिटायर नहीं होते। सभी सांसदों की बातों को सुना जाना चाहिए। सदन ज्यादा से ज्यादा चलना चाहिए। मिलकर काम करना चाहिए, ये बड़ी ताकत है। जनता के मुद्दों पर चर्चा होनी चाहिए। रिटायर होने वाले कुछ साथी फिर वापस आएंगे, कुछ नहीं आएंगे। खरगे ने कहा कि पब्लिक लाइफ में रहने वाले सदस्य कभी रिटायर और टायर्ड नहीं होते।

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