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रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का आरोप- विश्व ऊर्जा बाजार पर कब्जे की कोशिश कर रहा अमेरिका

रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव का आरोप- विश्व ऊर्जा बाजार पर कब्जे की कोशिश कर रहा अमेरिका

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मॉस्को, 22 मार्च। रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने अमेरिका पर आरोप लगाया है कि वह ग्लोबल एनर्जी मार्केट में अपना दबदबा बनाने की नीति अपना रहा है। लावरोव ने शनिवार को रूसी मीडिया को दिए एक इंटरव्यू में कहा, ‘अमेरिका को सिर्फ अपने हितों की फिक्र है। वह अपनी समृद्धि बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार रहता है, चाहे वह तख्तापलट हो, अपहरण हो या उन देशों के नेताओं को निशाना बनाना हो, जिनके पास वॉशिंगटन के लिए अहम प्राकृतिक संसाधन हैं। यह पूरा मुद्दा तेल से जुड़ा हुआ है।”

अमेरिका अपनी समृद्धि बनाए रखने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार

न्यूज एजेंसी सिन्हुआ के अनुसार लावरोव ने आगे कहा कि अमेरिका इस उसूल को मानता है कि उसके फायदे हमेशा अंतरराष्ट्रीय समझौतों से पहले आते हैं। अमेरिका ने पहले भी यूरोपीय एनर्जी बाजार में रूस को अलग-थलग किए जाने का स्वागत किया और करता रहेगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि रूस के साथ सहयोग करने के लिए अमेरिका को पहले रूस के पक्ष की इज्जत करनी होगी।

रूसी विदेश मंत्रालय ने यूरोपीय यूनियन को भी कोसा

इससे पहले शुक्रवार को रूसी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि यूरोपीय नेता रूसी ऊर्जा संसाधनों को लगातार ठुकराकर जान बूझकर अपने देशों को संकट और ऊर्जा की कमी की स्थिति में धकेल रहे हैं। मारिया जखारोवा ने अपने टेलीग्राम चैनल पर एक पोस्ट में कहा, ‘यह कोई तकनीकी आपदा या कोई प्राकृतिक आपदा नहीं है, जो यूरोपीय यूनियन में वैश्विक संकट पैदा कर रही है, बल्कि यह उसके अपने नेताओं के फैसले हैं, जो बस हालात बदल रहे हैं।’

ईयू के रुख का कई सदस्य देशों ने किया है विरोध

वहीं यूरोपीय कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने शुक्रवार को ईयू के निश्चित रुख की पुष्टि की। यह मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच, यूरोप में गंभीर एनर्जी संकट की स्थिति में भी सदस्य देशों को रूसी प्राकृतिक गैस खरीदने से साफ तौर पर रोकता है।

हालांकि ईयू के इस रुख का कुछ सदस्य देशों ने विरोध किया था, जो रूस की एनर्जी सप्लाई पर बहुत ज्यादा निर्भर हैं। हंगरी के प्रधानमंत्री विक्टर ओरबान ने इस माह की शुरुआत में ईयू से रूसी एनर्जी पर लगे बैन को रोकने की अपील की थी और चेतावनी दी कि तेल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई में रुकावटें इलाके की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करती हैं।

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