राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष को लिखा पत्र, कहा- ‘मुझे जान बूझकर चुप कराया जा रहा, यह लोकतंत्र पर धब्बा’
नई दिल्ली, 3 फरवरी। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को स्पीकर ओम बिरला को एक पत्र लिखा और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर जारी चर्चा में बोलने की अनुमति न दिए जाने पर अपना ‘कड़ा विरोध’ जताया। नेता प्रतिपक्ष ने इसे ‘हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा’ भी बताया।
उल्लेखनीय है कि सोमवार को सत्ता पक्ष के सांसदों ने राहुल गांधी के पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे (रिटायर्ड) की एक अप्रकाशित किताब से जून 2020 में लद्दाख में भारत-चीन झड़पों से जुड़ा एक अंश पढ़ने पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने तर्क दिया कि सदन के नियम किसी सदस्य को ऐसी किताब का हवाला देने से रोकते हैं जो अभी तक प्रकाशित नहीं हुई है।
राहुल गांधी ने पत्र में क्या लिखा?
राहुल गांधी ने लोकसभा अध्यक्ष को प्रेषित पत्र में लिखा, ‘आज मुझे लोकसभा में बोलने से रोकना न सिर्फ इस परंपरा का उल्लंघन है बल्कि इससे यह गंभीर चिंता भी पैदा होती है कि विपक्ष के नेता के तौर पर मुझे राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर बोलने से रोकने की जान बूझकर कोशिश की जा रही है। यहां यह दोहराना जरूरी है कि राष्ट्रीय सुरक्षा राष्ट्रपति के अभिभाषण का एक अहम हिस्सा था, जिस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए।’
LoP Shri @RahulGandhi writes to the Lok Sabha Speaker Om Birla regarding the denial of the Leader of Opposition's right to raise a crucial matter of national security in Parliament. pic.twitter.com/SzXVX3jc4M
— Congress (@INCIndia) February 3, 2026
नेता प्रतिपक्ष ने कहा, ‘इन बुनियादी लोकतांत्रिक अधिकारों से इनकार करने से एक अभूतपूर्व स्थिति पैदा हो गई है। संसदीय इतिहास में पहली बार, सरकार के कहने पर स्पीकर को विपक्ष के नेता को राष्ट्रपति के अभिभाषण पर बोलने से रोकना पड़ा है। यह हमारे लोकतंत्र पर एक धब्बा है, जिसके खिलाफ मैं अपना कड़ा विरोध दर्ज कराता हूं।’
राहुल ने परंपरा का दिया हवाला
राहुल गांधी ने बिरला को लिखे अपने पत्र में कहा कि लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुसार, सदन में किसी दस्तावेज का जिक्र करने की इच्छा रखने वाले सदस्य को उसे प्रमाणित करना होता है और उसकी सामग्री की जिम्मेदारी लेनी होती है। उन्होंने कहा कि एक बार यह शर्त पूरी हो जाने के बाद, स्पीकर सदस्य को दस्तावेज से उद्धरण देने या उसका ज़िक्र करने की अनुमति देते हैं।
बकौल राहुल, इसके बाद जवाब देना सरकार की जिम्मेदारी हो जाती है और अध्यक्ष की भूमिका समाप्त हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया है कि सरकार किताब में लिखी बातों से ‘डरी हुई’ है। उन्होंने मंगलवार को भी इस मुद्दे पर बोलने की कोशिश की थी, लेकिन वह फिर ऐसा नहीं कर पाए।
