एआई समिट के दौरान प्रदर्शन मामले में युवा कांग्रेस के गिरफ्तार सदस्यों पर पुलिस ने लगाया दंगे का आरोप
नई दिल्ली, 24 फरवरी। दिल्ली पुलिस ने पिछले सप्ताह यहां एआई इम्पैक्ट समिट के दौरान शर्ट उतारकर किए गए विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में गिरफ्तार भारतीय युवा कांग्रेस के सदस्यों के खिलाफ दंगा करने का आरोप भी दर्ज किया है।
इस मामले में अखिल भारतीय युवा कांग्रेस के अध्यक्ष उदय भानु चिब सहित अब तक संगठन के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया जा चुका है। इनमें चिब को दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन का ‘मुख्य साजिशकर्ता’ करार दिया है।
पुलिस ने लगाए ये आरोप
चिब की गिरफ्तारी मेमो में उन्हें भारत मंडपम में गैरकानूनी तरीके से एकत्र होने का मुख्य साजिशकर्ता और मास्टरमाइंड बताया गया है, जहां प्रदर्शनकारियों ने ‘राष्ट्रविरोधी नारे’ लगाए और ‘दंगे जैसी स्थिति’ पैदा करने की कोशिश की। दिल्ली की एक अदालत ने चिब को चार दिनों की पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस ने मामले में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 191(1) (दंगा) और 192 (दंगा भड़काने के इरादे से जानबूझकर उकसाना – यदि दंगा किया जाता है, यदि नहीं किया जाता है) जोड़ी गई है।
आरोपितों को ‘आक्रामक तत्व‘ करार दिया
विशेष पुलिस आयुक्त (अपराध और पुलिस प्रबंधन एवं मीडिया प्रकोष्ठ) देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने आरोपियों को ‘आक्रामक तत्व’ करार दिया और कहा कि 20 फरवरी, 2026 को अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रम में उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों, प्रतिनिधियों और आगंतुकों की उपस्थिति में सुरक्षा घेरा भंग करने की पूर्वनियोजित कोशिश देखी गई। उन्होंने कहा, ‘आक्रामक तत्वों को तुरंत काबू में कर लिया गया। उन्हें काबू में करते समय, ड्यूटी पर तैनात कुछ पुलिसकर्मियों को चोटें भी आईं।’
अन्य राज्यों की पुलिस के संपर्क में दिल्ली पुलिस
देवेश चंद्र श्रीवास्तव ने कहा कि जांच के दौरान, कार्यक्रम स्थल और आसपास के इलाकों की सीसीटीवी कैमरों की फुटेज में कई व्यक्तियों को देखा गया। विशेष पुलिस आयुक्त ने कहा, ‘कई अन्य व्यक्तियों की संलिप्तता का भी पता चला है, जो इस कृत्य को अंजाम देने में आक्रामक तत्वों की कथित तौर पर विभिन्न तरीकों से सहायता कर रहे थे।’ उन्होंने कहा कि पूरी साजिश का पर्दाफाश करने के लिए अन्य राज्यों के पुलिस अधिकारियों के साथ लगातार समन्वय बनाए रखा जा रहा है और छापेमारी की जा रही है।
क्राइम ब्रांच के स्थानांतरित किया गया मामला
श्रीवास्तव ने कहा, “जांच के दौरान, बीएनएस की धारा 191(1) और 192 भी जोड़ी गई हैं। अब तक की जांच के आधार पर यह सामने आया है कि अपराध एक गहरी साजिश के तहत किया गया था, और इस संबंध में पर्याप्त सबूत प्राप्त किए गए हैं।” उन्होंने कहा कि मामले में बहु-राज्यीय पृष्ठभूमि, आरोपियों के बीच निहित वित्तीय और लॉजिस्टिकल नेटवर्क और मामले की व्यापक जांच की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए, आगे की तफ्तीश को अपराध शाखा के अंतर-राज्यीय प्रकोष्ठ को स्थानांतरित कर दिया गया है।
