मायावती ने संसद, राज्य विधानसभाओं में सत्रों की अवधि कम होने पर चिंता जताई, जानें क्या कहा…
लखनऊ, 20 जनवरी। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं में सत्रों की अवधि कम होने पर मंगलवार को चिंता जताई और कहा कि सरकार और विपक्ष को इस पर अति गंभीर होकर विचार करना चाहिए। बसपा प्रमुख मायावती ने अपने आधिकारिक ”एक्स” खाते पर एक पोस्ट में कहा ”देश में संसद व राज्य विधानमंडलों के सत्र के घटते समय के साथ-साथ हर बार इनके भारी हंगामेदार एवं स्थगन आदि से इनकी जन उपयोगिता का घटता प्रभाव अक्सर गंभीर चिंता का विषय रहा है।
लखनऊ में इन दिनों चल रहे पीठासीन अधिकारियों के तीन-दिवसीय 86 वें अखिल भारतीय सम्मेलन के दौरान विधानमंडलों की कार्यवाही के लगातार घटते समय पर चिंता व्यक्त किया जाना उचित, सामयिक व सराहनीय है जिस पर सरकार और विपक्ष दोनों को अति-गंभीर होकर इस पर विचार करना चाहिये।” उप्र की चार बार मुख्यमंत्री रह चुकीं बसपा की शीर्ष नेता ने कहा कि संसद व विधानमण्डलों की कार्यवाही साल में कम-से-कम 100 दिन के कैलेण्डर तथा सही नियमों के हिसाब से शांति-व्यवस्था के साथ चले, यह बहुत ज़रूरी है। लखनऊ में पीठासीन अधिकारियों का 86वां अखिल भारतीय सम्मेलन 19 जनवरी को शुरू हुआ और 21 जनवरी तक चलेगा।
मायावती ने कहा कि इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ द्वारा ‘सरकारी मान्यता नहीं होना मदरसा को बंद करने का आधार नहीं’ सम्बंधी दिया गया फैसला अति-महत्वपूर्ण व सामयिक है तथा इस आधार पर श्रावस्ती में मदरसे पर लगी सील 24 घंटे में हटाने के निर्देश का भी स्वागत योग्य है। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि वैसे भी संभवतः यहाँ कोई भी सरकार नीतिगत तौर पर प्राइवेट मदरसों के विरुद्ध नहीं है, बल्कि ज़िला स्तर पर अधिकारियों की मनमानी का ही शायद यह परिणाम है कि इस प्रकार की अप्रिय घटनाओं की खबरें आती रहती हैं, जिस पर सरकार को उचित संज्ञान लेना चाहिये।
