राजस्थान में CBIकी बड़ी कार्रवाई : करोड़ों रुपए के बैंक फ्रॉड के दो बड़े भगोड़े गिरफ्तार, जानें पूरा मामला
बांसवाड़ा, 31 जनवरी। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) ने बैंकिंग सेक्टर को करोड़ों का चूना लगाकर वर्षों से फरार चल रहे दो शातिर ‘घोषित अपराधियों’ को एक बेहद गोपनीय और तकनीकी ऑपरेशन के बाद दबोच लिया है। इस बड़ी कार्रवाई के तहत मुख्य आरोपी संजय शर्मा (उर्फ संजीव दीक्षित, उर्फ पंकज भारद्वाज) को राजस्थान के बांसवाड़ा से और उसकी सह-आरोपी शीतल शर्मा (उर्फ आरती शर्मा) को वडोदरा, गुजरात से 30 जनवरी, 2026 को गिरफ्तार किया गया है।
इस मामले का सबसे सनसनीखेज पहलू मुख्य आरोपी संजय शर्मा का पुलिस कस्टडी से फरार होना था। साल 2014 में हरियाणा पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद, 4 जुलाई 2016 को जब उसे सोनीपत कोर्ट में पेशी के लिए लाया गया, तब वह झांसा देकर फरार हो गया था। बैंक फ्रॉड की इस कड़ी में आरोपी ने अपनी पुरानी पहचान दफन कर ‘पंकज भारद्वाज’ के नाम से फर्जी दस्तावेज तैयार किए और राजस्थान में छिपकर रहने लगा।
CBI की टीम ने ओपन-सोर्स इंटेलिजेंस, मोबाइल डेटा विश्लेषण और आरोपियों के वित्तीय लेनदेन की कड़ियों को जोड़ते हुए उनके गुप्त ठिकानों को पिनपॉइंट किया। गिरफ्तारी के समय आरोपियों के पास से जाली पहचान दस्तावेज भी बरामद हुए हैं, जो उनकी नई पहचान को पुख्ता करने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे थे। पकड़े गए आरोपियों पर करोड़ों रुपये के गबन के दो अलग-अलग मुकदमे दर्ज हैं।
पहला मामला 13 मार्च 2013 को 9.95 करोड़ रुपए का बैंक फ्रॉड केस के रूप में पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के अधिकारियों के साथ मिलीभगत को लेकर दर्ज हुआ था, जिसमें संजीव दीक्षित और आरती शर्मा मुख्य आरोपी थे। वहीं, दूसरा मामला 11 जुलाई 2013 को 4 करोड़ रुपए का बैंक फ्रॉड के तहत दर्ज किया गया था। संजय शर्मा को 2016 और 2017 में अदालतों द्वारा उद्घोषित अपराधी घोषित किया गया था, जबकि आरती शर्मा 2016 से ही भगोड़ा श्रेणी में थी।
सीबीआई के इस सफल ऑपरेशन के बाद दोनों आरोपियों को संबंधित अदालतों में पेश किया गया, जहाँ से दिल्ली ले जाने के लिए ट्रांजिट वारंट मिल गए हैं। अब आरोपियों को उन अदालतों के समक्ष पेश किया जाएगा जहाँ से उनके खिलाफ भगोड़ा घोषित करने के आदेश जारी हुए थे।
