बांग्लादेश : दीपू चंद्र दास लिंचिंग केस में मुख्य आरोपित गिरफ्तार, पुलिस बोली – ‘आरोपित ने भीड़ को उकसाया’
ढाका, 8 जनवरी। बांग्लादेश पुलिस ने ईशनिंदा के आरोपों पर हिन्दू गारमेंट फैक्ट्री के कर्मचारी दीपू चंद्र दास की लिंचिंग मामले में मुख्य आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। अधिकारियों के अनुसार, पूर्व टीचर यासीन अराफात ने हमले की योजना बनाने और उसे अंजाम देने में अहम भूमिका निभाई थी। बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ जारी अत्याचारों के बीच दीपू की हत्या का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर निंदा हुई है।
गिरफ्तार यासीन अराफात एक मस्जिद में पढ़ाता था
उल्लेखनीय है कि 25 वर्षीय दीपू चंद्र दास की गत 18 दिसम्बर को मैमनसिंह शहर के बलुका में कथित ईशनिंदा के आरोप में भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। बाद में उनके शव को आग लगा दी गई। दास की हत्या में कथित संलिप्तता के आरोप में कम से कम 21 दरिंदों को गिरफ्तार किया गया है।
दास को उनके फैक्ट्री सुपरवाइजरों ने इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया
बात यहीं तक सीमित नहीं थी वरन दास को उनके फैक्ट्री सुपरवाइजरों ने इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया। फिर उन्हें काम की जगह से बाहर निकाल दिया गया। इसके बाद इस्लामवादियों की गुस्साई भीड़ के हवाले कर दिया गया, जिसने उन्हें पीट-पीटकर मार डाला। इतना ही नहीं उनके शरीर को एक पेड़ से लटका दिया और आग लगा दी। बताया जाता है कि उनके सहकर्मी भी उसे मारने वाली भीड़ में शामिल थे।
पुलिस ने बताया कि दास की हत्या के बाद, गुरुवार को गिरफ्तार किया गया अराफात कथित तौर पर इलाके से भाग गया। अधिकारियों के अनुसार, उसने हमले की योजना बनाई। साथ ही दूसरों को इकट्ठा होने और दास को निशाना बनाने के लिए उकसाया। बताया जाता है कि स्थानीय समुदाय में उसके नेतृत्व ने उसे जल्दी से एक बड़ा समूह जुटाने में मदद की, जिससे स्थिति एक जानलेवा हमले में बदल गई।
पुलिस ने आगे कहा कि अराफात ने न केवल भीड़ को उकसाया बल्कि दीपू को व्यक्तिगत रूप से एक चौराहे तक घसीटा, जहां उन्हें एक पेड़ से लटकाकर आग लगा दी गई। बताया जाता है कि अराफात स्थानीय निवासी है। वह एक मस्जिद में पढ़ाता था। अराफात के साथ, इस मामले में गिरफ्तारियों की कुल संख्या 21 हो गई है। अधिकारी घटना में शामिल किसी भी अतिरिक्त संदिग्ध की पहचान करने के लिए अपनी जांच जारी रखे हुए हैं।
बांग्लादेश हिंदू बौद्ध ईसाई एकता परिषद के प्रवक्ता के अनुसार, दिसम्बर से अब तक हिन्दू समुदाय के सात लोगों की हत्या हो चुकी है। हालांकि, परिषद ने दो पीड़ितों के बारे में विस्तृत जानकारी नहीं दी। अगस्त, 2024 में शेख हसीना की सरकार के सत्ता से हटने होने के बाद से बांग्लादेश में अल्पसंख्यक समुदायों के खिलाफ हुई कई घटनाओं में वहां की अल्पसंख्यक हिन्दू आबादी प्रभावित हुई है। वर्ष 2022 की जनगणना के अनुसार, बांग्लादेश में लगभग 1.31 करोड़ हिन्दू रहते हैं, जो कुल जनसंख्या का लगभग 7.95 प्रतिशत है।
इन हिन्दुओं की भी हो चुकी है हत्या
मोनी चक्रवर्ती : किराना दुकान के 40 वर्षीय मालिक की पांच जनवरी की रात को पलाश उप जिला के चारसिंदूर बाजार में अज्ञात हमलावरों ने धारदार हथियार से वार करके हत्या कर दी।
राणा प्रताप बैरागी : बर्फ बनाने की फैक्टरी के मालिक और नरैल से प्रकाशित होने वाले ‘दैनिक बीडी खबर’ नामक समाचार पत्र के कार्यवाहक संपादक राणा प्रताप बैरागी (38) की पांच जनवरी को दक्षिणी बांग्लादेश के जेस्सोर जिले में अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी।
अमृत मंडल : राजबारी कस्बे के पांग्शा उप जिला में 24 दिसम्बर को जबरन वसूली के आरोप में उनकी पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। मंडल ने कथित तौर पर एक आपराधिक गिरोह बनाया था। जबरन वसूली और अन्य आपराधिक गतिविधियों में शामिल था। स्थानीय लोगों ने तब उस पर हमला किया, जब उसने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ मिलकर एक निवासी से धन वसूलने की कोशिश की।
खोकोन चंद्र दास : दुकान बंद कर घर लौट रहे हिन्दू व्यापारी दास (50) पर 31 दिसम्बर की रात बदमाशों ने बेरहमी से हमला किया, उन पर धारदार हथियार से वार किए और फिर आग लगा दी। दवाओं की दुकान और मोबाइल बैंकिंग करने वाले दास की तीन दिन बाद तीन जनवरी को अस्पताल में मृत्यु हो गई।
