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ईरान अमेरिका युद्ध और हमारी देसी सियासत

ईरान अमेरिका युद्ध और हमारी देसी सियासत

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 By Varsha Pargat

Iran US war जब से ईरान अमेरिका युद्ध शुरू हुआ है तब से हमने देखा है कि हमारे कई विपक्ष के नेता मोदी सरकार की नीतियों की तीखी आलोचना कर रहे हैं. राहुल गांधी ने तो मोदी को “Compramise PM”कहते हुए भारत सरकार की चुप्पी  पर बहुत बड़े सवाल खड़े किए.

कांग्रेस और राहुल गांधी मोदी जी से यह अपेक्षा कर रहे हैं कि उन्हें इस मामले पर अपना बयान जारी करना चाहिए. अयातुल्लाह खामनेई  के निधन के बाद सोनिया गांधी समेत कई नेता चाहते थे कि मोदी जी को अपना मत व्यक्त करना चाहिए और भारत की नीति स्पष्ट करनी चाहिए. कांग्रेस और विपक्ष के नेता अयातुल्लाह खामनेई  की मौत पर भारत की भूमिका पर सवाल उठा रहे थे. इजरायल और अमेरिका के खिलाफ भारत के कई शहरों में प्रदर्शन हुए जिसका समर्थन कांग्रेस और कई दूसरे पक्ष ने  किया. भारत और मोदी सरकार बहुत सोच समझकर अपनी नीतियों को आगे बढ़ा रहे थे.  खामनेई   के मौत के तीन-चार दिन बाद भारत के विदेश सचिव  Vikram Misry  ईरान दूतावास जाकर शोक संदेश लिखकर आए.

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पूरी दुनिया इस युद्ध के बारे में बात कर रही है .और अपनी नीतियों को सामने ला रही है. सभी के लिए यह युद्ध चिंता लेकर आया. तेल और गैस के लिए एक बहुत बड़ा  खतरा खड़ा हो गया. कुछ यूरोपीय देश डोनाल्ड ट्रंप के खिलाफ खुलकर सामने आए. युद्ध में साथ देने से मना कर दिया. दूसरी और डोनाल्ड ट्रंप इन देशों को धमकी दे रहे हैं. UK, France, Italy and Germany  यह देश युद्ध में उतरना नहीं चाहते.  वे “We have not started the War” ऐसा बयान देते हुए खुद को सुरक्षित रखना चाहते हैं.

भारत के लिए भी यह बहुत दुविधा का समय था. अमेरिका के साथ रहना भी संकट और ईरान के साथ खड़े रहना भी संकट. ऐसी स्थिति में संतुलित रूप अपनाते हुए “Silence” ही उचित नीति थी. भारत सरकार पडदे  के पीछे  लगातार खाड़ी देश और ईरान के साथ संपर्क में थी और है. इसीलिए Strait of Harmoz से हमारे चार-पांच जहाज सुरक्षित आए. आज भी हमने देखा कि प्रधानमंत्री लगातार राष्ट्र प्रमुख और यूरोपीय देश के प्रमुखों के साथ बात कर रहे हैं.

Iran US war and our domestic politics
Iran US war and our domestic politics

इस सारे संकट के बीच कांग्रेस के नेता शशि थरूर इनका बयान आया,” India’s Silence on the Iran issue is not cowardice. It reflects the understanding that National interest requires wisdom, not showmanship”

शशि थरूर ने आगे यह भी कहा, “ He understands the Indian government’s desire tot ake a cautious stand on the conflict, and hoped that it could make a public call to both sides to end the war quickly”

शशि थरूर के साथ कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनीष तिवारी जी ने भी इसी तरह का विचार व्यक्त किया. आज के मल्टीपोलर वर्ल्ड में और मल्टी एलाइनमेंट वर्ल्ड में भारत अपनी नीतियों को संतुलित रखकर आगे बढ़ रहा है और देश हित को महत्व देते हुए संभाल कर कदम बढ़ा रहा है. भारत सरकार और प्रधानमंत्री मोदी जी भारत की संप्रभुता और सुरक्षा को प्राधान्य  देते हुए ग्लोबल जस्टिस की बात कर रहे हैं. दुनिया की कोई भी ताकत हमारे वैल्यूज ,आइडियल और प्रिंसिपल्स को झुका नहीं सकती. इसी का प्रदर्शन भारत कर रहा है. एक और बात हम यहां कह सकते हैं और दुनिया को बताना चाहेंगे – No one holds a monopoly over patriotism, nor over the interpretation of the values taught by our great leaders and thinkers

Please share your views here – varshapargat@yahoo.co.in

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