एशियाई पैरा खेल : भारतीय एथलीटों ने लगातार दूसरे दिन जीते 5 स्वर्ण, पुरुषों की ऊंची कूद में क्लीन स्वीप

नागोया, 22 अक्टूबर। भारतीय पैरा एथलीटों ने यहां पाचवें एशियाई पैरा खेलों (Aichi-Nagoya 2026 Asian Para Games) में ट्रैक व फील्ड पर लगातार दूसरे दिन पांच स्वर्ण पदक जीते। इस दौरान शैलेष कुमार की अगुआई में पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में ‘क्लीन स्वीप’ देखने को मिला तो 400 मीटर टी47 स्पर्धा में महिला व पुरुष वर्ग में क्रमशः अंजनाबेन बुंबाडिया और दिलीप गावित ने बाजी मारी। वहीं महिलाओं की चक्काफेंक एफ54 में सुवर्णा राज और पुरुषों की लंबीकूद में सोलाइराज धर्मराज भी सोना बटोरने में कामयाब रहे।

दिन के दो अन्य स्वर्ण पदक तीरंदाज शीतल देवी ने दिलाए

दरअसल, भारतीय खिलाड़ियों ने आज कुल सात स्वर्ण, चार रजत व 15 कांस्य सहित कुल 26 पदक जीते। एथलेटिक्स के अलावा दो अन्य स्वर्ण भुजाहीन तीरंदाज शीतल देवी ने दिलाए। उन्होंने कंपाउंड वर्ग की मिश्रित टीम स्पर्धा में सोमन कुमार के साथ स्वर्ण जीतने के बाद व्यक्तिगत वर्ग में भी लगातार दूसरी बार सोना जीता।

एथलेटिक्स में भारत को अब तक 18 स्वर्ण सहित 52 पदक

ट्रैक एंड फील्ड मुकाबलों में गुरुवार को भारत ने पांच स्वर्ण, तीन रजत व दो कांस्य सहित कुल 10 पदक जीते और चार दिनों की स्पर्धाओं के बाद उनके खाते में कुल 18 स्वर्ण, 16 रजत व 18 कांस्य सहित कुल 52 पदक आ चुके हैं।

भारत 21 स्वर्ण सहित 88 पदक लेकर तालिका में चौथे स्थान पर

कुल मिलाकर देखें तो पदक स्पर्धाओं के चौथे दिन की समाप्ति पर भारत 21 स्वर्ण, 26 रजत व 41 कांस्य सहित कुल 88 पदकों के साथ पदक तालिका में फिर चौथे स्थान पर जा पहुंचा है। यह देखना दिलचस्प रहेगा कि अंतिम दो दिनों की स्पर्धाओं के जरिए भारत अपना पिछला सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन पीछे छोड़ पाता है अथवा नहीं। हांगझू 2023 में भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए रिकॉर्ड 111 पदक (29 स्वर्ण, 31 रजत और 51 कांस्य) जीते थे।

चीन ने पूरा किया पदकों का तिहरा सैकड़ा

वहीं खेलों के समापन से दो दिन पूर्व शीर्ष पर काबिज चीनी दल अन्य देशों को काफी पीछे छोड़ तेजी से आगे बढ़ रहा है। इस क्रम में चीनी पदकों का तिहरा शतक पूरा हो चुका है और अब उसके खाते में 150 स्वर्ण, 79 रजत व 85 कांस्य सहित कुल 314 पदक हैं। पदकों का सैकड़ा पूरा कर चुके दो अन्य देश – मेजबान जापान (40+46+50=136) व उज्बेकिस्तान (38+41+41=120)  क्रमशः दूसरे व तीसरे स्थान पर हैं।

अंजनाबेन 400 मीटर टी47 स्पर्धा में अव्वल, जयंती को रजत

एथलेटिक्स मुकाबलों की बात करें तो अंजनाबेन बुंबाडिया ने महिलाओं की 400 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता जबकि जयंती बेहेडा को रजत पदक मिला। बुंबाडिया ने 59.97 सेकेंड का समय निकाला और चार खिलाड़ियों में एक मिनट से कम का समय निकालने वाली अकेली प्रतियोगी रहीं। बेहेडा ने एक मिनट 00.65 सेकेंड का समय लिया। थाईलैंड की सासिरावान इंताचोत ने एक मिनट 02.58 सेकेंड के साथ कांस्य पदक जीता।

शेलैष ने ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में बनाया नया रिकॉर्ड

पुरुषों की ऊंची कूद टी63 स्पर्धा में शैलेष ने खेलों के नए रिकॉर्ड के साथ 1.89 मीटर की कूद लगाकर स्वर्ण पदक जीता। पूर्व पैरालम्पिक कांस्य पदक विजेता वरुण भाटी ने सत्र का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 1.84 मीटर की कूद के साथ रजत जीता जबकि राहुल ने व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन के बीच 1.81 मीटर के साथ कांस्य पदक हासिल किया। भारत ने हांगझू में हुए पिछले खेलों में भी इस स्पर्धा के तीनों पदक जीते थे।

टी63 श्रेणी उन एथलीटों के लिए है, जिनका घुटना या घुटने के ऊपर का हिस्सा कटा हुआ है या जिनके पैर में कोई कमी है। ये एथलीट दौड़ने और कूदने के लिए घुटने के जोड़ वाले कृत्रिम पैर (प्रोस्थेसिस) का उपयोग करके प्रतिस्पर्धा करते हैं।

दिलीप गावित ने 100 मीटर के बाद 400 मीटर टी47 में भी बाजी मारी

पुरुषों के 400 मीटर टी47 फाइनल में दिलीप गावित ने 48.27 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता। भाविककुमार भारवाड ने 49.31 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक हासिल किया था, लेकिन लेन तोड़ने के कारण उन्हें अयोग्य करार दिया गया। गावित ने इससे पहले बुधवार को पुरुषों की 100 मीटर टी47 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीता था। उन्होंने हांगझू खेलों में 49.48 सेकेंड का समय निकालकर स्वर्ण पदक जीता था।

टी47 श्रेणी में वे एथलीट आते हैं, जिनकी कोहनी के नीचे से बाजू या कलाई कटी हुई है या ऊपरी अंग में कोई ऐसी ही कमी या खराबी है, जिससे एक बाजू प्रभावित होती है।

धर्मराज ने लंबी कूद टी44/टी 62/टी 64 में तोड़ा एशियाई रिकॉर्ड

एथलेटिक्स में भारत को दिन का आखिरी स्वर्ण पदक धर्मराज ने दिलाया, जिन्होंने पुरुषों की लंबी कूद टी44/टी62/टी64 में 7.15 मीटर के एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक जीता। उन्होंने अपने दूसरे प्रयास में यह कूद लगाई जबकि पांचवां और छठा प्रयास फाउल रहा। पहले, तीसरे और चौथे प्रयास में उन्होंने क्रमश: 6.88 मीटर, 6.82मीटर और 6.85 मीटर की कूद लगाई। मलेशिया के एडी बर्नार्ड ने रजत और जापान के युमा तामाकी को कांस्य पदक मिला।

टी44/62/64 खिलाड़ी अक्सर संयुक्त प्रतिस्पर्धा करते हैं, क्योंकि विश्व पैरा एथलेटिक्स निचले अंगों से जुड़ी श्रेणियों को एक साथ रखता है ताकि पर्याप्त प्रतियोगी मिल सकें और मुकाबला निष्पक्ष हो।

सुवर्णा राज महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में अव्वल रहीं

इससे पहले सुबह के सत्र में सुवर्णा राज ने भारत को पहला स्वर्ण दिलाया, जब वह महिलाओं की चक्का फेंक एफ54 स्पर्धा में 15.66 मीटर के सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ अव्वल रहीं। सुवर्णा ने शानदार प्रदर्शन करते हुए अपने छह प्रयासों में से चार में 15 मीटर से अधिक का थ्रो किया। उन्होंने अपने पांचवें प्रयास में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करके पोडियम पर शीर्ष स्थान हासिल किया।

ईरान की शाहला हदीदी 15.45 मीटर के साथ दूसरे स्थान पर रहीं, जबकि वियतनाम की थी न्गोक थुई गुयेन ने 14.65 मीटर के साथ कांस्य पदक जीता। एफ54 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है जिनके धड़ और निचले अंग सक्षम नहीं होते हैं और वह व्हीलचेयर पर बैठकर थ्रो करते हैं। एथलीट अपने शरीर के ऊपरी हिस्से की ताकत और बांहों की गति का उपयोग करके शक्ति पैदा करते हैं।

तेजलबेन व रावन्नी ने भी जीते पदक

महिलाओं की 400मीटर टी12 स्पर्धा में दृष्टिबाधित तेजलबेन दामोर ने 57.60 सेकेंड के समय के साथ रजत पदक जीता, जो इन खेलों में उनका दूसरा पदक है। उन्होंने 200 मीटर टी12 स्पर्धा में कांस्य पदक जीता था। वहीं वी रावन्नी ने महिलाओं की 400 मीटर टी11 स्पर्धा में एक मिनट 03.64 सेकेंड का समय निकालकर कांस्य पदक जीता।

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