भारत ने लेबनान में इजराइली हमलों पर जताई गहरी चिंता, देशों की संप्रभुता के सम्मान पर दिया जोर
नई दिल्ली, 10 अप्रैल। भारत ने अमेरिका व ईरान के बीच संघर्ष विराम की सहमति के बावजूद लेबनान पर इजराइली हमलों में बड़ी संख्या में लोगों के मारे जाने पर गहरी चिंता जताई है और अंतररारष्ट्रीय कानूनों के पालन व देशों की संप्रभुता के सम्मान पर जोर दिया है।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने शुक्रवार को राष्ट्रीय राजधानी में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान लेबनान के हालात पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि इन हमलों में आम नागरिकों के बड़ी संख्या में मारे जाने की घटना बहुत परेशान करने वाली है। उन्होंने कहा, ‘हम लेबनान में बड़ी संख्या में नागरिकों के हताहत होने वाली खबरों से बहुत चिंतित हैं।’
लेबनान में संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल (UNIFIL) में सैनिक भेजने वाले देश के तौर पर भारत की भूमिका पर जोर देते हुए जायसवाल ने कहा, ‘UNIFIL में सैनिक भेजने वाले देश के तौर पर, जो लेबनान की शांति और सुरक्षा में लगा हुआ है, घटनाओं का यह रुख बहुत परेशान करने वाला है।’
आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता
उन्होंने भारत के पुराने रुख को दोहराते हुए कहा, ‘भारत ने हमेशा आम नागरिकों की सुरक्षा को सबसे पहली प्राथमिकता बताया है। अंतरराष्ट्रीय कानून का पालन करना, और देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करना जरूरी है।’ सरकार ने यह भी भरोसा दिलाया कि इस इलाके में भारतीय नागरिकों की सुरक्षा पक्की करने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘लेबनान में हमारा दूतावास, भारतीय समुदाय की सुरक्षा और हिफाज़त के लिए उनके साथ लगातार संपर्क में है।’
घटनाक्रम पर बारीकी से नजर रख रहे
रणधीर जायसवाल ने यह भी कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए खाड़ी देशों के साथ अपना जुड़ाव बढ़ा रहा है और साथ ही पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर भी बारीकी से नजर रख रहा है। उन्होंने कहा, ‘हम पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं। हम खाड़ी क्षेत्र के देशों के साथ लगातार संपर्क बनाए हुए हैं। प्रधानमंत्री के निर्देश पर, हमारे मंत्री हमारी ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने के लिए खाड़ी देशों का दौरा कर रहे हैं।’
उन्होंने बताया कि विदेश मंत्री एस. जयशंकर अभी मॉरीशस के दौरे पर हैं और 11 और 12 अप्रैल, 2026 को संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की यात्रा करेंगे। वह UAE के नेताओं के साथ बातचीत करेंगे ताकि भारत और UAE के संबंधों को और अधिक मजबूत बनाया जा सके।
