विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जी-7 बैठक में वैश्विक आर्थिक सुरक्षा, नौवहन स्वतंत्रता और नार्को-आतंकवाद पर जताई चिंता
नई दिल्ली, 27 मार्च। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने फ्रांस में आयोजित जी-7 विदेश मंत्रियों की बैठक में अपने समकक्षों से मुलाकात की। इस दौरान वैश्विक आर्थिक स्थिरता के लिए नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व को भी रेखांकित किया गया। साथ ही बैठक में नार्को-आतंकवाद के बढ़ते संबंधों से उत्पन्न चुनौतियों पर चिंता जताई गई। महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत बनाने और सहयोग बढ़ाने के प्रयासों की भी सराहना की गई, जो वैश्विक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक माने जा रहे हैं।
एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट में लिखा, ‘आज जी-7 विदेश मंत्रियों की मीटिंग में सत्र में विभिन्न खतरों और संप्रभुता पर चर्चा की। वैश्विक आर्थिक सुरक्षा के लिए नौवहन की स्वतंत्रता के महत्व पर जोर दिया। साथ ही नार्को-आतंकवाद के बीच संबंधों से उत्पन्न खतरे को भी रेखांकित किया। महत्वपूर्ण खनिजों के संबंध में, उनकी मूल्य श्रृंखला के विस्तार हेतु सहयोग बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे मौजूदा कदमों की सराहना की।’
Debated cross cutting threats and sovereignty at the @G7 FMM session today.
Underscored the importance of freedom of navigation for global economic security. As well as the threat of narco – terror linkages.
On Critical Minerals, appreciated ongoing steps to expand cooperation… pic.twitter.com/V6bCSDqUkt
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) March 27, 2026
इसके पूर्व डॉ. जयशंकर दो दिनों की जी7 विदेश मंत्रियों की मीटिंग के लिए गुरुवार को फ्रांस पहुंचे, जहां उन्होंने दक्षिण कोरिया, कनाडा और जापान के अपने समकक्षों से मुलाकात की। बैठक में, विदेश मंत्री और उनकी कनाडाई समकक्ष अनीता आनंद ने दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को आगे बढ़ाने और पश्चिम एशिया के हालातों पर चर्चा की। उन्होंने फ्रांस में जी7 विदेश मंत्रियों की बैठक के दौरान चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच वैश्विक संपर्क को मजबूत करने में भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के महत्व पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष से मजबूत व्यापार रूट और सुरक्षित सप्लाई चेन की जरूरत और ज्यादा हो गई है। सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि यूरोपीय यूनियन, यूरोपीय फ्री ट्रेड एसोसिएशन (ईएफटीए) और ब्रिटेन के साथ मुक्त व्यापार समझौता समेत बड़े वैश्विक साझेदारी के साथ भारत के बढ़ते व्यापार समझौते ने आईएमईसी में काफी वैल्यू जोड़ी है।
बैठक के दौरान जयशंकर ने कनेक्टिविटी पहल को पूरा करने के लिए अंतरराष्ट्रीय साझेदारों के बीच बढ़ते उत्साह की भी सराहना की। उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों की जरूरत पर जोर दिया और वैश्विक दक्षिण के सामने आने वाली चुनौतियों पर जोर डाला। उन्होंने बताया, ‘यूएनएससी सुधारों की जरूरत, शांति अभियानों को आसान बनाने और मानवीय सप्लाई चेन को मजबूत करने पर जोर दिया। खास तौर पर ऊर्जा चुनौतियों, खाद आपूर्ति और खाद्य सुरक्षा को लेकर ग्लोबल साउथ की चिंताओं को ठाया।’
