जयपुर, 8 सितंबर। मुंह में होने वाले छाले (Mouth Ulcer) आम समस्या हैं, लेकिन कई बार इनकी वजह से कान में भी तेज दर्द या टीस महसूस हो सकती है। ऐसे में लोग इसे कान का संक्रमण समझ लेते हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मुंह या गले के कुछ हिस्सों में मौजूद नसों के कारण वहां होने वाला दर्द कान में महसूस हो सकता है। इस स्थिति को ‘रेफर्ड पेन’ (Referred Pain) कहा जाता है।
जयपुर के वरिष्ठ होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. एन. सी. पंवार के अनुसार, जीभ के पिछले हिस्से, तालू या गले के आसपास होने वाले छालों में कुछ मरीजों को कान की ओर दर्द महसूस हो सकता है। हालांकि, कान में दर्द के अन्य कारण भी हो सकते हैं, इसलिए लगातार या तेज दर्द होने पर चिकित्सकीय जांच जरूरी है।
मुंह के छाले और कान के दर्द का क्या है संबंध?
मुंह और गले के आसपास की संवेदनाओं से जुड़ी कुछ नसों के रास्ते कान की संवेदनाओं से भी जुड़े होते हैं। इसी वजह से समस्या एक जगह होने के बावजूद दर्द दूसरी जगह महसूस हो सकता है। इसे ही रेफर्ड पेन कहा जाता है।
खासकर जीभ के पीछे या गले के पास छाला होने पर निगलने, बोलने या खाना खाने के दौरान दर्द बढ़ सकता है और यह दर्द कान की तरफ महसूस हो सकता है।
होम्योपैथी में कैसे देखा जाता है मामला?
डॉ. पंवार के मुताबिक, होम्योपैथिक दृष्टिकोण में मुंह के छालों को केवल स्थानीय समस्या के तौर पर देखने के बजाय मरीज के अन्य लक्षणों पर भी ध्यान दिया जाता है। इसमें पाचन संबंधी परेशानी, तनाव, खान-पान और पोषण संबंधी स्थिति जैसे पहलुओं को भी देखा जाता है।
हालांकि, होम्योपैथिक दवाओं की प्रभावशीलता के संबंध में आधुनिक वैज्ञानिक प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इन्हें चिकित्सकीय उपचार का प्रमाणित विकल्प नहीं माना जाना चाहिए।
होम्योपैथी में किन दवाओं का उल्लेख किया जाता है?
डॉ. पंवार के अनुसार, होम्योपैथिक पद्धति में मरीज के लक्षणों के आधार पर अलग-अलग दवाओं का चयन किया जाता है। इनमें कुछ प्रमुख नाम इस प्रकार बताए जाते हैं:
मर्क सॉल
ऐसे मामलों में इसका उल्लेख किया जाता है, जहां मुंह के छालों के साथ अधिक लार आना, रात में दर्द बढ़ना और निगलने पर दर्द कान की ओर महसूस होना जैसे लक्षण बताए जाएं।
नाइट्रिक एसिड
छाले में कांटे चुभने जैसा तेज दर्द, खून आने की प्रवृत्ति और खाने या बोलने के दौरान दर्द बढ़ने जैसे लक्षणों में इस दवा का उल्लेख किया जाता है।
बोरेक्स
मुंह में संवेदनशील छाले, जलन और गर्म भोजन से परेशानी बढ़ने जैसी शिकायतों में इसका उपयोग होम्योपैथिक पद्धति में बताया जाता है।
नक्स वोमिका
कब्ज, मसालेदार भोजन, तनाव और बार-बार होने वाले मुंह के छालों जैसे लक्षणों के साथ इस दवा का उल्लेख किया जाता है।
इन दवाओं का सेवन चिकित्सकीय सलाह के बिना नहीं करना चाहिए। लगातार या बार-बार होने वाले छालों के पीछे किसी अन्य कारण की पहचान के लिए डॉक्टर से परामर्श जरूरी है।
बार-बार मुंह में छाले होने के क्या कारण हो सकते हैं?
बार-बार छाले होना कई कारणों से जुड़ा हो सकता है। इनमें मुंह में चोट या जलन, तनाव, कुछ पोषक तत्वों की कमी और अन्य स्वास्थ्य संबंधी स्थितियां शामिल हो सकती हैं। केवल छालों के आधार पर रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने या किसी विशेष विटामिन की कमी का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता।
छालों में राहत के लिए क्या करें?
मुंह के छालों के दौरान कुछ सामान्य सावधानियां राहत देने में मदद कर सकती हैं:
तीखे, खट्टे और बहुत गर्म खाद्य पदार्थों से कुछ समय परहेज करें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
नमक मिले गुनगुने पानी से कुल्ला किया जा सकता है।
नरम और आसानी से पचने वाला भोजन लें।
छाले को बार-बार जीभ या दांत से न छेड़ें।
कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी है?
अगर मुंह के छालों के साथ कान से मवाद आना, बुखार, सुनने में कमी, कान में लगातार तेज दर्द या अन्य गंभीर लक्षण दिखाई दें, तो इसे केवल छाले से जुड़ा दर्द मानकर इलाज नहीं करना चाहिए। ऐसे मामलों में ENT विशेषज्ञ, दंत चिकित्सक या अन्य योग्य चिकित्सक से जांच कराना जरूरी है।
डिस्क्लेमर: यह खबर सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से है। किसी भी होम्योपैथिक या अन्य दवा का इस्तेमाल चिकित्सकीय परामर्श के बिना न करें।


