यूजीसी के नए नियमों पर ब्रेक : सुप्रीम कोर्ट के फैसले का भाजपा ने किया स्वागत
नई दिल्ली, 29 जनवरी। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट द्वारा रोक लगाए जाने के फैसले का स्वागत किया है। भाजपा नेताओं ने इसे संविधान, सामाजिक समरसता और सनातन मूल्यों की रक्षा से जुड़ा अहम निर्णय बताया, वहीं विपक्षी दलों पर इस मुद्दे को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया।
गिरिराज सिंह बोले – सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा
केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “सनातन को बांटने वाले यूजीसी के नियम पर सर्वोच्च न्यायालय की ओर से रोक लगाए जाने पर हार्दिक आभार। यह निर्णय भारत की सांस्कृतिक एकता और सनातन मूल्यों की रक्षा की दिशा में अहम है। मोदी सरकार की पहचान सबका साथ, सबका विकास और सनातन की अखंड एकता है।”
निशिकांत दुबे का विपक्ष पर हमला
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद विपक्षी दलों पर निशाना साधा। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा, “यूजीसी पर गाली देने वाले सभी ज्ञानी, मैं पिछले दो दिनों से संसद जा रहा हूं, किसी राजनीतिक दल के किसी सदस्य ने इस पर चर्चा तक करना मुनासिब नहीं समझा। उल्टा, जिस सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में ईडब्ल्यूएस को 10% आरक्षण देकर गरीबों की सुध ली, उसी को गाली दी जा रही है।”
संविधान के दायरे में ही होंगे कानून : दुबे
निशिकांत दुबे ने आगे कहा, “मैं दोबारा आपसे करबद्ध निवेदन करता हूं कि मोदी जी पर भरोसा रखिए। संविधान की धारा 14 और 15 के तहत ही देश के कानून चलेंगे। सुप्रीम कोर्ट ने वही किया, जो मैंने कहा था।”
यूजीसी नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को यूजीसी के नए नियमों को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए केंद्र सरकार और यूजीसी को नोटिस जारी किया। इसके साथ ही अदालत ने यूजीसी के नए रेगुलेशन पर रोक लगा दी और स्पष्ट किया कि अगली सुनवाई 19 मार्च को होगी। कोर्ट ने आदेश दिया कि तब तक 2012 के यूजीसी रेगुलेशन ही लागू रहेंगे।
दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं
चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई की। चीफ जस्टिस ने कहा कि नए रेगुलेशन में इस्तेमाल किए गए शब्दों से दुरुपयोग की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। वहीं, जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि अदालत समाज में एक निष्पक्ष और समावेशी माहौल बनाए रखने के दृष्टिकोण से इस मामले पर विचार कर रही है।
