
राणा सांगा के खिलाफ टिप्पणी पर भाजपा सदस्यों का राज्यसभा में हंगामा, सुमन से की माफी की मांग
नई दिल्ली, 28 मार्च। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सदस्यों और मंत्रियों ने राजपूत राजा राणा सांगा के खिलाफ समाजवादी पार्टी के रामजी लाल सुमन की विवादित टिप्पणी की शुक्रवार को निंदा की और बिना शर्त माफी की मांग को लेकर राज्यसभा में हंगामा किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही भाजपा सदस्य अपने-अपने स्थानों पर खड़े हो गए और नारेबाजी करने लगे। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही तकरीबन आधे घंटे के लिए बाधित हुई।
सभापति जगदीन धनखड़ ने कहा कि राणा सांगा राष्ट्रभक्ति के प्रतीक हैं और उनके बारे में की गई अमर्यादित टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने राजपूत राजा को एक राष्ट्रीय नायक बताया जिन्होंने बहादुरी से लड़ाई लड़ी और उनके खिलाफ की गई सपा सदस्य की टिप्पणी को ‘अत्यधिक अपमानजनक और आपत्तिजनक’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि सदस्यों को संवेदनशील मुद्दों पर बोलते समय सावधानी बरतनी चाहिए और गरिमा बनाए रखनी चाहिए। सभापति ने यह भी कहा कि सुमन ने जो टिप्पणी की है, उसे सदन की कार्यवाही से निकाल दिया गया है। संसदीय कार्यमंत्री किरेन रीजीजू ने कहा कि सभापति ने राणा सांगा के बारे में देश की भावना को प्रतिबिंबित किया है। सुमन की टिप्पणी को उन्होंने अपमानजनक और बेहद निंदनीय बताया और कहा कि कांग्रेस को भी सुमन द्वारा कही गई बातों को खंडन करना चाहिए।
विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि सभापति धनखड़ की ओर से राणा सांगा के बारे में जो बातें कही गई हैं, वह उससे पूरी तरह सहमत हैं। उन्होंने कहा कि वह और उनकी पार्टी देश के लिए लड़ने वाले और अपने प्राण न्योछावर करने वाले सभी देशभक्तों का सम्मान करते हैं। सुमन के विवादास्पद बयान के बाद उनके घर और संपत्ति पर हुए हमलों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि किसी को भी कानून-व्यवस्था अपने हाथ में लेने और सांसद के घर में घुसने और तोड़फोड़ करने का अधिकार नहीं है।
उन्होंने कहा कि इस तरह की दलित विरोधी हरकतों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लेकिन यह कतई उचित नहीं है कि उनके (सपा सदस्य के) आवास पर हमले किए जाएं और बुलडोजर चलाया जाए। खरगे ने यह भी कहा कि सुमन की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने कहा कि राणा सांगा वीर थे और उनकी बहादुरी का हम सम्मान करते हैं, उनकी वीरता को प्रणाम करते हैं।
भारतीय जनता पार्टी के राधामोहन दास अग्रवाल ने कहा सुमन ने अपनी टिप्पणी वापस नहीं ली है बल्कि यह कहा है कि वह मरते दम तक अपनी बात पर अडिग रहेंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि नेता प्रतिपक्ष ने सुमन के दलित होने का मुद्दा उठाकर राणा सांगा का भी अपमान किया है।
उन्होंने कहा कि सुमन और कांग्रेस जब तक माफी नहीं मांग लेते तक भाजपा इस मुद्दे पर चुप नहीं बैठेगी।
इसके बाद, रीजीजू ने कहा कि वह खरगे की इस टिप्पणी की निंदा करते हैं कि सुमन के घर पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वह दलित थे। उन्होंने कहा कि यह जाति या धर्म का मुद्दा नहीं है।
केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सुमन की टिप्पणी निंदनीय है और देश के वीरों का अपमान है। उन्होंने आसन से आग्रह किया कि सुमन की टिप्पणी की सदन में निंदा की जाए ताकि सही संदेश जाए। गोयल ने खरगे पर आरोप लगाया कि उन्होंने सपा सदस्य की जाति का मुद्दा उठाकर इस पर राजनीति करने का प्रयास किया है जो कि निंदनीय है। खरगे ने जवाब देते हुए कहा कि सभी नायक चाहे वह राणा सांगा हों या महाराणा प्रताप बहुत सम्मानित व्यक्ति हैं।
उन्होंने कहा कि उनकी आपत्ति हिंसा को लेकर है क्योंकि संविधान इसकी अनुमति नहीं देता। इसके बाद सभापति ने सुमन को बोलने का अवसर दिया। सपा सदस्य सुमन ने अभी बोलना आरंभ भी नहीं किया था कि सत्ता पक्ष के सदस्यों ने हंगामा तेज कर दिया। हंगामा बढ़ता देख सभापति ने करीब 11 बजकर 29 मिनट पर सदन की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी।
हालांकि जब 12 बजे कार्यवाही दोबारा आरंभ हुई तो सभापति धनखड़ ने प्रश्नकाल आरंभ कर दिया। इस दौरान सुमन को अपनी सीट से यह कहते हुए सुना गया कि उन्हें बोलने का मौका मिलना चाहिए। लेकिन सभापति ने प्रश्नकाल जारी रखा।
ज्ञात हो कि 21 मार्च को राज्यसभा में गृह मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा पर बहस में हिस्सा लेते हुए रामजी लाल सुमन ने राणा सांगा पर विवादित टिप्पणी की थी।
इसके विरोध में करणी सेना के कार्यकर्ताओं ने बुधवार को सांसद सुमन के आगरा स्थित आवास पर तोड़फोड़ की थी। सुमन के आवास पर हमले के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने हिंसा की निंदा की और योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा था कि सपा राणा सांगा की बहादुरी पर सवाल नहीं उठा रही है। उन्होंने दावा किया था कि हमला ‘सुमन के दलित होने के कारण’ हुआ।