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बंगाल में सियासी भूचाल : I-PAC दफ्तर में ED की छापेमारी के दौरान पहुंचीं सीएम ममता, अहम दस्तावेज साथ ले गईं

बंगाल में सियासी भूचाल : I-PAC दफ्तर में ED की छापेमारी के दौरान पहुंचीं सीएम ममता, अहम दस्तावेज साथ ले गईं

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कोलकाता, 8 जनवरी। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने गुरुवार को कोलकाता में राजनीतिक परामर्श फर्म I-PAC के कार्यालय और इसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर धनशोधन की जांच के तहत तलाशी ली। आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी।

प्रतीक जैन के घर से दस्तावेज लेने के बाद सीएम ममता I-PAC दफ्तर पहुंचीं

ईडी के अनुसार छापेमारी के दौरान ही पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने काफिले के साथ प्रतीक जैन के घर में दाखिल हुईं और दस्तावेज, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सहित अहम सबूत अपने साथ ले गईं। दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक उपकरण लेने के बाद ममता बनर्जी का काफिला आई-पैक कार्यालय पहुंचा, जहां से मुख्यमंत्री, उनके सहयोगियों और पुलिस ने जबरन दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक सबूत हटा दिए।

ईडी का कहना है कि बंगाल में कोयला तस्करी से जुड़े हवाला कारोबारी ने आई-पैक को करोड़ों रुपये के लेनदेन में मदद की थी। छापेमारी नियमित काररवाई का हिस्सा, यह किसी राजनीतिक संगठन पर निशाना साधने के लिए नहीं किया गया और न ही इनका किसी चुनाव से कोई संबंध है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के बड़ी संख्या में पुलिस अधिकारियों के साथ आने तक छापेमारी की कार्यवाही शांतिपूर्ण और पेशेवर तरीके से चल रही थी।

करोड़ों रुपये के कोयले के कथित अवैध खनन व तस्करी मामले में धन शोधन जांच के तहत यह काररवाई की गई। सूत्रों ने बताया कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की मौजूदगी में संघीय जांच एजेंसी द्वारा सुबह सात बजे से लगभग 10 परिसरों पर छापेमारी की जा रही है।

सुबह 7 बजे से लगभग 10 परिसरों में छापेमारी

इनमें साल्ट लेक स्थित आई-पैक का कार्यालय और लाउडन स्ट्रीट स्थित जैन का घर भी शामिल है। इन 10 परिसरों में चार दिल्ली में हैं। उन्होंने बताया कि आईआईटी मुंबई के पूर्व छात्र जैन ‘इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी’ (आई-पैक) के सह-संस्थापक और निदेशक हैं। पश्चिम बंगाल में कोयला घोटाले से जुड़े कुछ हवाला लेनदेन और नकद लेनदेन के संबंध में उनके खिलाफ विशिष्ट साक्ष्य हैं।

कोयला घोटाले से जुड़े हवाला लेनदेन में जैन के खिलाफ विशिष्ट साक्ष्य

प्रतीक जैन पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस के आईटी प्रकोष्ठ के प्रमुख भी हैं। ईडी का मामला केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) द्वारा नवम्बर, 2020 में दर्ज की गई प्राथमिकी से उपजा है, जिसमें बंगाल के आसनसोल और उसके आसपास के कुनुस्तोरिया और काजोरा क्षेत्रों में ईस्टर्न कोलफील्ड्स की खदानों से संबंधित कई करोड़ रुपये के कोयले की चोरी का आरोप लगाया गया था।

अभिषेक बनर्जी भी अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त धन के लाभार्थी

स्थानीय कोयला व्यापारी अनूप मांझी उर्फ ​​लाला इस मामले में मुख्य संदिग्ध है। ईडी ने इससे पहले तृणमूल कांग्रेस सांसद अभिषेक बनर्जी (38) से पूछताछ की थी, जो मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे हैं। ईडी ने दावा किया कि अवैध कोयला व्यापार से प्राप्त धन के वह लाभार्थी हैं।

सीएम ममता बनर्जी का हाई वोल्टेज ड्रामा

वहीं, छापेमारी की खबर मिलते ही बंगाल की राजनीति में खलबली मच गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सबसे पहले आई-पैक प्रमुख प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर पहुंचीं। वहां पहले से ही कोलकाता पुलिस कमिश्नर मौजूद थे।

सीएम का आरोप – गृह मंत्री शाह के इशारे पर की जा रही यह काररवाई

ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि ये छापेमारी गृह मंत्री अमित शाह के इशारे पर की जा रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के पास करोड़ों की संपत्ति है, लेकिन एजेंसियां उनके खिलाफ कोई काररवाई नहीं करतीं बल्कि टीएमसी की चुनावी रणनीति जानने के लिए यह ड्रामा किया जा रहा है।

प्रतीक जैन के घर से ग्रीन फाइल के साथ निकलीं ममता

प्रतीक जैन के घर से बाहर निकलते वक्त ममता बनर्जी के हाथ में एक ग्रीन फाइल देखी गई, जिसने सबको हैरान कर दिया। इसके बाद वह सीधे आई-पैक के साल्ट लेक स्थित दफ्तर पहुंचीं, जहां वह पिछले दरवाजे से अंदर दाखिल हुईं। उनके जाने के कुछ देर बाद मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अधिकारी कुछ फाइलें लेकर बाहर निकले और उन्हें मुख्यमंत्री की गाड़ी में रखा गया। अब ये बड़ा सवाल बन गया है कि क्या ये फाइलें ईडी की जांच का हिस्सा थीं और इनमें क्या राज छिपा है।

पार्टी की गोपनीय जानकारियां चुराने का लगाया आरोप

हालांकि ममता बनर्जी ने दावा किया कि ईडी की फॉरेंसिक टीम ने आई-पैक के कंप्यूटर से डेटा ट्रांसफर किया है और उनके वित्तीय व राजनीतिक दस्तावेज ले गई है। उनका कहना है कि ये रेड सिर्फ भ्रष्टाचार की जांच नहीं, बल्कि टीएमसी के उम्मीदवारों की लिस्ट और स्लोगन जैसी गोपनीय जानकारियों को चुराने की साजिश है।

ईडी ने कहा – यह काररवाई कोयला घोटाले से अर्जित आय के आधार पर

दूसरी तरफ ईडी सूत्रों ने कहा कि यह काररवाई पूरी तरह से कोयला घोटाला मामले और उससे जुड़े अपराध से अर्जित आय के आधार पर की गई है और इसमें कोई राजनीतिक पहलू नहीं है। उन्होंने बताया कि जांच एजेंसी जैन और कुछ अन्य लोगों की संलिप्तता दर्शाने वाले ‘विशिष्ट’ साक्ष्यों के आधार पर यह काररवाई कर रही है। तलाशी अभियान चला रहे अधिकारी विशिष्ट कंप्यूटर उपकरण और दस्तावेज जब्त कर रहे हैं। ईडी की काररवाई पर आई-पैक की प्रतिक्रिया फिलहाल नहीं मिली है।

नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने साधा निशाना

वहीं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी ममता बनर्जी की मौजूदगी को केंद्रीय एजेंसी के काम में हस्तक्षेप बताया और कानूनी काररवाई की मांग की। ED सूत्रों का कहना है कि छापेमारी के दौरान बाधा डाली गई और कुछ दस्तावेज व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण ले जाए गए, जिस पर वे हाई कोर्ट जा सकते हैं।

प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित IPAC अब प्रतीक जैन के नेतृत्व में है

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 के लोकसभा चुनावों से पहले चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर द्वारा स्थापित I-PAC अब प्रतीक जैन के नेतृत्व में है। जैन आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र हैं और तृणमूल कांग्रेस (TMC) की चुनावी रणनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। फर्म ने 2019, 2021 और अन्य चुनावों में TMC की रणनीति, नारे और उम्मीदवार चयन में अहम योगदान दिया है।

TMC की रणनीति, नारे और उम्मीदवार चयन में IPAC का अहम योगदान

तृणमूल और पश्चिम बंगाल सरकार के लिए 2021 के विधानसभा चुनावों के दौरान किए गए कार्यों से संबंधित एक टैब आई-पैक की वेबसाइट पर साझा किया गया है, जिसका शीर्षक है ‘दीदी-आर 10 ओंगीकर’। वेबसाइट के अनुसार, आई-पैक ऐसे ‘दूरदर्शी’ नेताओं के साथ काम करता है, जिनका ‘सिद्ध’ ट्रैक रिकॉर्ड है।

 

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