दिल्ली के IGI हवाई अड्डे पर इंडिगो विमान की आपात लैंडिंग, विमान में सवार थे कुल 161 यात्री
नई दिल्ली, 28 मार्च। राष्ट्रीय राजधानी के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (IGI) हवाई अड्डे पर शनिवार सुबह उस वक्त अफरातफरी मच गई, जब विशाखापत्तनम से दिल्ली आ रही इंडिगो की एक फ्लाइट में तकनीकी खराबी की खबर मिली। विमान के इंजन फेल होने की आशंका के चलते रनवे 28 पर ‘फुल इमरजेंसी’ घोषित कर दी गई थी। हालांकि, पायलट की सूझबूझ और एयरपोर्ट प्रशासन की मुस्तैदी से एक बड़ा हादसा टल गया और विमान की इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।
प्राप्त जानकारी के अनुसार इस विमान में कुल 161 यात्री सवार थे। लैंडिंग के तुरंत बाद सभी यात्रियों को विमान से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। यात्रियों की जांच के बाद उन्हें उनके गंतव्य के लिए रवाना कर दिया गया है। इंडिगो प्रशासन अब इंजन में आई इस तकनीकी खराबी के कारणों की विस्तृत जांच कर रहा है।
आपातकालीन प्रोटोकॉल के बीच, इंडिगो के इस विमान (6E 579) ने पूर्वाह्न 10 बजकर 54 मिनट पर आईजीआई एयरपोर्ट के रनवे 28 पर सुरक्षित लैंडिंग की। लैंडिंग के वक्त रनवे पर दमकल की गाड़ियां और एम्बुलेंस तैनात थीं, ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से निबटा जा सके।
प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, फ्लाइट में तकनीकी फाल्ट की की वजह से कॉल हुई थी। सभी एजेंसियों को अलर्ट पर रखा गया था। इंडिगो की तकनीकी टीम अब विमान की सघन जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि खराबी कितनी गंभीर थी।
विमानन क्षेत्र पर आई थी गंभीर रिपोर्ट
यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब हाल ही में संसद की स्थायी समिति की रिपोर्ट ने भारतीय आसमान में उड़ रहे विमानों की सुरक्षा को लेकर एक डरावनी तस्वीर पेश की है। रिपोर्ट के अनुसार जनवरी, 2025 से फरवरी, 2026 के बीच कुल 754 विमानों का ऑडिट किया गया, जिनमें से 377 विमान ऐसे पाए गए, जिनमें लगातार तकनीकी खामियां आ रही थीं। संसद की स्थायी समिति की हालिया ऑडिट रिपोर्ट के आंकड़े बताते हैं कि आज की यह इमरजेंसी लैंडिंग महज एक इत्तेफाक नहीं बल्कि एक बड़े संकट का हिस्सा हो सकती है।
संसद की स्थायी समिति की ऑडिट रिपोर्ट के जनवरी, 2025 से फरवरी 2026 के बीच ऑडिट किए गए 754 कमर्शियल विमानों में से 377 (करीब 50%) में लगातार तकनीकी खामियां पाई गई हैं। आज की घटना ने समिति की उस चेतावनी को सच साबित कर दिया है, जिसमें कहा गया था कि भारत के आधे कमर्शियल बेड़े में तकनीकी गड़बड़ी है और नागरिक उड्डयन क्षेत्र को ‘फंडामेंटल रीसेट’ की जरूरत है।
