पान मसाला के शौकिनों को झटका! 88% टैक्स, सेस से सरकार को मिलेगा ₹14,000 करोड़
नई दिल्ली, 2 फरवरी। सरकार ने पान मसाला पर टैक्स वसूलने के पुराने तरीके को बदलकर अब इसे सीधे उत्पादन क्षमता से जोड़ दिया है। नए नियमों के मुताबिक, कंपनियों को अब अपनी मशीनों की संख्या और उनकी क्षमता के अनुसार टैक्स देना होगा। इस बदलाव के बाद पान मसाला पर कुल टैक्स 88 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बना रहेगा। वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान सरकार को इस मद से करीब 14,000 करोड़ रुपये की मोटी कमाई होने की उम्मीद है, जबकि चालू वर्ष के अंतिम दो महीनों में ही 2,330 करोड़ रुपये खजाने में आने का अनुमान है।
सुरक्षा और सेहत के लिए बनेगा ‘स्पेशल फंड’
इस नए टैक्स (सेस) से होने वाली कमाई को सरकार एक खास मकसद के लिए इस्तेमाल करेगी। वित्त मंत्री के अनुसार, इस धन का उपयोग राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य से जुड़ी परियोजनाओं को चलाने के लिए किया जाएगा। यह पैसा राज्यों के साथ भी साझा किया जाएगा ताकि जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों और अन्य चिकित्सा गतिविधियों को गति दी जा सके। इसका उद्देश्य देश की सुरक्षा और नागरिकों की सेहत के लिए संसाधनों का एक स्थायी स्रोत बनाना है।
GST परिषद ने सितंबर 2025 में एक दूरगामी निर्णय लिया था, जिसके तहत राज्यों को होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए लिया गया पुराना कर्ज 31 जनवरी 2026 तक चुका दिया गया है। करीब 2.69 लाख करोड़ रुपये का यह कर्ज खत्म होने के साथ ही ‘मुआवजा उपकर’ की जगह अब इस नए ‘स्वास्थ्य और राष्ट्रीय सुरक्षा उपकर’ ने ले ली है। अब यह पैसा राज्यों के घाटे को भरने के बजाय सीधे तौर पर जनहित और रक्षा कार्यों में लगाया जाएगा।
सख्त निगरानी में होगा पान मसाला उत्पादन
टैक्स चोरी को रोकने के लिए सरकार ने विनिर्माण प्रक्रिया पर शिकंजा कस दिया है। अब कंपनियों के लिए मशीनों की उत्पादन क्षमता का सही ब्योरा देना अनिवार्य होगा। दिसंबर 2025 में संसद की मंजूरी मिलने के बाद से ही इस पारदर्शी व्यवस्था की नींव रखी गई थी। इससे न केवल राजस्व में बढ़ोतरी होगी, बल्कि तंबाकू उत्पादों पर लगने वाली एक्साइज ड्यूटी के साथ मिलकर यह नया ढांचा ‘सिन गुड्स’ (हानिकारक उत्पादों) के व्यापार पर कड़ी नजर रखने में मदद करेगा।
