दिल्ली सरकार का ‘विंटर एक्शन प्लान’ तैयार : 1 नवम्बर से लागू होंगी 5 बड़ी पाबंदियां, नियम तोड़ने पर चालान

नई दिल्ली, 21 अक्टूबर। सर्दियों की शुरुआत के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में हवा की गुणवत्ता में तेजी से गिरावट से निबटने के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 2026-27 के लिए दिल्ली सरकार के 10 प्वॉइंट विंटर एक्शन प्लान की घोषणा कर दी।

दरअसल, दशहरे के साथ ही दिल्ली-NCR की हवा में जहर घुलने लगा है। AQI ‘खराब श्रेणी’ में पहुंचने के बाद बुधवार को 244 दर्ज किया गया। वहीं वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) ने प्रदूषण रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से GRAP-1 लागू कर दिया। इसी क्रम में एक नवम्बर से गाड़ियों, पार्किंग, दफ्तरों और निर्माण कार्यों से संबंधित पांच बड़ी पाबंदियां लागू होंगी। इन नियमों को तोड़ने वालों का चालान किया जाएगा।

28 फरवरी तक लागू रहेंगी पाबंदिया

सरकार ने जो प्लान तैयार किया है, उसमें गाड़ियों के लिए कड़े नियम, वर्क-फ्रॉम-होम की व्यवस्था, कंस्ट्रक्शन पर रोक और सड़क की धूल और इंडस्ट्रियल एमिशन को कंट्रोल करने के उपाय शामिल हैं। ये पाबंदियां 28 फरवरी तक लागू रहेंगी। यह प्लान केंद्र, कमीशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM), सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड (CPCB), दिल्ली पुलिस, दिल्ली मेट्रो रेल कॉर्पोरेशन (DMRC), लोकल बॉडी और दूसरी एजेंसियों के साथ मिलकर लागू किया जाएगा।

एक नवम्बर से इन पांच चीजों पर पड़ेगा असर

  1. दूसरे राज्यों की पुरानी गाड़ियों की एंट्री पर रोक

दिल्ली सरकार के विंटर एक्शन प्लान के मुताबिक, एक नवम्बर से 31 जनवरी तक दिल्ली के बाहर रजिस्टर हुईं BS-VI से नीचे के उत्सर्जन मानक वाली पेट्रोल और डीजल गाड़ियां राजधानी में प्रवेश नहीं कर सकेंगीं। हालांकि, CNG और इलेक्ट्रिक वाहनों को छूट दी गई है। दूसरे राज्यों से दिल्ली आने वाले वाहन चालकों को यात्रा से पहले अपने वाहन का उत्सर्जन मानक जांच लेना चाहिए।

  1. बिना PUC के नहीं मिलेगा ईंधन

दिल्ली में वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) के बिना वाहनों को ईंधन नहीं देने का नियम लागू है। यानी जिन वाहन चालकों के पास वैध PUC नहीं है, उन्हें पेट्रोल पंप पर परेशानी हो सकती है। वाहन चालकों को सलाह है कि वे अपने प्रमाणपत्र की वैधता पहले ही जांच लें। यह नियम एक नवम्बर से पहली बार लागू नहीं हो रहा है बल्कि दिल्ली में एक अक्टूबर से ही इसके लिए अभियान शुरू किया गया था।

  1. सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी वर्क फ्रॉम होम

प्रदूषण और ट्रैफिक का दबाव कम करने के लिए सरकार ने सरकारी और निजी दफ्तरों में 50 फीसदी कर्मचारियों के घर से काम करने की व्यवस्था का एलान किया है। इसके साथ ही कार्यालयों के समय में भी बदलाव होगा। दिल्ली नगर निगम (MCD) के दफ्तर पूर्वाह्न 8.30 बजे से शाम पांच बजे तक चलेंगे, जबकि दिल्ली सरकार के कार्यालय पूर्वाह्न 10 बजे से शाम 6.30 बजे तक संचालित होंगे। इन उपायों का उद्देश्य एक ही समय में सड़कों पर वाहनों की भीड़ कम करना है।

  1. पार्किंग शुल्क होगा दोगुना

निजी वाहनों के इस्तेमाल को कम करने के लिए वैध पार्किंग स्पॉट पर फीस दोगुना करने की घोषणा की गई है। यह व्यवस्था एक नवम्बर से 28 फरवरी तक लागू रहेगी। हालांकि, दिल्ली मेट्रो की पार्किंग सुविधाओं को इससे छूट दी गई है। सरकार को उम्मीद है कि इससे लोग पब्लिक ट्रांसपोर्ट का अधिक इस्तेमाल करेंगे।

  1. निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर पाबंदी

प्रदूषण फैलाने वाली धूल को नियंत्रित करने के लिए एक नवम्बर से 31 जनवरी तक धूल पैदा करने वाली तोड़फोड़ और खुले में होने वाले सिविल निर्माण कार्यों पर रोक लगाने की घोषणा की गई है। इसके बाद 10 दिसम्बर से 20 जनवरी तक निर्माण और तोड़फोड़ की गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की योजना है। इन नियमों के लागू होने से निर्माण स्थलों, ठेकेदारों और भवन निर्माण कराने वाले लोगों को काम की योजना बनाते समय सरकारी निर्देशों का ध्यान रखना होगा।

GRAP-1 लागू होने के बाद ये उपाय तेज किए जाएंगे

इस बीच GRAP-1 के तहत संबंधित एजेंसियों को सड़कों की मशीनों से सफाई, पानी का छिड़काव और धूल नियंत्रण के उपाय तेज करने होंगे। निर्माण स्थलों पर प्रदूषण संबंधी नियमों का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। खुले में कचरा जलाने पर रोक और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की जांच भी तेज की जाएगी। होटल, रेस्तरां और खुले भोजनालयों में तंदूर के लिए कोयले या लकड़ी के इस्तेमाल पर रोक रहेगी। डीजल जेनरेटर का इस्तेमाल भी केवल आवश्यक या आपातकालीन परिस्थितियों में निर्धारित नियमों के अनुसार किया जा सकेगा।

30 एजेंसियां मिलकर करेंगी प्रदूषण पर नियंत्रण

दिल्ली के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा के अनुसार सरकार प्रदूषण नियंत्रण के लिए 11 सूत्रीय योजना पर काम कर रही है, जिसमें करीब 30 एजेंसियां शामिल हैं। सरकार का लक्ष्य सड़क की धूल कम करना, इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना और प्रदूषण फैलाने वाले ईंधन पर निर्भर उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से कम करना है। इसके अलावा वायु गुणवत्ता की निगरानी करने वाले केंद्रों की संख्या 47 से बढ़ाकर 60 करने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के लिए 334 प्रवर्तन टीमें तैनात करने की योजना है।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular