प्रयागराज, 14 अक्टूबर। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव को लेकर बुधवार को अहम आदेश दिया है। इस क्रम में कोर्ट ने तीन माह के भीतर यूपी पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बने रहने की बात कही गई है। इस आदेश के बाद प्रदेश में पंचायत चुनाव की तैयारियों और समयसीमा को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
जस्टिस अजीत कुमार और जस्टिस गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने करीब तीन घंटे तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया। हाई कोर्ट के निर्देशानुसार, पंचायत चुनाव की प्रक्रिया को तीन माह के भीतर पूरा कराने की बात कही गई है। यह आदेश ग्राम पंचायतों में निर्वाचित प्रतिनिधियों का कार्यकाल समाप्त होने और आगे की प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
निवर्तमान ग्राम प्रधानों की भूमिका पर भी निर्देश
उच्च न्यायालय ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखने की बात भी कही है। इससे चुनाव होने तक ग्राम पंचायतों के प्रशासनिक कामकाज को जारी रखने की व्यवस्था प्रभावित होगी। हालांकि, प्रशासक के तौर पर उनकी शक्तियों और जिम्मेदारियों का सटीक दायरा आधिकारिक आदेश के विस्तृत ब्योरा आने के बाद ही स्पष्ट होगा।
इसी क्रम में कोर्ट ने उन याचिकाओं को खारिज कर दिया है, जिसमें निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले को अवैध बताया गया था। इसका मतलब है कि अगले तीन माह तक पंचायतों का कामकाज प्रशासकों के माध्यम से जारी रह सकता है।
चुनाव की तैयारियों पर रहेगी नजर
हाई कोर्ट के आदेश के बाद अब राज्य सरकार और संबंधित प्रशासनिक विभागों की ओर से पंचायत चुनाव की तैयारियों को लेकर उठाए जाने वाले कदम अहम होंगे। चुनाव की तारीखों, अधिसूचना और अन्य प्रक्रियाओं से संबंधित आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। पहले ये कयास लगाए जा रहे थे कि विधानसभा चुनाव के बाद पंचायत चुनाव होगा।
सरकार के आदेश को कोर्ट ने बताया वैध
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया है कि प्रशासकों की नियुक्ति को लेकर यूपी सरकार की ओर से जारी शासनादेश पूरी तरह वैध है। अदालत ने सरकार को निर्देश दिया कि पंचायत निकायों के चुनाव निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरे कराए जाएं। इस फैसले से पंचायत चुनाव की तैयारी और समयसीमा को लेकर स्थिति स्पष्ट होने की उम्मीद है। अदालत ने प्रशासकों को चुनाव समाप्त होने तक कामकाज जारी रखने की व्यवस्था भी बरकरार रखी है।
OBC आयोग की प्रक्रिया से अलग होगी चुनाव की तैयारी?
हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) आयोग अपना काम बिना किसी बाधा के जारी रखेगा। लेकिन पंचायत चुनाव कराने की प्रक्रिया आयोग की कार्यवाही पूरी होने पर निर्भर नहीं रहेगी। यानी आयोग की प्रक्रिया के कारण चुनाव को अनिश्चितकाल तक टाला नहीं जा सकेगा। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि पंचायत चुनाव मौजूदा नियमों और व्यवस्था के तहत कराए जाएंगे।
चुनाव प्रक्रिया में 27 प्रतिशत आरक्षण के प्रावधान का पालन करना होगा। इस फैसले के बाद अब राज्य सरकार के सामने तीन माह के भीतर पंचायत चुनाव कराने की समयसीमा पूरी करने की जिम्मेदारी होगी। हालांकि, चुनाव की तारीखों और मतदान के शेड्यूल को लेकर सरकार की ओर से जारी होने वाली आधिकारिक अधिसूचना महत्वपूर्ण होगी।


