नई दिल्ली, चार अक्टूबर। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) एक हफ्ते के भीतर नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 पेपर लीक मामले की दूसरी चार्जशीट दाखिल करेगी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार जांच एजेंसी ने इस मामले में 13 अन्य लोगों की भूमिका तय कर ली है। हालांकि इसमें किसी भी केंद्रीय सरकारी अधिकारी या नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अधिकारियों को संलिप्त नहीं पाया गया है।
चार्जशीट में कौन-कौन शामिल?
इस दूसरी चार्जशीट में जिन 13 लोगों के नाम शामिल हैं, उनमें एनटीए द्वारा नियुक्त विषय विशेषज्ञ (subject experts), कोचिंग सेंटर संचालक, बिचौलिए और कुछ उम्मीदवार शामिल हैं। मीडिया से बातचीत में जांच अधिकारी ने कहा, ‘एजेंसी अपनी अंतिम चार्जशीट में एनटीए पदाधिकारियों सहित किसी भी सरकारी अधिकारी को आरोपित नहीं बनाएगी। लीक से जुड़ी परिस्थितियों की जांच में निजी व्यक्तियों के अलावा किसी अन्य की भूमिका साबित नहीं हुई है।’
इससे पहले इस मामले में पहली चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई थी, जिसमें 13 आरोपितों के नाम थे। इनमें एनटीए द्वारा नियुक्त तीन विषय विशेषज्ञ — मनीषा गुरुनाथ मनधरे (बॉटनी और जूलॉजी), प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी (केमिस्ट्री) और मनीषा संजय हवलदार (फिजिक्स) शामिल थे। इसके अलावा शिवराज रघुनाथ मोटेगांवकर, डॉ. मनोज शिरुरे, तेजस हर्षद शाह, शुभम मधुकर खैरनार, धनंजय लोखंडे, यश यादव, मांगीलाल बिव्वाल, दिनेश बिव्वाल और विकास बिव्वाल भी इसमें नामजद थे।
फोरेंसिक रिपोर्ट्स के आधार पर काररवाई
सीबीआई ने पहले यह साफ किया था कि केंद्रीय फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला (CFSL), सरकारी दस्तावेज़ परीक्षक (GEQD) और दिल्ली विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों की एडवाइजरी रिपोर्ट आने के बाद “अन्य साजिशकर्ताओं” की भूमिका की जांच खुली रखी गई थी।
जांच एजेंसी ने इसके बाद कोचिंग सेंटरों के माध्यम से पेपर लीक का लाभ उठाने वाले तीन और लोगों को गिरफ्तार किया है। एक अधिकारी के अनुसार, ‘इन तीनों व्यक्तियों की भूमिका और फोरेंसिक विशेषज्ञों के निष्कर्षों को अंतिम चार्जशीट में विस्तार से बताया जाएगा, जिसे हम एक सप्ताह के भीतर दाखिल करेंगे। यह पता लगाने के लिए गहन जांच की गई थी कि क्या लीक में कोई एनटीए या अन्य सरकारी अधिकारी शामिल था, लेकिन ऐसी कोई संलिप्तता नहीं पाई गई।’
व्यापक विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक उथल-पुथल
इस पेपर लीक की घटना के बाद देश भर में भारी विरोध प्रदर्शन हुए थे। साल की शुरुआत में ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में ये प्रदर्शन शुरू हुए थे। जून और जुलाई 2026 के दौरान विरोध प्रदर्शन और तेज हो गए, जिसके चलते ‘संसद चलो’ मार्च निकाले गए और पुलिस कार्रवाई भी देखने को मिली। जनता के भारी दबाव और जवाबदेही की मांग के बीच, तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई, 2026 को इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद प्रह्लाद जोशी को यह जिम्मेदारी सौंपी गई।
एनटीए में बड़े बदलाव
हाल के महीनों में सरकार ने एनटीए में बड़े बदलावों की घोषणा की। केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने 17 अगस्त को एनटीए के 50 कर्मचारियों को हटा दिया। इसके बाद एनटीए ने कहा कि उसकी परीक्षा टीम का पुनर्गठन कर दिया गया है, जिसके तहत 600 विषय विशेषज्ञों को हटाकर नए विशेषज्ञों को लाया गया है और चार-स्तरीय प्रश्न-पत्र जांच प्रणाली की शुरुआत की गई है।


