सीएम योगी का शिक्षकों को संदेश- समाज को बांटने वालों को सफल न होने दें, देश को चाहिए ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’

लखनऊ, 4 अक्टूबर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को कहा कि समाज को बांटने वाली ताकतों को सफल होने से रोकने में शिक्षकों की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी है। मुख्यमंत्री ने लखनऊ के आशियाना स्थित राम मनोहर लोहिया विधि विश्वविद्यालय में अखिल विश्व गायत्री परिवार द्वारा आयोजित प्रांतीय शिक्षक गरिमा सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा कि देश को जाति आधारित गुटों में बंटे और आपस में लड़ने वाले भारत की नहीं, बल्कि ”एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की जरूरत है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि समाज को बांटने वाली ताकतों को सफल होने से रोकने में शिक्षकों की अहम भूमिका है। योगी ने कहा कि गुलामी के दौर में जहां एक वर्ग ने समाज को बांटने की कोशिश की थी, वहीं दूसरे वर्ग ने लोगों को एकजुट करने और आजादी की आवाज बुलंद करने का काम किया था। उन्होंने कहा, ”आज भी वही प्रवृत्ति अलग-अलग रूपों में दिखाई देती है।” उन्होंने शिक्षकों से अपील की कि वे समाज को बांटने की कोशिश करने वाली ताकतों को सफल न होने दें।

मुख्यमंत्री ने आध्यात्मिक माहौल में गायत्री परिवार की स्थापना करने वाले पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य को याद करते हुए कहा, ”याद रखना, इस सृष्टि का पहला मंत्र गायत्री मंत्र है… महर्षि विश्वामित्र द्वारा रचित यह मंत्र परमपिता परमेश्वर के तेज से जुड़ने का आह्वान करता है।” उन्होंने कहा, ”इस पवित्र मंत्र की शक्ति का अहसास जिसने भी इसे अंगीकार किया, उसका कल्याण हो गया।” उन्होंने गायत्री परिवार का जिक्र करते हुए कहा कि पंडित श्रीराम शर्मा चाहते तो इसका नाम ‘श्रीराम शर्मा संगठन’ रख सकते थे, लेकिन उन्होंने इसे ”गायत्री परिवार” नाम दिया क्योंकि व्यक्ति से बड़ा परिवार (समूह) होता है।

मुख्यमंत्री ने बिना किसी का नाम लिए व्यक्तिवादी राजनीतिक संगठनों पर तंज कसते हुए कहा, ”जब कोई संगठन किसी व्यक्ति के नाम पर चलता है तो कुछ वर्षों बाद स्वयं धराशायी हो जाता है। संगठन विचार के नाम पर चलता है और लंबी दूरी तय करता है।” योगी ने कहा, ”पंडित श्रीराम शर्मा आचार्य उन महापुरुषों में से हैं, जिन्होंने धर्म को विज्ञान से जोड़ा।” मुख्यमंत्री ने पर्यावरण की रक्षा पर जोर देते हुए कहा, ”जीवनदायिनी नदियां नहीं रहेंगी तो जीव-सृष्टि के सामने संकट खड़ा हो जाएगा। हमें इनको बचाना पड़ेगा, इन्हें अविरल और निर्मल बनाना पड़ेगा।”

आदित्यनाथ ने कहा कि गायत्री परिवार ने पिछले 100 वर्षों में यज्ञ की वेदी के माध्यम से समाज की चेतना को जागृत करने में बड़ी भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि लोगों को गुलामी की मानसिकता छोड़ने, अपनी विरासत पर गर्व करने, सामाजिक समानता को बढ़ावा देने और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में काम करने का संकल्प लेना चाहिए क्योंकि देश 2047 में आजादी की शताब्दी की ओर बढ़ रहा है। उन्होंने कहा, ”अगर हर व्यक्ति अधिकारों से ज्यादा कर्तव्यों को महत्व दे, तो दुनिया की कोई भी ताकत भारत को चुनौती देने की हिम्मत नहीं कर सकती।”

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