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पर्सनल लॉ बोर्ड ने वंदे मातरम् पर सरकार के आदेश को बताया असंवैधानिक, न्यायालय जाने की दी चेतावनी

पर्सनल लॉ बोर्ड ने वंदे मातरम् पर सरकार के आदेश को बताया असंवैधानिक, न्यायालय जाने की दी चेतावनी

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नई दिल्ली, 12 फरवरी। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम् के सभी छह अंतरों को गाए जाने संबंधी सरकार के आदेश को ‘असंवैधानिक’ करार देते हुए गुरवार को चेतावनी दी कि यदि सरकार ने यह आदेश वापस नहीं लिया तो वह न्यायालय का रुख करेगा।

उल्लेखनीय है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया है कि जब भी राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ एक साथ गाए या बजाए जाएं तो बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा लिखे गए राष्ट्रगीत के सभी छह छंद पहले गाए जाएं।

आदेश में मंत्रालय ने पहली बार राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ के गायन को लेकर प्रोटोकॉल तय किए हैं, जिसके तहत राष्ट्रपति के आगमन, तिरंगा फहराए जाने और राज्यपालों के भाषण जैसे आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सभी छह छंद (कुल अवधि तीन मिनट 10 सेकेंड) गाए जाएंगे। इस बाबत 28 जनवरी को अधिसूचना जारी की गई थी।

यह फैसला ‘असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध’ – AIMPLB

मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्र सरकार के इस आदेश पर एतराज जताया और इस फैसले को ‘असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता के विरुद्ध’ बताया। बोर्ड के महासचिव मौलाना मोहम्मद फजलुर रहीम मुजद्दिदी ने यह आदेश असंवैधानिक, धार्मिक स्वतंत्रता और धर्मनिरपेक्ष मूल्यों के खिलाफ, उच्चतम न्यायालय के फैसले के विपरीत और मुसलमानों की धार्मिक मान्यताओं से सीधा टकराव है।

उन्होंने कहा कि इसलिए यह फैसला मुसलमानों के लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है। मुजद्दिदी के अनुसार रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह और संविधान सभा में हुई चर्चा के बाद यह तय हुआ था कि वंदे मातरम् के केवल पहले दो अंतरों का ही उपयोग किया जाएगा।

मुसलमान इसे स्वीकार नहीं कर सकते, यह उनकी धार्मिक मान्यता के साथ सीधा टकराव

मुजद्दिदी ने कहा कि एक धर्मनिरपेक्ष देश में एक धर्म की मान्यताओं या शिक्षाओं को जबरन दूसरे धर्मों के मानने वालों पर थोप नहीं जा सकती। बोर्ड के महासचिव ने कहा कि यह गीत बंगाल की पृष्ठभूमि में लिखा गया था और इसमें दुर्गा व अन्य देवताओं की पूजा और वंदना का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल चुनावों से पहले केंद्र के इस फैसले के पीछे चाहे जो भी राजनीतिक कारण हो, मुसलमान इसे स्वीकार नहीं कर सकते क्योंकि यह उनकी धार्मिक मान्यता के साथ सीधा टकराव है।

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