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दिल्ली : विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन

दिल्ली : विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन

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नई दिल्ली, 29 जनवरी। राष्ट्रपति भवन के ठीक सामने विजय चौक पर गुरुवार की शाम भारतीय धुनों और देशभक्ति के संगीत से सराबोर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के साथ 77वें गणतंत्र दिवस समारोह का भव्य समापन हो गया।

इस अवसर पर सैन्य बैंडों ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की शक्ति को संगीत के माध्यम से दर्शाया, वहीं ड्यूटी पर तैनात भारतीय सेना के जवानों की झलक भी प्रस्तुत की गई। सेरेमनी में भारतीय सेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंडों ने देशभक्ति से ओत-प्रोत धुनों से माहौल को भावनाओं से भर दिया।

भारतीय वाद्य यंत्रों के नाम पर रखे गए दर्शक दीर्घा के सेक्टर

इस वर्ष समारोह की एक खास विशेषता यह रही कि विजय चौक पर दर्शकों के बैठने के सभी स्थानों को भारतीय संगीत वाद्य यंत्रों के नाम दिए गए थे। इनमें बांसुरी, तबला, सितार, वीणा, शहनाई, मृदंगम, सरोद और संतूर शामिल रहे।

राष्ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी सहित अनेक विशिष्ट अतिथियों की रही उपस्थिति

समारोह में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उपस्थित रहे। इनके अलावा उप राष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, तीनों सेनाओं के प्रमुख, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, वरिष्ठ अधिकारी और बड़ी संख्या में आम नागरिक मौजूद रहे। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के विजय चौक पहुंचने पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका स्वागत किया।

राष्ट्रगान के साथ हुआ राष्ट्रपति का पारंपरिक स्वागत

राष्ट्रगान की धुन के बीच राष्ट्रपति के आगमन पर उन्हें राष्ट्रपति अंगरक्षक दल द्वारा पारंपरिक शाही वैभव के साथ एस्कॉर्ट किया गया। यह आगमन गणतंत्र दिवस समारोहों के गरिमामय समापन का प्रतीक रहा, जो भारत की समृद्ध सैन्य परंपराओं और संवैधानिक मूल्यों को दर्शाता है।

कदम कदम बढ़ाए जा’ से हुई कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत मास्ड बैंड की प्रसिद्ध धुन ‘कदम कदम बढ़ाए जा’ से हुई। इसके बाद पाइप्स एंड ड्रम्स बैंड ने ‘अतुल्य भारत’, ‘वीर सैनिक’, ‘मिली-जुली’, ‘नृत्य सरिता’, ‘मरूनी’ और ‘झेलम’ जैसी आकर्षक धुनें प्रस्तुत कीं।

सीएपीएफ और वायुसेना बैंड ने बढ़ाया जोश

केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के बैंड ने ‘विजय भारत’, ‘हथरोही’, ‘जय हो’ और ‘वीर सिपाही’ की धुनों से दर्शकों में जोश भर दिया। वहीं भारतीय वायुसेना के बैंड ने ‘ब्रेव वॉरियर’, ‘ट्वाइलाइट’, ‘अलर्ट’ और ‘फ्लाइंग स्टार’ जैसी प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं।

नौसेना और थल सेना की प्रस्तुतियों ने बांधा समां

भारतीय नौसेना के बैंड ने ‘नमस्ते’, ‘सागर पवन’, ‘मातृभूमि’, ‘तेजस्वी’ और ‘जय भारती’ जैसी देशभक्ति से भरपूर धुनें बजाईं। वहीं भारतीय थल सेना के बैंड ने ‘विजयी भारत’, ‘आरंभ है प्रचंड है’, ‘ऐ वतन, ऐ वतन’, ‘आनंद मठ’, ‘सुगम्य भारत’ और ‘सितारे हिंद’ जैसी प्रेरणादायी धुनों से समां बांध दिया।

सारे जहां से अच्छा’ के साथ हुआ समारोह का समापन

अंत में मास्ड बैंड ने ‘भारत की शान’, ‘वंदे मातरम्’ और ‘ड्रमर्स कॉल’ प्रस्तुत की। वंदे मातरम् की धुन ने पूरे माहौल को देशभक्ति की भावना से सराबोर कर दिया। समारोह का समापन परंपरागत रूप से बेहद लोकप्रिय धुन ‘सारे जहां से अच्छा’ के साथ हुआ, जिसे बगलर्स ने बजाया। इस पूरे कार्यक्रम के मुख्य कंडक्टर स्क्वाड्रन लीडर लैमापोकपम रूपचंद्र सिंह रहे। थल सेना, नौसेना, वायुसेना और केंद्रीय बलों के अलग-अलग कंडक्टरों ने अपनी-अपनी टुकड़ियों का नेतृत्व किया।

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