उद्धव ठाकरे बोले- ‘अजित पवार ने राजनीति में अलग राह चुनी, लेकिन हमारे रिश्ते को टूटने नहीं दिया’
मुंबई, 28 जनवरी। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री व शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने बुधवार को एक विमान हादसे में राज्य के उप मुख्यमंत्री अजित पवार की मौत पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि NCP प्रमुख ने भले ही राजनीति में अलग रास्ता चुन लिया था, लेकिन उन्होंने आपसी रिश्तों को कभी खराब नहीं होने दिया।
उद्धव ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि पवार की मौत से उन्होंने एक दृढ़ नेता और उत्कृष्ट पूर्व कैबिनेट सहयोगी खो दिया है। वित्त मंत्री के रूप में पवार एक बेहद अनुशासित नेता थे, जिनकी अपने विभाग पर मजबूत पकड़ थी।
एक खंबीर नेता व माझ्या मंत्रिमंडळातील मी उमदा सहकारी गमावला!
मी मुख्यमंत्री असताना अजित पवार हे उपमुख्यमंत्री, अर्थमंत्री होते. अत्यंत शिस्तप्रिय, आपल्या खात्यावर वचक व अर्थ विभागाचा अभ्यास असणारे ते नेते होते. एक उत्तम सहकारी म्हणून त्यांचे माझे विशेष नाते जमले. अजित पवार हे…
— Office of Uddhav Thackeray (@OfficeofUT) January 28, 2026
एमवीए सरकार में सीएम उद्धव के नायब रहे थे अजित पवार
उल्लेखनीय है कि अजित पवार ने महाराष्ट्र में 2019 से 2022 तक उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली तत्कालीन महा विकास आघाडी (MVA) सरकार में उप मुख्यमंत्री के रूप में सेवाएं दी थीं। हालांकि, वह 2023 में एमवीए से अलग हो गए थे और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा)-नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में शामिल हो गए थे, जिससे राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) दो हिस्सों में बंट गई थी।
उद्धव ठाकरे ने कहा, ‘सहयोगी होने के नाते हमारे बीच एक खास रिश्ता बन गया था। अजित पवार खुले दिल के थे। वह बेबाक राय रखते थे। वह किसी से लंबे समय तक बैर नहीं रखते थे। अजित पवार ने भले ही राजनीति में अलग राह चुनी, लेकिन उन्होंने हमारे रिश्ते को टूटने नहीं दिया।’
अजित पवार पार्टी कार्यकर्ताओं को महत्व देते थे और वाकई में ‘दादा’ थे
उद्धव ने ठाकरे परिवार और शिवसेना (उबाठा) की ओर से अजित पवार को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि अजित पवार एक ऐसे नेता के रूप में जाने जाते थे, जो अपने पार्टी कार्यकर्ताओं को महत्व देते थे और वह वास्तव में एक ‘दादा’ थे।
मेरे पास अपनी भावनाएं जाहिर करने के लिए शब्द नहीं – आदित्य ठाकरे
उद्धव के बेटे और महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री आदित्य ठाकरे ने पवार की मौत को स्तब्ध करने वाली घटना बताया। उन्होंने कहा, ‘मेरे पास अपनी भावनाएं जाहिर करने के लिए शब्द नहीं हैं। मुझे अजित पवार के साथ पांच-छह साल काम करने का मौका मिला, पहले सरकार में और फिर विपक्ष में। विधायी मामलों पर उनकी मजबूत पकड़ और उनके स्नेही स्वभाव ने मेरे जैसे कई लोगों का दिल जीत लिया। विपक्ष में रहते हुए भी मैंने सार्वजनिक रूप से कई बार यह बात कही थी।’
