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यूपी पुलिस की कार्यशैली में बदलाव : घर बैठे FIR और 27 सेवाएं बिना थाने जाए प्राप्त कर रहे नागरिक, यूपी कॉप एप बना सारथी

यूपी पुलिस की कार्यशैली में बदलाव : घर बैठे FIR और 27 सेवाएं बिना थाने जाए प्राप्त कर रहे नागरिक, यूपी कॉप एप बना सारथी

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लखनऊ, 12 जनवरी। उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के कार्यकाल में पुलिसिंग का तरीका तेजी से बदला है। तकनीक को आधार बनाकर शुरू की गई स्मार्ट पुलिसिंग के तहत यूपी पुलिस का यूपीकॉप ऐप और सिटीजन पोटर्ल अब आमजन के लिए थाने का डिजिटल विकल्प बनकर उभर रहा है। ऐप के जरिए नागरिक घर बैठे एफआईआर दर्ज कराने से लेकर 27 तरह की पुलिस सेवाएं बिना थाने जाए प्राप्त कर रहे हैं, जिससे लोगों को बार-बार थाने के चक्कर लगाने से बड़ी राहत मिली है।

  • ‘सीएम योगी के निर्देश पर पुलिसिंग को टेक्नोलॉजी से जोड़ा’

पुलिस महानिदेशक (DGP) राजीव कृष्ण ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर पुलिसिंग को जनकेंद्रित, पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए टेक्नोलॉजी को प्रभावी तरीके से जोड़ा गया। इसका ही नतीजा है कि यूपीकॉप ऐप आज ‘डिजिटल पुलिस स्टेशन’ के रूप में काम कर रहा है। उन्होंने कहा कि ऐप के आने से न केवल सेवाएं आसान हुईं, बल्कि निस्तारण में लगने वाला समय भी काफी घटा है।

  • नागरिकों को मिल रही ये सुविधाएं

डीजीपी के अनुसार, यूपीकॉप ऐप पर ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करना, एफआईआर कॉपी डाउनलोड करना, खोये सामान की रिपोर्ट लिखाना, चरित्र सत्यापन, किरायेदार सत्यापन, घरेलू सहायक सत्यापन और कर्मचारी सत्यापन जैसी अहम सुविधाएं उपलब्ध हैं। अब तक 50 लाख से अधिक लोगों ने इस ऐप को डाउनलोड किया है। वहीं ऐप के जरिए 2.1 करोड़ से ज्यादा एफआईआर की कॉपी डाउनलोड की जा चुकी है और 7.3 लाख से अधिक लोग खोये सामान की ऑनलाइन रिपोर्ट दर्ज करा चुके हैं।

  • हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध ऐपः DGP

यूपीकॉप ऐप को अधिक सुविधाजनक बनाने के लिए इसमें रीयल टाइम नोटिफिकेशन जोड़ा गया है, जिससे आवेदन की स्थिति तुरंत पता चल जाती है। यह ऐप हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में उपलब्ध है। आपात स्थिति में मदद के लिए एसओएस बटन और लोकेशन ट्रैकिंग को अपग्रेड किया गया है। इसके अलावा मैप पर नजदीकी थाना देखने की सुविधा भी दी गई है, जो संकट के समय मददगार साबित हो रही है।

  • समय की हो रही बचतः DGP

डीजीपी ने बताया कि सत्यापन प्रक्रियाओं में समय की बड़ी बचत हुई है। चरित्र सत्यापन अब करीब 6 दिन में, किरायेदार सत्यापन लगभग 8 दिन में और कर्मचारी सत्यापन करीब 5 दिन में पूरा हो रहा है, जबकि पहले इन्हीं सेवाओं में कई गुना अधिक समय लगता था। राजीव कृष्ण ने कहा कि टेक्नोलॉजी आधारित सेवाओं से पुलिसिंग अधिक जवाबदेह हो रही है और नागरिकों को त्वरित न्याय व राहत देना ही स्मार्ट पुलिसिंग का उद्देश्य है।

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