लखनऊ, 3 अगस्त। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने श्रावण मास के अवसर पर अपनी मासिक अपील ‘योगी की पाती’ जारी करते हुए प्रदेशवासियों से सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और सामाजिक समरसता को जनआंदोलन का स्वरूप देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि श्रावण केवल धार्मिक आस्था का महीना नहीं, बल्कि प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, लोकमंगल और सामूहिक सहभागिता का भी संदेश देता है।
भगवान शिव का जीवन त्याग और लोककल्याण की प्रेरणा
मुख्यमंत्री ने कहा कि समुद्र मंथन के दौरान भगवान शिव द्वारा हलाहल विष का पान करना सृष्टि की रक्षा के लिए सर्वोच्च त्याग का प्रतीक है। शिव को जल अर्पित करने की परंपरा भी त्याग, कृतज्ञता और जनकल्याण की भावना का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि भगवान शिव का स्वरूप मानव और प्रकृति के सह-अस्तित्व की सीख देता है तथा श्रावण मास इसी भावना को आत्मसात करने का सर्वोत्तम अवसर है।
श्रावण समाज को जोड़ने और सेवा की भावना बढ़ाने का पर्व
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वर्षा ऋतु में धरती हरियाली से आच्छादित हो जाती है। ग्रामीण क्षेत्रों में धान की रोपाई के दौरान सामूहिक श्रम और सहयोग भारतीय संस्कृति की जीवंत परंपरा का परिचायक है। वहीं, शिवालयों में उमड़ने वाली श्रद्धालुओं की भीड़ सेवा, स्वच्छता और सामाजिक सहभागिता की भावना को मजबूत करती है।
जल संरक्षण समय की सबसे बड़ी जरूरत
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि पंचतत्वों में जल जीवन का मूल आधार है। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में लगभग 20 हजार अमृत सरोवर विकसित किए जा चुके हैं, जो जल संरक्षण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।उन्होंने लखनऊ की एक आवासीय सोसायटी का उदाहरण देते हुए बताया कि वहां प्रतिदिन हजारों लीटर वर्षा जल को रेन वाटर हार्वेस्टिंग के माध्यम से भूजल पुनर्भरण के लिए उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने इस पहल को समाज के लिए प्रेरणादायी और अनुकरणीय बताया।
हर बूंद जल और हर पौधे के संरक्षण का लें संकल्प
मुख्यमंत्री ने कहा कि जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक संसाधनों के बढ़ते दोहन के दौर में प्रकृति से जितना लिया जाए, उतना उसे लौटाने का संकल्प भी जरूरी है। उन्होंने प्रदेशवासियों से श्रावण मास को सेवा, स्वच्छता, जल संरक्षण, पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक सद्भाव का अभियान बनाने की अपील की।
उन्होंने हर नागरिक से प्रत्येक बूंद जल बचाने और अधिक से अधिक पौधे लगाने का संकल्प लेने का आग्रह किया। मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि जनसहभागिता, पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता और सामूहिक प्रयास ही समृद्ध, सुरक्षित और विकसित उत्तर प्रदेश की मजबूत आधारशिला बनेंगे।

