इंदौर, 2 जनवरी। देश के स्वच्छतम शहर का लगातार पुरस्कार जीतने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर शहर में प्रदूषित पेयजल से मरने वालों की संख्या लगातार बढ़ती संख्या को लेकर भाजपा की फायर ब्रांड नेता और पूर्व मुख्यमंत्री साध्वी उमा भारती अपनी ही राज्य सरकार पर बिफर पड़ीं और उन्होंने स्थानीय विधायक व कैबिनेट मंत्री कैलाश विजय वर्गीय एवं महापौर पुष्यमित्र भार्गव से इस्तीफे की मांग कर दी है।
दरअसल, शहर के भागीरथपुरा में दूषित पेयजल के कारण अब तक 14 लोगों की मौत हो चुकी है। वहीं कैलाश विजयवर्गीय और महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने आमजन की सहानुभूति हासिल करने के लिए जब यह बयान दिया कि अधिकारी सुनते ही नहीं हैं, तो यह दांव उनके लिए ही उल्टा पड़ गया। इसके बाद तो उमा भारती ने उनकी कलई खोल कर रख दी और उन्हें राजनीति का धर्म याद दिलाते हुए उनसे इस्तीफा मांग लिया। सोशल मीडिया पर भी पब्लिक जमकर घंटा बजा रही है।
महापौर ने खुद को मासूम और लाचार बताया
भागीरथपुरा कांड में सभी समस्याओं का तत्काल समाधान करने के लिए एसीएस (अपर मुख्य सचिव) संजय दुबे इंदौर पहुंचे तो इस बैठक में भी राजनीति कर दी गई। बैठक के बाद भार्गव ने मीडिया को बताया कि उन्होंने अपर मुख्य सचिव के सामने अपनी सारी भड़ास निकाल दी है। यहां तक कह दिया है कि आप मुख्यमंत्री जी को बता दो कि मैं ऐसे सिस्टम में काम नहीं कर सकता।’ कुल मिलाकर महापौर ने इस प्रकार से स्वयं को मासूम और लाचार बताने की कोशिश की ताकि जनता उनके प्रति सॉफ्ट हो जाए।
विजयवर्गीय भी अधिकारियों का रोना रो चुके हैं
वहीं इंदौर के सबसे पावरफुल नेता और मध्य प्रदेश सरकार के सबसे ताकतवर मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी अपने क्षेत्र के मामले को लेकर अक्सर अधिकारियों का रोना रो चुके हैं। हालांकि यह तो उनका अपना डिपार्टमेंट है। इसके बाद भी उन्होंने कहा कि अधिकारी उनकी नहीं सुनते।
उमा भारती बोलीं – ऐसे पापों का स्पष्टीकरण नहीं होता
इस मामले में जब अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करने के स्थान पर विजयवर्गीय व महापौर मिलकर कलेक्टर-कमिश्नर और अन्य अधिकारियों को जिम्मेदार बताने लगे तो पूर्व सीएम उमा भारती का पारा चढ़ गया, जो लंबे समय से मध्य प्रदेश के मामलों को लेकर चुप हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक के बाद एक लगातार तीन पोस्ट करते हुए विजयवर्गीय व महापौर को निशाने पर लिया और अंत में कहा कि ऐसे पापों का कोई प्रायश्चित नहीं होता। उन्होंने लिखा –
- इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं।
- जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?
- ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!
1. साल 2025 के अंत में इंदौर में गंदे पानी पीने से हुई मौतें हमारा प्रदेश, हमारी सरकार और हमारी पूरी व्यवस्था को शर्मिंदा और कलंकित कर गईं।
2. प्रदेश के सबसे स्वच्छ शहर का अवार्ड प्राप्त करने वाले नगर में इतनी बदसूरती, गंदगी, जहर मिला पानी जो कितनी जिंदगियों को निगल गया और…— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
1. इंदौर दूषित पानी के मामले में यह कौन कह रहा है कि हमारी चली नहीं।
2. जब आपकी नहीं चली तो आप पद पर बैठे हुए बिसलेरी का पानी क्यों पीते रहे? पद छोड़कर जनता के बीच क्यों नहीं पहुंचे?
3. ऐसे पापों का कोई स्पष्टीकरण नहीं होता या तो प्रायश्चित या दंड!— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
1. सिर्फ इंदौर के मेयर नहीं, मध्य प्रदेश का शासन एवं प्रशासन, इस महापाप के सभी जिम्मेवार लोग जनता के प्रति अपराध के कटघरे में खड़े हैं।
2. मेरी 'X' पर प्रतिक्रिया के बाद मीडिया के पत्रकार भाई बहनों से नहीं मिल पाने के लिए क्षमा मांगती हूं, अभी 3 दिन पहले मेरी दाईं आंख की सर्जरी…
— Uma Bharti (@umasribharti) January 2, 2026
सोशल मीडिया पर जनता भी लगातार घंटा बजा रही
साध्वी उमा के अलावा आम जनता ने भी इस मामले में महापौर पुष्यमित्र भार्गव और स्थानीय विधायक व मंत्री कैलाश विजयवर्गीय पब्लिक के सीधे निशाने पर ले लिया है। विजयवर्गीय ने सवालों को डॉमिनेट करने की कोशिश की थी। इसके बाद स्थिति और ज्यादा बिगड़ गई। कांग्रेस पार्टी और विपक्ष के दल ज्यादा कुछ नहीं कर पाए, लेकिन पब्लिक ने काफी तीखी प्रतिक्रिया दी है। यह सिलसिला लगातार जारी है।
सोशल मीडिया पर जनता लगातार घंटा बजा रही है। लोग महापौर भार्गव से पूछ रहे हैं कि अवार्ड लेते समय तो बड़े चौड़े हो जाते हो और आज जब जिम्मेदारी लेने की बात आई तो खुद को स्कूल के बच्चे की तरह मासूम बता रहे हो। यदि कुर्सी संभल नहीं रही तो इस्तीफा दे दीजिए। मुख्यमंत्री जी को बताने की क्या जरूरत है?

