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मेला प्रशासन और शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के बीच गहराया विवाद, मेला प्रशासन ने दी जमीन और सुविधाएं छीनने की चेतावनी

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प्रयागराज, 22 जनवरी। माघ मेले में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन के बीच विवाद गहराता जा रहा है। मौनी अमावस्या के दिन हुई घटना को लेकर प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को 48 घंटे के भीतर दूसरा नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में प्रशासन ने सीधे तौर पर उन्हें मेले से हमेशा के लिए प्रतिबंधित करने और उनकी संस्था को आवंटित जमीन व सुविधाएं रद्द करने की चेतावनी दी है।

प्रशासन का आरोप : ‘सुरक्षा घेरा तोड़ा, भगदड़ का खतरा पैदा किया’ मेला प्रशासन ने नोटिस में गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि मौनी अमावस्या के दिन स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने उन नियमों का उल्लंघन किया जो आम जनता की सुरक्षा के लिए बनाए गए थे।

बै़रियर तोड़ना : आरोप है कि उन्होंने इमरजेंसी के लिए रिजर्व पांटून पुल पर लगा बैरियर जबरन तोड़ दिया।

बग्घी का प्रयोग : संगम क्षेत्र में भारी भीड़ के बावजूद बिना अनुमति बग्घी ले जाने की कोशिश की गई। प्रशासन का कहना है कि इस कृत्य से मेले की व्यवस्था छिन्न-भिन्न हुई और वहां भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो सकती थी।

24 घंटे का अल्टीमेटम : प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 24 घंटे के भीतर संतोषजनक जवाब नहीं मिला, तो भविष्य में उनके मेले में प्रवेश पर रोक लगा दी जाएगी।

‘शंकराचार्य’ पदवी पर भी छिड़ा विवाद

प्रशासन ने न केवल अनुशासनहीनता, बल्कि स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद द्वारा ‘शंकराचार्य’ पदवी के इस्तेमाल पर भी आपत्ति जताई है। नोटिस में कहा गया है कि खुद को शंकराचार्य बताकर बोर्ड लगाना कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन हो सकता है। गौरतलब है कि ज्योतिषपीठ की पदवी को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और स्वामी वासुदेवानंद के बीच विवाद न्यायालय में विचाराधीन है।

अविमुक्तेश्वरानंद का पलटवार: ‘मानहानि का केस करेंगे’

प्रशासन की इस कार्रवाई पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने भी कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने मंगलवार रात 8 पन्नों का विस्तृत जवाब भेजते हुए प्रशासन को चेतावनी दी है। उनका कहना है कि यदि प्रशासन ने अपना नोटिस वापस नहीं लिया, तो वे मानहानि का मुकदमा दर्ज कराएंगे।

विवाद की जड़: क्या हुआ था 18 जनवरी को?

मौनी अमावस्या पर स्नान के लिए पालकी में जाते समय पुलिस ने सुरक्षा कारणों से उन्हें रोका था और पैदल चलने का आग्रह किया था। इसी दौरान शिष्यों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की हुई, जिससे नाराज होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद अपने शिविर के बाहर धरने पर बैठ गए थे। तब से ही प्रशासन और उनके बीच तनाव बना हुआ है।

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