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लखनऊ : वहशी बेटे ने की पिता की हत्या, बहन को 4 दिनों कमरे में कैद रखा, पिता का शव टुकड़ों में फेंकता रहा

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लखनऊ, 24 फरवरी। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में रोंगटे खड़े कर देने वाली घटना सामने आई है, जहां आशियाना इलाके में पिता मानवेंद्र सिंह की हत्‍यारा बेटा 21 वर्षीय अक्षत प्रताप सिंह पुलिस के शिकंजे में है। पैथालॉजी सेंटर चलाने वाले मानवेंद्र सिंह की इच्‍छा थी कि बेटा डॉक्‍टर बने, लेकिन अक्षत बिजनेस करने पर अड़ा हुआ था। इसको लेकर दोनों में झगड़ा हुआ और अक्षत ने रायफल से गोली मार कर पिता की जान ले ली।

पुलिस जांच में पता चला कि अक्षत ने चार दिनों तक अपनी छोटी बहन कृति को कमरे में बंद रखा था। इस बीच वहशी अक्षत शव के छोटे-छोटे टुकड़े कर उसे ठिकाने लगाता रहा। अक्षत ने कृति को धमकी दी कि यदि उसने किसी को कुछ बताया तो वह उसको भी जान से मार देगा। दहशत के मारे कृति कमरे में चार दिनों तक बंद रही। दरवाजा खुलने पर वह रिश्‍तेदारों के गले लगकर जोर से रो पड़ी।

यह घटना गत 20 फरवरी को तड़के करीब 4.30 बजे हुई, जब अक्षत और उसके पिता मानवेंद्र सिंह के बीच राष्ट्रीय पात्रता व प्रवेश परीक्षा (NEET) की तैयारी को लेकर कहासुनी हुई। अक्षत ने पुलिस को बताया कि इस दौरान पिता ने उस पर लाइसेंसी राइफल तान दी थी। राइफल छीनने की कोशिश के दौरान गोली चल गई, जिससे मानवेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई।

‘पिता मेरे ऊपर NEET की तैयारी का दबाव बना रहे थे’

आरोपित अक्षत ने पुलिस को बताया, ‘पिता मेरे ऊपर NEET की तैयारी का दबाव बना रहे थे। जब मैंने तैयारी करने से इनकार कर दिया तो पिता भड़क गए और मेरे ऊपर लाइसेंसी राइफल तान दी। राइफल छीनने की कोशिश में गोली पिता को लग गई।

पिता का शव देखकर चीख पड़ी कृति

गोली चलने की आवाज सुनकर अक्षत की छोटी बहन कृति अपने कमरे से बाहर आई। उसने फर्श पर पिता का शव देखा और चीख पड़ी। अक्षत ने उसे जान से मारने की धमकी देकर चुप करा दिया और चार दिनों तक घर में बंद रखा। इस दौरान अक्षत पिता के शव के टुकड़े कर ठिकाने लगाता रहा।

वर्ष 2017 में हो चुका है मां का देहांत

मानवेंद्र सिंह सालेह नगर और बुद्धेश्वर में वर्धमान नाम से पैथालॉजी भी चलाते थे। उनकी पत्नी का वर्ष 2017 में देहांत हो गया था। मानवेंद्र के पिता सुरेंद्र पाल सिंह सेवानिवृत्त दरोगा हैं और जालौन में रहते हैं। घटना की सूचना पर वह आशियाना पहुंच गए हैं।

पिता की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज करा दी

पड़ोसियों को गुमराह करने के लिए अक्षत ने कहा कि उसके पिता 19 फरवरी को काम से दिल्ली गए थे और फिर नहीं लौटे। उसने 20 फरवरी को थाने में गुमशुदगी की शिकायत भी दर्ज कराई थी ताकि उस पर शक न हो। जब पड़ोसियों ने पूछा तो उसने कहा कि पुलिस सुनवाई नहीं कर रही है। पड़ोसियों ने घरों के बाहर लगे कैमरों की फुटेज खंगाली। 19 फरवरी की रात करीब 12 बजे मानवेंद्र अपनी कार से घर के भीतर जाते नजर आए, जिसके बाद वह बाहर नहीं निकले। फुटेज में अक्षत कार लेकर सदरौना की ओर जाते दिखा।

सचिवालय सुरक्षा में तैनात हैं चाचा अरविंद कुमार

पुलिस ने 21 फरवरी को आशियाना थाने में मानवेंद्र सिंह की गुमशुदगी की शिकायत मिलने के बाद जांच शुरू की। सचिवालय सुरक्षा में तैनात मानवेंद्र के भाई अरविंद कुमार से भी जानकारी ली गई।

शव गोमती में फेंकने की थी योजना

हत्या के बाद अक्षत शव को घसीटकर भूतल पर लाया और एक खाली कमरे में रख दिया। उसने शव को गोमती नदी में फेंकने की योजना बनाई, लेकिन शव का वजन ज्यादा होने के कारण वह अकेले ऐसा नहीं कर सका। इसके बाद अक्षत आरी खरीदकर लाया और पिता के शव के टुकड़े कर दिए। धड़ को ठिकाने लगाने के लिए उसने एक नीला ड्रम खरीदा और उसमें डाल दिया। इससे पहले कि वह धड़ को ठिकाने लगा पाता, उसकी करतूत उजागर हो गई।

अक्षत बीकॉम तो कृति 11वीं की छात्रा

अक्षत टीएस मिश्रा कॉलेज से पढ़ाई कर रहा था। छोटी बहन कृति एलपीएस में 11वीं की छात्रा है। मोहल्‍ले वालों का यह भी कहना है कि अक्षत अक्‍सर अपने घर पर एक युवती को लाता था, जिसका पिता ने विरोध किया था। पुलिस की एक थ्‍योरी यह भी मान रही है कि अक्षत पिता के पूरे बिजनेस पर अपना वर्चस्‍व चाहता था।

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