नई दिल्ली, 28 जून। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न पीवी नरसिम्हा राव की 105वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। पीएम मोदी ने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव का कुशल नेतृत्व, बौद्धिक क्षमता और राष्ट्र निर्माण में उनका योगदान देश के इतिहास में सदैव याद रखा जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव गारू को उनकी जयंती पर श्रद्धा-सुमन अर्पित करता हूं। उन्हें उनके दूरदर्शी नेतृत्व और बुद्धिमत्ता के लिए हमेशा याद किया जाएगा। हमारी सरकार के लिए यह गर्व की बात है कि राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान को सम्मान देते हुए इस वर्ष की शुरुआत में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया।” उन्होंने आगे कहा कि देश के एक चुनौतीपूर्ण दौर में पीवी नरसिम्हा राव ने भारत की प्रगति को नई दिशा दी। एक सक्षम प्रशासक, विद्वान और बहुभाषी व्यक्तित्व के रूप में उन्होंने भारतीय संस्कृति और परंपराओं की गहरी समझ का परिचय दिया।
केंद्रीय मंत्रियों ने भी किया नमन
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी पीवी नरसिम्हा राव को याद करते हुए कहा कि उन्होंने देश की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने और आम लोगों के जीवन को आसान बनाने के लिए ऐतिहासिक प्रयास किए। उन्होंने कहा कि राष्ट्र उनके योगदान को हमेशा याद रखेगा। केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्री मनोहर लाल ने भी उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि देश के आर्थिक विकास और दूरदर्शी नेतृत्व में उनका योगदान अविस्मरणीय है।
मुख्यमंत्रियों ने भी किया याद
हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि पीवी नरसिम्हा राव ने देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसके लिए उन्हें सदैव याद किया जाएगा। वहीं, बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने भी उन्हें श्रद्धांजलि देते हुए आर्थिक सुधारों और राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान को ऐतिहासिक बताया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने भी पूर्व प्रधानमंत्री को नमन करते हुए कहा कि देश के विकास में उनका योगदान हमेशा प्रेरणास्रोत बना रहेगा।
आर्थिक सुधारों के सूत्रधार थे पीवी नरसिम्हा राव
पीवी नरसिम्हा राव का जन्म 28 जून 1921 को वर्तमान तेलंगाना के करीमनगर जिले में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1991 से 1996 तक भारत के नौवें प्रधानमंत्री के रूप में देश का नेतृत्व किया। उनके कार्यकाल में लागू किए गए आर्थिक उदारीकरण और सुधारों ने भारतीय अर्थव्यवस्था को नई दिशा दी। वे एक कुशल प्रशासक, बहुभाषी विद्वान, लेखक और भारत की विदेश नीति को नई मजबूती देने वाले नेताओं में गिने जाते हैं।

