नई दिल्ली, 31 मार्च। भारतीय वायुसेना के लिए अब लगभग 1,950 करोड़ रुपये की लागत से स्वदेशी माउंटेन रडार तैयार किए जाएंगे। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को यह जानकारी देते हुए बताया कि इन रडार की तैनाती से देश की वायु रक्षा क्षमता (एयर डिफेंस) और मजबूत होगी। साथ ही दुश्मन की किसी भी हरकत का समय रहते पता लगाना आसान होगा।
अत्याधुनिक माउंटेन रडार दुर्गम क्षेत्रों में भी सटीकता के साथ काम करने में सक्षम हैं। विशेष रूप से पहाड़ी और कठिन सीमावर्ती इलाकों में भी दुश्मन की हवाई गतिविधियों पर नजर रखने के लिए ये रडार उपयुक्त हैं।
गौरतलब है कि भारत की सीमाएं, खासकर उत्तर और पूर्व दिशा में, पहाड़ी क्षेत्रों से तो वहीं पश्चिम में रेगिस्तान से घिरी हुई हैं। ऐसे में ये आधुनिक रडार अलग-अलग टेरीयन में भारतीय वायुसेना के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकते हैं। रक्षा मंत्रालय की यह पहल आत्मनिर्भर भारत अभियान के तहत की गई है। इसके अंतर्गत देश ने रक्षा क्षेत्र में यह एक और बड़ा कदम उठाया है।
भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड से रक्षा मंत्रालय का 1,950 करोड़ का करार
रक्षा मंत्रालय और भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड के बीच मंगलवार को भारतीय वायुसेना के लिए दो माउंटेन रडार खरीदने को लेकर लगभग 1,950 करोड़ रुपये का यह महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। यह समझौता नई दिल्ली में दोनों पक्षों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ।
इस परियोजना में देश में विकसित तकनीक का उपयोग किया जाएगा
रक्षा मंत्रालय के अनुसार यह सौदा ‘भारतीय-स्वदेशी रूप से डिजाइन, विकसित और निर्मित’ श्रेणी के तहत किया गया है। इसका अर्थ यह है कि इस परियोजना में देश में विकसित तकनीक का उपयोग किया जाएगा। इन रडार सिस्टम को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन की इलेक्ट्रॉनिक्स एवं रडार विकास स्थापना द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है।
वहीं, इसका निर्माण भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड करेगी। निर्माण की इस महत्वपूर्ण परियोजना में रडार के साथ-साथ उससे जुड़े उपकरण और जरूरी बुनियादी ढांचे को भी शामिल किया गया है। इस सौदे का एक बड़ा फायदा यह भी है कि इससे विदेशी रक्षा उपकरणों पर निर्भरता कम होगी और देश में ही रक्षा उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा।
देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे
साथ ही, इससे देश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और घरेलू भारतीय रक्षा उद्योगों को मजबूती मिलेगी। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह समझौता भारत को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम है। इससे देश की सुरक्षा व्यवस्था को भी और अधिक सशक्त बनाने में मदद मिलेगी।

