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कैश कांड में फंसे जस्टिस यशवंत वर्मा को झटका, सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की याचिका, जांच कमेटी के गठन को दी थी चुनौती

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नई दिल्ली, 16 जनवरी। कैश कांड में फंसे इलाहाबाद हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है, जब शीर्ष अदालत ने शुक्रवार को उनकी याचिका खारिज कर दी, जिसमें उन्होंने भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच कर रहे संसदीय कमेटी की कानूनी वैधता को चुनौती दी थी।

उल्लेखनीय है कि जस्टिस वर्मा ने कोर्ट में एक याचिका दायर की थी कि उन्हें पद से हटाने का प्रस्ताव संसद के दोनों सदनों में पेश किया गया था। ऐसे में दोनों सदनों की तरफ से एक संयुक्त कमेटी बननी चाहिए थी। जस्टिस दीपांकर दत्ता और सतीश चंद्र शर्मा की बेंच इस मामले की सुनवाई कर रही थी। वहीं, जस्टिस दत्ता ने बेंच की तरफ से फैसला सुनाया। बेंच ने पांच सवाल बनाए और उनके जवाब दिए।

जस्टिस दत्ता ने कहा कि पहला सवाल, ज्वॉइंट कमेटी का गठन, जहां एक ही दिन दोनों सदनों में नोटिस दिया गया हो, उसके बाद एक सदन के पीठासीन अधिकारी प्रस्ताव को अस्वीकार कर देते हैं और दूसरे सदन के पीठासीन अधिकारी उसी प्रस्ताव को स्वीकार कर लेते हैं। इस पर जस्टिस दत्ता ने मामले को साफ करते हुए कहा कि नहीं, ऐसा नहीं है। यह नियम सिर्फ एक खास स्थिति पर लागू होता है। यानी, जब एक ही दिन दिए गए प्रस्ताव के नोटिस दोनों सदनों द्वारा स्वीकार कर लिए गए हों। यह किसी भी सदन के व्यक्तिगत अधिकार को सीमित या नकारता नहीं है।

उन्होंने कहा कि दूसरा मुद्दा यह है कि क्या राज्यसभा के डिप्टी चेयरमैन प्रस्ताव की सूचना को मानने से मना करने के काबिल हैं। उन्होंने इसका जवाब हां में दिया। वहीं, जस्टिस दत्ता ने तीसरा सवाल करते हुए कहा कि डिप्टी चेयरमैन के प्रस्ताव को मानने से मना करने पर स्पीकर के एक्शन की वैधता पर क्या असर होगा। इस पर जस्टिस दत्ता ने जवाब देते हुए कहा कि इस मामले की जांच करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि डिप्टी चेयरमैन के ऑर्डर को चैलेंज नहीं किया गया है। बहस करो, अगर इसकी जांच भी हो जाए. तो इसका कोई असर नहीं होगा क्योंकि स्पीकर ने कमेटी बनाकर कोई गैर-कानूनी काम नहीं किया है।

इससे पहले देश की सर्वोच्च अदालत ने गुरुवार, आठ जनवरी को जस्टिस वर्मा की याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया था। कोर्ट ने कहा कि दोनों सदनों की सहमति से ही जज को उसके पद से हटाया जा सकता है।

पिछले वर्ष मार्च में जस्टिस वर्मा के घर से मिले थे नोट

गौरतलब है कि पिछले वर्ष 14 मार्च, 2025 को जस्टिस यशवंत वर्मा के दिल्ली आवास पर आग लग गई थी, उस समय वह दिल्ली हाई कोर्ट के जज थे। वहीं, आग बुझाने के दौरान पुलिस और दमकल कर्मियों को उनके गैराज से बड़ी संख्या में जले हुए नोट मिले थे। इसके बाद बड़ा विवाद हुआ और उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। साथ ही उन्हें न्यायिक कार्यों से विरत कर दिया गया।

लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बनाई कमेटी

मामले को तूल पकड़ता देख लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने 12 अगस्त, 2025 को एक जांच कमेटी का गठन किया, जिसकी कमान सुप्रीम कोर्ट के जज अरविंद कुमार के हाथों में सौंपी गई। वहीं, मद्रास हाई कोर्ट के जज मनिंद्र मोहन श्रीवास्तव और सीनियर एडवोकेट बीवी आचार्य इस कमेटी के सदस्य बनाए गए। आगामी 24 जनवरी को जांच कमेटी के सामने जस्टिस वर्मा को पेश होना है।

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