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भारतीय सेना को मिले बेहद सुरक्षित बख्तरबंद वाहन, गोला-बारूद और बारूदी सुरंग बेअसर

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नई दिल्ली, 26 जुलाई। भारतीय सेना की ताकत में जल्द ही बढ़ोतरी होने वाली है। इस क्रम में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड (टीएएसएल) ने भारतीय सेना को देश में ही बने उन्नत क्विक रिएक्शन फाइटिंग ह्वीकल (क्यूआरएफवी) की डेलिवरी कर दी है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड ने यह जानकारी देते हुए ट्विटर पर लिखा,  ‘TASL ने सफलतापूर्वक भारतीय सेना को QRFV डिलिवर किया।’

टाटा की नई स्वदेशी बख्तरबंद गाड़ियां सुरक्षित और तेज भी

भारतीय सेना को लंबे समय से ऐसी बख्तरबंद गाड़ियों की जरूरत थी जो सुरक्षित होने के साथ-साथ तेज भी हों। टाटा की नई स्वदेशी बख्तरबंद गाड़ियां इन दोनों जरूरतों को पूरा करेंगी। खास डिजाइन की वजह से इन गाड़ियों की स्पीड तेज है साथ ही यह हल्की और मजबूत भी हैं।

इन गाड़ियों पर असॉल्ट राइफलों की गोलियों और बमों का असर नहीं होता। इतना ही नहीं अत्याधुनिक तकनीक से बनी ये गाड़ियां माइन प्रोटेक्टेड आर्मर्ड व्हीकल हैं। इसका मतलब यह है कि अगर इनके नीचे बारूदी सुरंग भी फट जाए तो अंदर बैठे सैनिकों को कोई नुकसान नहीं होगा। ऐसे पहले वाहन को पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल एमएम नरवणे ने अप्रैल में सेना में शामिल किया था।

सेना में स्वदेशी उपकरणों के इस्तेमाल पर जोर

सरकार की पूरी कोशिश है कि सेना में ज्यादा से ज्यादा देश में ही बने हथियारों और उपकरणों का इस्तेमाल हो। सरकार इसके लिए निजी कम्पनियों को प्रोत्साहन भी दे रही है। टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स लिमिटेड की बनाई क्विक रिएक्शन फाइटिंग ह्वीकल इसी अभियान की देन है।

प्रधानमंत्री मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान का एक बड़ा मकसद भारत की तीनों सेनाओं को देश में बने उन्नत हथियारों से लैस करना भी है। स्वदेशी रक्षा उपकरणों को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बाहर से खरीद को भी कम किया है।

पिछले चार वर्षों में 2018-19 से 2021-22 तक, स्वदेशी रक्षा उपकरणों के उत्पादन को प्रोत्साहित करने के लिए केंद्र द्वारा की गई पहलों के परिणामस्वरूप विदेशों से रक्षा क्षेत्र के लिए खरीद पर होने वाले खर्च को कुल खर्च के 46 प्रतिशत से घटाकर 36 प्रतिशत कर दिया गया है।

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