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फ्रांस से 114 नए राफेल जेट खरीदेगा भारत, रक्षा मंत्रालय ने 3.25 लाख करोड़ के सौदे को दी मंजूरी

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नई दिल्ली, 12 फरवरी। केंद्र सरकार ने फ्रांस से नए राफेल लड़ाकू विमानों की खरीद के लिए हरी झंडी दे दी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गुरुवार को हुई रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) की बैठक में इस सौदे को मंजूरी दी गई। उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी आतंकी अड्डों को नष्ट करने के लिए भारतीय वायुसेना के ‘ऑपरेशन सिंदूर’ में राफेल की क्षमता पूरी दुनिया ने देखी थी।

अब DAC ने 114 नए राफेल लड़ाकू विमानों को खरीदने के लिए Acceptance of Necessity (AoN) जारी कर दी है। यह सौदा करीब 3.25 लाख करोड़ रुपये का होगा। इसके तहत लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये विमानों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे, जबकि शेष राशि हथियार प्रणालियों, स्पेयर पार्ट्स और लॉजिस्टिक सपोर्ट पर खर्च होगी। इस डील से वायुसेना की स्क्वाड्रन संख्या बढ़ने के साथ ही भारत की सामरिक बढ़त काफी मजबूत होगी।

P8-I समुद्री गश्ती विमान भी खरीदे जाएंगे

प्राप्त जानकारी के अनुसार सिर्फ लड़ाकू विमान ही नहीं, समुद्री मोर्चे पर भी केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। इसी क्रम में 6 पी-8आई समुद्री गश्ती विमानों की खरीद को मंजूरी दी गई है, जिसकी अनुमानित लागत 28 हजार करोड़ रुपये है। साथ ही हाई एल्टीट्यूड प्लेटफॉर्म सिस्टम्स पर करीब 15 हजार करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। यह सिस्टम खुफिया, निगरानी और टोही अभियानों में अहम भूमिका निभाएंगे और भारतीय नौसेना की एंटी-सबमरीन क्षमता को नई मजबूती प्रदान करेंगे।

राफेल विमानों की कुल संख्या 176 हो जाएगी

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार 114 विमानों में से 18 राफेल लड़ाकू विमान सीधे फ्रांस से पूरी तरह तैयार होकर आएंगे जबकि बाकी 96 राफेल विमानों का निर्माण भारत में ही किया जाएगा। इसके लिए फ्रांसीसी कम्पनी डसॉल्ट एविएशन भारतीय निजी क्षेत्र की कम्पनियों के साथ मिलकर काम करेगी।

इस सौदे के बाद भारतीय वायुसेना के बेड़े में राफेल विमानों की कुल संख्या बढ़कर 176 हो जाएगी, जिनमें 36 पुराने, 114 नए और 26 भारतीय नौसेना के लिए हैं। राफेल की सबसे बड़ी ताकत उसकी अत्याधुनिक हथियार प्रणाली है। यह Meteor मिसाइल से लैस है, जिसकी मारक क्षमता 100 किलोमीटर से अधिक है और इसे दुनिया की सबसे उन्नत हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों में गिना जाता है।

2030 तक शुरू हो सकती है राफेल की डेलिवरी

डीएसी से एओएन मिलने के बाद अब इस प्रस्ताव पर औपचारिक बातचीत शुरू होगी। अंतिम मंजूरी प्रधानमंत्री मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट समिति यानी सीसीएस द्वारा दी जाएगी. माना जा रहा है कि विमानों की डेलिवरी 2030 तक शुरू हो सकती है।

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