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ईरान के सबसे ऊंचे पुल को तबाह करने के बाद ट्रंप ने दी धमकी- ‘अभी बहुत कुछ होना बाकी है’

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वाशिंगटन, 3 अप्रैल। अमेरिकी सेना ने ईरान में एक अहम हाईवे पुल पर हमला किया है, जिससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया। वहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी के साथ ईरान से समझौता करने की अपील की है। उन्होंने कहा ईरान को समझौता करना चाहिए वर्ना “आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।” यह हमला बी1 पुल पर हुआ, जो तेहरान को पास के शहर करज से जोड़ता है। अमेरिकी सेना के एक अधिकारी के मुताबिक, यह पुल ईरान की मिसाइल और ड्रोन सेना के लिए सामान ले जाने का एक तय रास्ता था, इसलिए इसे निशाना बनाया गया।

वहीं, ईरान के सरकारी मीडिया ने कहा कि यह पुल अभी चालू नहीं था और सेना इसका इस्तेमाल नहीं कर रही थी। अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में कम से कम आठ लोगों की मौत हुई और कई लोग घायल हुए, जिनमें नवरोज के मौके पर बाहर मौजूद आम नागरिक भी शामिल थे। डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस हमले की सराहना की। उन्होंने लिखा, “ईरान का सबसे बड़ा पुल गिरा दिया गया है, अब इसका कभी इस्तेमाल नहीं होगा। अभी और भी बहुत कुछ होना बाकी है!”

उन्होंने ईरान को यह चेतावनी भी दी कि “इससे पहले कि बहुत देर हो जाए, एक समझौता कर लो।” अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई ईरान की सैन्य व्यवस्था को कमजोर करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। इसका मकसद देश के भीतर मिसाइल और ड्रोन से जुड़े सामान की आवाजाही को रोकना था। ईरान के नेताओं ने इस पर सख्त प्रतिक्रिया दी। संसद अध्यक्ष मोहम्मद गालिबाफ ने कहा, “जब देश की रक्षा की बात आएगी, तो हम में से हर व्यक्ति सैनिक बन जाएगा।” उन्होंने यह भी कहा कि ईरान के लोग तैयार हैं और डटे हुए हैं। तेहरान ने फिलहाल अमेरिका के साथ बातचीत से इनकार कर दिया है। विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि “मौजूदा हालात में बातचीत संभव नहीं है।”

इस हमले के साथ ही अन्य जगहों पर भी हमले हुए। ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, एक हवाई हमले में पाश्चर इंस्टीट्यूट ऑफ ईरान को निशाना बनाया गया, जो एक बड़ा सार्वजनिक स्वास्थ्य केंद्र है। स्वास्थ्य मंत्रालय के प्रवक्ता ने इसे “अंतरराष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा पर सीधा हमला” बताया। यह संघर्ष अब पूरे क्षेत्र में फैलता नजर आ रहा है। इजरायल ने कहा कि उसने ईरान से दागी गई मिसाइलों को रोक दिया। वहीं, यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इजरायल की ओर मिसाइल दागी। राजनयिक स्तर पर भी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। रूस, चीन और फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में होर्मुज स्ट्रेट को खोलने के लिए बल प्रयोग की अनुमति देने के प्रस्ताव को रोक दिया।

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