Breast Cancer Awareness : हर मिनट 4 महिलाओं को ब्रेस्ट कैंसर, जानें लक्षण, बचाव और कब करानी चाहिए जांच

नई दिल्ली, 13 अक्टूबर। ब्रेस्ट कैंसर दुनियाभर में महिलाओं की सेहत से जुड़ी एक गंभीर चुनौती बन चुका है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल अक्टूबर को ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता महीने के रूप में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य महिलाओं को बीमारी के जोखिम, शुरुआती लक्षणों और समय पर जांच व इलाज के महत्व के बारे में जानकारी देना है। इसी कड़ी में संयुक्त राष्ट्र ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट साझा कर लोगों से ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने की अपील की है। ब्रेस्ट कैंसर में स्तन की कुछ कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ने लगती हैं और ट्यूमर का रूप ले सकती हैं। शुरुआती चरण में बीमारी की पहचान होने पर इलाज के बेहतर परिणाम मिलने की संभावना बढ़ सकती है। इसलिए स्तनों में होने वाले असामान्य बदलावों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

हर साल लाखों महिलाएं होती हैं प्रभावित

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 में दुनियाभर में अनुमानित 24 लाख महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला, जबकि करीब 6 लाख 94 हजार महिलाओं की मौत इस बीमारी के कारण हुई। ब्रेस्ट कैंसर दुनिया के लगभग हर देश में महिलाओं को प्रभावित करता है। उम्र बढ़ने के साथ इसका जोखिम बढ़ता है, लेकिन कम उम्र की महिलाओं में भी यह बीमारी हो सकती है। पारिवारिक इतिहास, कुछ आनुवंशिक बदलाव और अन्य कारक भी जोखिम को प्रभावित कर सकते हैं।

क्या है ब्रेस्ट कैंसर और कैसे फैलता है?

ब्रेस्ट कैंसर तब विकसित होता है, जब स्तन की कुछ कोशिकाएं अनियंत्रित रूप से बढ़ने लगती हैं। इसकी शुरुआत अक्सर दूध की नलिकाओं या दूध बनाने वाली ग्रंथियों से होती है। यदि समय पर बीमारी की पहचान और इलाज नहीं किया जाए, तो कैंसर आसपास के ऊतकों और लिम्फ नोड्स तक फैल सकता है। कुछ मामलों में यह शरीर के दूसरे अंगों को भी प्रभावित कर सकता है। हालांकि, हर गांठ कैंसर नहीं होती। स्तन में गांठ या कोई असामान्य बदलाव दिखाई देने पर चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है, ताकि सही कारण का पता लगाया जा सके।

ब्रेस्ट कैंसर के इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज

ब्रेस्ट कैंसर के शुरुआती लक्षणों की पहचान समय पर जांच कराने में मदद कर सकती है। इन संकेतों पर ध्यान देना जरूरी है:

स्तन या बगल में नई गांठ महसूस होना।

स्तन के आकार या आकृति में असामान्य बदलाव।

स्तन की त्वचा पर गड्ढे पड़ना, मोटापन या लालिमा दिखाई देना।

निप्पल का अचानक अंदर की ओर मुड़ना।

निप्पल से असामान्य स्राव निकलना, खासकर खून आना।

स्तन या निप्पल में लगातार दर्द अथवा अन्य असामान्य बदलाव होना।

इनमें से कोई लक्षण दिखाई देने का अर्थ यह नहीं है कि ब्रेस्ट कैंसर ही है। फिर भी, बदलाव नया हो या लगातार बना रहे, तो डॉक्टर से सलाह लेने में देरी नहीं करनी चाहिए।

ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम कम करने के लिए अपनाएं ये आदतें

संयुक्त राष्ट्र की जागरूकता अपील के संदर्भ में स्वस्थ जीवनशैली और जोखिम कम करने वाले उपायों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है। हालांकि, कोई भी उपाय ब्रेस्ट कैंसर से पूरी तरह बचाव की गारंटी नहीं देता।

1. धूम्रपान से बनाएं दूरी

सिगरेट, बीड़ी और अन्य तंबाकू उत्पादों का सेवन कई गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ाता है। बेहतर स्वास्थ्य के लिए धूम्रपान से दूरी बनाना जरूरी है।

2. शराब का सेवन न करें

शराब का सेवन ब्रेस्ट कैंसर के बढ़े हुए जोखिम से जुड़ा है। शराब से दूरी बनाना जोखिम कम करने की दिशा में एक उपयोगी कदम है।

3. नियमित शारीरिक गतिविधि करें

रोजाना टहलना, योग करना, साइकिल चलाना या अपनी क्षमता के अनुसार व्यायाम करना सेहत के लिए फायदेमंद है। नियमित शारीरिक गतिविधि वजन को नियंत्रित रखने में मदद करती है और ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में भी भूमिका निभा सकती है।

4. वजन को स्वस्थ सीमा में रखें

स्वस्थ वजन बनाए रखना, विशेष रूप से मेनोपॉज के बाद, ब्रेस्ट कैंसर के जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है। संतुलित आहार और नियमित गतिविधि को अपनी दिनचर्या में शामिल करें।

5. शरीर में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें

स्तनों में किसी नई गांठ, त्वचा में बदलाव या निप्पल से असामान्य स्राव को अनदेखा न करें। जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से जांच कराएं। लक्षणों का इंतजार किए बिना उम्र और व्यक्तिगत जोखिम के अनुसार स्क्रीनिंग के बारे में भी चिकित्सक से सलाह लें।

समय पर जांच क्यों है जरूरी?

ब्रेस्ट कैंसर की शुरुआती पहचान से इलाज के विकल्प बढ़ सकते हैं और बेहतर परिणाम मिलने की संभावना रहती है। स्क्रीनिंग के लिए मैमोग्राफी का इस्तेमाल किया जाता है। किस उम्र में और कितनी बार स्क्रीनिंग करानी चाहिए, यह व्यक्ति की उम्र, पारिवारिक इतिहास और अन्य जोखिम कारकों पर निर्भर करता है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि ब्रेस्ट कैंसर शुरुआती चरण में हमेशा स्पष्ट लक्षण नहीं दिखाता। इसलिए केवल गांठ महसूस होने पर ही जांच कराने की सोच न रखें। अपनी व्यक्तिगत परिस्थितियों के अनुसार डॉक्टर से स्क्रीनिंग की सलाह लें। ब्रेस्ट कैंसर के प्रति जागरूकता का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यही है कि शरीर में होने वाले बदलावों को गंभीरता से लें, स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सलाह लेने में देरी न करें।

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