मुंबई, 11 अक्टूबर। भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं, जिनकी पहचान किसी एक फिल्म, किरदार या दौर तक सीमित नहीं रहती। अमिताभ बच्चन इसी श्रेणी के कलाकार हैं। बुलंद आवाज, लंबा कद, प्रभावशाली संवाद अदायगी और हर किरदार में जान डाल देने की कला ने उन्हें करोड़ों दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाई है। 11 अक्टूबर 1942 को इलाहाबाद, अब प्रयागराज, में जन्मे अमिताभ बच्चन 11 अक्टूबर 2026 को अपना 84वां जन्मदिन मना रहे हैं।
पांच दशक से अधिक के करियर में उन्होंने असफलताओं का सामना किया, फिल्मों में अपनी अलग पहचान बनाई, जानलेवा हादसे से उबरे, राजनीति में कदम रखा, कारोबारी मुश्किलों का सामना किया और फिर टेलीविजन के जरिए नई पीढ़ी के बीच लोकप्रियता हासिल की। उनकी कहानी केवल एक अभिनेता की सफलता की कहानी नहीं, बल्कि बदलते समय के साथ खुद को साबित करते रहने की मिसाल भी है।
साहित्यिक परिवार में जन्म, पिता से मिली शब्दों की विरासत
अमिताभ बच्चन का पूरा नाम अमिताभ हरिवंश राय बच्चन है। उनके पिता डॉ. हरिवंश राय बच्चन हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित कवि थे और मां तेजी बच्चन सामाजिक व सांस्कृतिक गतिविधियों में रुचि रखती थीं। साहित्यिक वातावरण में पले-बढ़े अमिताभ के व्यक्तित्व पर भाषा और कविता का प्रभाव दिखाई देता है।
उन्होंने नैनीताल के शेरवुड कॉलेज से पढ़ाई की और दिल्ली विश्वविद्यालय के किरोड़ीमल कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। अभिनय की दुनिया में आने से पहले उन्होंने कोलकाता में नौकरी भी की। लेकिन फिल्मों के प्रति आकर्षण उन्हें मुंबई ले आया, जहां शुरुआती संघर्ष के बाद उन्होंने अपनी अलग पहचान बनाई।
आवाज को बताया गया कमी, उसी ने बना दिया पहचान
अमिताभ बच्चन के शुरुआती फिल्मी दिनों में उनकी लंबी कद-काठी, गंभीर चेहरा और भारी आवाज को उस दौर के प्रचलित रोमांटिक हीरो की छवि से अलग माना जाता था। उनकी आवाज को लेकर भी सवाल उठे, लेकिन आगे चलकर यही आवाज उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गई।
वर्ष 1969 में फिल्म ‘सात हिंदुस्तानी’ से उन्होंने अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें तुरंत बड़ी व्यावसायिक सफलता नहीं मिली, लेकिन उन्होंने काम करना जारी रखा। धीरे-धीरे उनके अभिनय की गंभीरता और पर्दे पर प्रभाव छोड़ने की क्षमता को पहचान मिलने लगी।
‘जंजीर’ ने बदली किस्मत, बन गए एंग्री यंग मैन
वर्ष 1973 में रिलीज हुई फिल्म ‘जंजीर’ अमिताभ बच्चन के करियर का निर्णायक मोड़ साबित हुई। इंस्पेक्टर विजय खन्ना के किरदार में उनके गुस्से, दृढ़ता और अन्याय के खिलाफ खड़े होने के अंदाज ने दर्शकों को प्रभावित किया। इसी फिल्म के बाद उन्हें ‘एंग्री यंग मैन’ के रूप में पहचान मिलने लगी।
इसके बाद ‘दीवार’ और ‘शोले’ जैसी फिल्मों ने उनकी लोकप्रियता को नई ऊंचाई दी। ‘दीवार’ में विजय का किरदार सामाजिक असमानता और परिस्थितियों से उपजे आक्रोश का प्रतीक बना, जबकि ‘शोले’ में जय के रूप में उनके संयमित अभिनय, सहज हास्य और भावनात्मक अभिव्यक्ति ने दर्शकों पर गहरी छाप छोड़ी। 1970 के दशक में अमिताभ की छवि उस दौर के युवाओं के गुस्से, निराशा और व्यवस्था से टकराने की भावना से जुड़ गई। यही वजह रही कि वे महज एक सफल अभिनेता नहीं, बल्कि एक पूरे दौर की पहचान बन गए।
एक्शन हीरो से कॉमेडी और गंभीर किरदारों तक
अमिताभ बच्चन की सफलता का आधार सिर्फ एक्शन फिल्में नहीं रहीं। उन्होंने अलग-अलग शैलियों में अभिनय करके अपनी प्रतिभा का विस्तार किया।
‘अमर अकबर एंथनी’ (1977): एंथनी गोंसाल्विस के किरदार में उन्होंने अपनी कॉमिक टाइमिंग और मनोरंजक अंदाज से दर्शकों को खूब हंसाया।
‘डॉन’ (1978): दो अलग व्यक्तित्वों वाले किरदारों को निभाकर उन्होंने अपने अभिनय की विविधता दिखाई। फिल्म के संवाद और संगीत भी बेहद लोकप्रिय हुए।
‘अग्निपथ’ (1990): विजय दीनानाथ चौहान के गंभीर और प्रभावशाली किरदार के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘ब्लैक’ (2005): एक दृष्टि और श्रवण संबंधी दिव्यांगता वाली छात्रा को शिक्षित करने वाले शिक्षक की भूमिका में उन्होंने संवेदनशील अभिनय किया। इस फिल्म के लिए भी उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला।
‘पीकू’ (2015): एक जिद्दी, मजाकिया और भावुक बुजुर्ग पिता के किरदार में उन्होंने साबित किया कि उम्र के साथ भूमिकाएं बदल सकती हैं, लेकिन अभिनय की ताकत बरकरार रह सकती है।
‘कभी-कभी’, ‘त्रिशूल’, ‘काला पत्थर’, ‘सिलसिला’, ‘शराबी’, ‘मोहब्बतें’, ‘बागबान’, ‘पा’, ‘पिंक’, ‘बदला’ और ‘गुलाबो सिताबो’ जैसी फिल्मों ने उनके करियर को अलग-अलग रंग दिए। उन्होंने एक्शन हीरो से लेकर रोमांटिक अभिनेता, हास्य कलाकार, पिता और गंभीर चरित्र अभिनेता तक कई रूपों में दर्शकों का मनोरंजन किया।
1982 का ‘कुली’ हादसा: जब पूरा देश करने लगा दुआ
अमिताभ बच्चन के जीवन की सबसे भावनात्मक घटनाओं में से एक वर्ष 1982 में फिल्म ‘कुली’ की शूटिंग के दौरान हुआ हादसा था। एक लड़ाई के दृश्य के दौरान उन्हें गंभीर चोट लगी और उनकी हालत नाजुक हो गई। उनके अस्पताल में भर्ती होने की खबर से देशभर में चिंता फैल गई। प्रशंसक उनकी सलामती के लिए दुआ करने लगे। परिवार के साथ-साथ उनके चाहने वालों की निगाहें लगातार उनकी सेहत पर बनी रहीं। लंबे उपचार और संघर्ष के बाद अमिताभ स्वस्थ हुए और फिर फिल्मों में लौटे। यह घटना उनके जीवन की ऐसी याद बन गई, जिसने उनके और प्रशंसकों के बीच भावनात्मक रिश्ते को और गहरा कर दिया।
राजनीति में भी आजमाई किस्मत
वर्ष 1984 में अमिताभ बच्चन ने राजनीति में कदम रखा। वह इलाहाबाद लोकसभा सीट से चुनाव जीतकर संसद पहुंचे। उनके चुनाव लड़ने को उनकी लोकप्रियता के विस्तार के रूप में देखा गया। हालांकि, उनका राजनीतिक सफर लंबा नहीं चला। वर्ष 1987 में उन्होंने लोकसभा की सदस्यता छोड़ दी और इसके बाद फिर से फिल्मों पर ध्यान केंद्रित किया। राजनीति का अनुभव उनके जीवन का एक अलग अध्याय रहा, जिसने उन्हें अभिनय से इतर सार्वजनिक जीवन की चुनौतियों से भी परिचित कराया।
कारोबार में मुश्किलें, फिर वापसी की नई कहानी
1990 के दशक में अमिताभ बच्चन ने अमिताभ बच्चन कॉरपोरेशन लिमिटेड (ABCL) के जरिए मनोरंजन कारोबार में अपनी पहचान बनाने की कोशिश की। कंपनी को आर्थिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ा और यह दौर उनके लिए पेशेवर रूप से चुनौतीपूर्ण रहा। लेकिन अमिताभ ने मुश्किलों के आगे हार नहीं मानी। उन्होंने अभिनय में वापसी की और अपने करियर को नई दिशा दी। उनकी यह वापसी इस बात का उदाहरण बनी कि लंबे समय तक सफलता हासिल करने के बावजूद कठिन दौर आ सकता है, लेकिन निरंतर प्रयास से नई शुरुआत भी संभव है।
‘कौन बनेगा करोड़पति’ ने घर-घर तक पहुंचाया
वर्ष 2000 में अमिताभ बच्चन ने टेलीविजन क्विज शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ की मेजबानी शुरू की। यह उनके करियर का एक और बड़ा मोड़ साबित हुआ। फिल्मों में गंभीर और प्रभावशाली दिखने वाले महानायक का सहज, आत्मीय और संवेदनशील रूप दर्शकों के सामने आया।
प्रतियोगियों से सम्मानपूर्वक बात करना, उनकी जिंदगी की कहानियां सुनना और ज्ञान को महत्व देना इस कार्यक्रम की खास पहचान बना। छोटे शहरों, गांवों और सामान्य परिवारों से आने वाले प्रतिभागियों को मंच मिलने से शो की लोकप्रियता और बढ़ी। केबीसी के जरिए अमिताभ बच्चन ने नई पीढ़ी के दर्शकों के बीच भी अपनी जगह बनाए रखी। 2026 में भी वह ‘कौन बनेगा करोड़पति’ के 18वें सीजन से जुड़े रहे। हाल के विशेष जन्मदिन एपिसोड में उनकी मां तेजी बच्चन की आवाज सुनाए जाने का भावुक क्षण भी चर्चा में रहा।
परिवार: जया बच्चन, अभिषेक और श्वेता
अमिताभ बच्चन ने वर्ष 1973 में अभिनेत्री जया भादुड़ी से विवाह किया। जया बच्चन हिंदी सिनेमा की प्रतिष्ठित अभिनेत्रियों में शामिल हैं। उनके परिवार में बेटा अभिषेक बच्चन और बेटी श्वेता बच्चन नंदा हैं। अभिषेक ने अभिनय के क्षेत्र में अपना करियर बनाया, जबकि श्वेता लेखन और अन्य रचनात्मक गतिविधियों से जुड़ी रही हैं। बच्चन परिवार की फिल्मों और सार्वजनिक जीवन में सक्रियता ने इसे भारतीय मनोरंजन जगत के चर्चित परिवारों में शामिल किया है।
राष्ट्रीय पुरस्कारों से पद्म विभूषण तक मिले सम्मान
भारतीय सिनेमा में अमिताभ बच्चन के योगदान को कई बड़े सम्मानों से पहचाना गया है। उनके प्रमुख सम्मानों में शामिल हैं:
- राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार: सर्वश्रेष्ठ अभिनेता के लिए चार बार सम्मानित।
- पद्मश्री: वर्ष 1984 में सम्मानित।
- पद्म भूषण: वर्ष 2001 में सम्मानित।
- पद्म विभूषण: वर्ष 2015 में सम्मानित।
- दादासाहेब फाल्के पुरस्कार: वर्ष 2018 के लिए चयनित, यह सम्मान उन्हें 2019 में प्रदान किया गया।
ये सम्मान उनके लंबे करियर, अभिनय की विविधता और भारतीय सिनेमा में उनके योगदान को रेखांकित करते हैं।
उम्र बढ़ी, लेकिन अभिनय के नए प्रयोग जारी
अमिताभ बच्चन की खासियत यह रही कि उन्होंने अपनी लोकप्रियता को सिर्फ पुरानी फिल्मों और चर्चित संवादों तक सीमित नहीं रखा। उम्र के साथ उन्होंने किरदारों का चयन बदला और नई पीढ़ी के निर्देशकों के साथ काम किया।
‘ब्लैक’, ‘पा’, ‘पीकू’, ‘पिंक’, ‘बदला’, ‘गुलाबो सिताबो’ और ‘कल्कि 2898 एडी’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय ने अलग-अलग पीढ़ियों के दर्शकों को आकर्षित किया। कभी संवेदनशील शिक्षक, कभी जिद्दी पिता, कभी रहस्यमय व्यक्तित्व और कभी पौराणिक योद्धा के रूप में उन्होंने अपनी अभिनय क्षमता के नए आयाम प्रस्तुत किए। सितंबर 2026 में आई मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, अमिताभ बच्चन ने काम से संन्यास लेने की अटकलों को खारिज किया था। उनके मुताबिक, उनके एक कथन का आशय काम छोड़ना नहीं, बल्कि सोने जाना था।
84वें जन्मदिन पर भी कायम है महानायक का जादू
अमिताभ बच्चन की जिंदगी का सफर बताता है कि सफलता केवल प्रतिभा से नहीं, बल्कि संघर्षों का सामना करने, समय के साथ खुद को बदलने और काम के प्रति निरंतर समर्पण से भी बनती है। शुरुआती असफलताओं से लेकर ‘जंजीर’ की कामयाबी, ‘कुली’ हादसे से उबरने, कारोबारी मुश्किलों और केबीसी की लोकप्रियता तक उनका सफर उतार-चढ़ाव से भरा रहा है।
आज अमिताभ बच्चन केवल एक अभिनेता नहीं, बल्कि भारतीय सिनेमा की सांस्कृतिक स्मृति का हिस्सा हैं। उनके संवाद, किरदार और फिल्मों की विरासत कई पीढ़ियों को जोड़ती है। 84वें जन्मदिन पर उनके प्रशंसकों के लिए सबसे बड़ी बात यही है कि सदी का यह महानायक आज भी अभिनय और मनोरंजन की दुनिया में सक्रिय है।


