Stock Market: सातवें दिन भी शेयर बाजार में गिरावट, Sensex-Nifty लाल निशान में; IT शेयरों ने संभाला मोर्चा

मुंबई, 19 अगस्त। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में बुधवार को भी दबाव देखने को मिला। सेंसेक्स और निफ्टी लगातार सातवें कारोबारी सत्र में गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। हालांकि, IT शेयरों में खरीदारी ने प्रमुख सूचकांकों को कुछ सहारा दिया। इससे पहले मंगलवार को निफ्टी 50 लगातार छठे सत्र में गिरकर 24,154.90 पर बंद हुआ था, जबकि सेंसेक्स 77,235.46 पर बंद हुआ था।

Sensex और Nifty की सपाट शुरुआत

बुधवार को बीएसई सेंसेक्स पिछले बंद स्तर 77,235.46 से 17.41 अंक यानी 0.02 फीसदी गिरकर 77,218.05 पर खुला। शुरुआती कारोबार में गिरावट बढ़ी और सेंसेक्स 76,991.28 के इंट्रा-डे लो तक फिसला। वहीं, इसका दिन का उच्च स्तर 77,347.81 रहा। इसी तरह Nifty 50 24,154.90 के पिछले बंद के मुकाबले 2.85 अंक यानी 0.01 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 24,152.05 पर खुला। कारोबार के दौरान निफ्टी 24,065.10 के निचले और 24,172.85 के ऊपरी स्तर तक गया। खबर लिखे जाने तक सेंसेक्स 222.87 अंक यानी 0.29 फीसदी की गिरावट के साथ 77,012.59 पर कारोबार कर रहा था। निफ्टी 50 भी 74 अंक यानी 0.31 फीसदी टूटकर 24,080.90 पर था।

IT शेयरों ने बाजार को दिया सहारा

सेक्टरों की बात करें तो निफ्टी IT इंडेक्स 0.82 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला प्रमुख सेक्टर रहा। निफ्टी मिडस्मॉल IT एंड टेलीकॉम में भी 0.59 फीसदी की तेजी रही। इसके अलावा FMCG इंडेक्स में करीब 0.20 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई। रियल्टी और REIT से जुड़े इंडेक्स भी करीब 0.20 फीसदी तक मजबूत रहे। ऑयल एंड गैस इंडेक्स में करीब 0.08 फीसदी की मामूली तेजी रही।

Metal और Auto शेयरों पर दबाव

दूसरी ओर, मेटल और ऑटो शेयरों में बिकवाली देखने को मिली। निफ्टी मेटल 0.35 फीसदी और निफ्टी ऑटो 0.14 फीसदी नीचे रहा। हेल्थकेयर, फार्मा और केमिकल्स से जुड़े शेयरों में भी हल्की कमजोरी देखी गई। व्यापक बाजार में निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप क्रमशः 0.39 फीसदी और 0.37 फीसदी की गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए।

Crude Oil की तेजी से बढ़ी चिंता

भारतीय बाजार पर सबसे बड़ा दबाव अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक बॉन्ड यील्ड में उछाल से बना हुआ है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण ऊर्जा आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है। ब्रेंट क्रूड करीब 92 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया है, जो लगभग तीन सप्ताह का उच्च स्तर है। ईरान और अमेरिका से जुड़े घटनाक्रम तथा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अनिश्चितता ने भी निवेशकों की चिंता बढ़ाई है। महंगे तेल से भारत जैसे तेल आयातक देशों में महंगाई, चालू खाते और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।

Global Bond Yield भी बाजार के लिए चुनौती

कच्चे तेल के साथ-साथ वैश्विक बॉन्ड यील्ड में तेजी भी निवेशकों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। ऊंची यील्ड के कारण सुरक्षित परिसंपत्तियों का आकर्षण बढ़ सकता है, जिससे उभरते बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता प्रभावित होती है। Reuters के मुताबिक, 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयरों से करीब 25 अरब डॉलर की निकासी की है, हालांकि मंगलवार को उन्होंने भारतीय शेयरों में 1,652 करोड़ रुपये की खरीदारी की।

एशियाई बाजारों में भी कमजोरी

पश्चिम एशिया की स्थिति और सेमीकंडक्टर शेयरों में दबाव के बीच बुधवार को एशियाई बाजारों में भी निवेशकों का रुख सतर्क रहा। वैश्विक बाजारों में बढ़ी अनिश्चितता का असर भारतीय बाजार की धारणा पर भी पड़ा।

आगे कैसी रहेगी बाजार की चाल?

विशेषज्ञों के मुताबिक, जब तक पश्चिम एशिया के तनाव में स्पष्ट कमी नहीं आती और कच्चे तेल की कीमतों में स्थिरता नहीं लौटती, तब तक भारतीय शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव बने रहने की संभावना है। हालांकि, मजबूत घरेलू आर्थिक संकेतक, GDP वृद्धि की बेहतर संभावनाएं और घरेलू निवेशकों की भागीदारी बाजार को कुछ हद तक सहारा दे सकती है। ऐसे माहौल में निवेशकों की नजर कच्चे तेल की कीमतों, वैश्विक बॉन्ड यील्ड, विदेशी निवेशकों के रुख और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम पर रहेगी।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -

Most Popular